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झारखंड के पूर्व CM हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से मिली जमानत, 5 महीने बाद जेल से होगी रिहाई

झारखंड हाई कोर्ट से राज्य के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले से जुड़े मामले में जमानत मिल गई है. दरअसल, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर 31 करोड़ रुपये से अधिक की 8.86 एकड़ जमीन अवैध रूप से हासिल करने का आरोप है.

Hemant Soren (File Photo) Hemant Soren (File Photo)
aajtak.in
  • रांची,
  • 28 जून 2024,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले से जुड़े मामले में बड़ी राहत मिली है. राज्य के हाई कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई है, जिसके बाद पांच महीने से जेल में बंद सोरेन की अब रिहाई हो सकेगी.

हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है. बता दें कि 13 जून को सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) और बचाव पक्ष की ओर से बहस पूरी होने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया गया था.

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एक महीने पहले सामने आया था नया लुक

एक महीने पहले हेमंत सोरेन का नया लुक सामने आया था. दरअसल, हेमंत सोरेन अपने बड़े चाचा राजा राम सोरेन का नेमरा में दशकर्म का श्राद्ध कार्यक्रम था. इसी श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने हेमंत सोरेन पुलिस कस्टडी में अपने आवास आए हुए थे और यहां पर ही उनका नया लुक सामने आया था, जिसमें वह अपने पिता शिबू सोरेन की तरह बढ़ी हुई दाढ़ी में अलग ही अंदाज में नजर आए थे. यही नहीं हेमंत सोरेन का पहनावा भी अपने पिता की तरह दिखा था.

क्या है झारखंड का जमीन घोटाला

दरअसल, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर 31 करोड़ रुपये से अधिक की 8.86 एकड़ जमीन अवैध रूप से हासिल करने का आरोप है. हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद 31 जनवरी को कथित भूमि घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद से वह रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा जेल में हैं.

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ED ने 8.86 एकड़ जमीन की कुर्की की

इस मामले में ईडी ने 191 पन्नों की चार्जशीट में हेमंत सोरेन, राजकुमार पाहन, हिलारियास कच्छप, भानु प्रताप प्रसाद और बिनोद सिंह को आरोपी बनाया है. उस जमीन के टुकड़े को भी ईडी ने 30 मार्च को कुर्क कर लिया है और जिसकी कीमत 31.07 करोड़ रुपये से अधिक है. केंद्रीय एजेंसी को 2022 में रांची के मोरहाबादी में रक्षा मंत्रालय की 4.55 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच करते समय उपरोक्त भूमि घोटाले के बारे में भनक लगी थी. ईडी के अनुसार, जांच में पाया गया कि पूर्व डीसी रांची छवि रंजन और भानु प्रताप प्रसाद (झारखंड सरकार के राजस्व विभाग के उप-निरीक्षक) सहित सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से दस्तावेजों में धोखाधड़ी करके कुछ निजी व्यक्तियों के एक समूह ने 8.86 एकड़ भूमि हड़प ली थी.

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