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चुनाव से ठीक पहले जिन राज्यों में बीजेपी ने बदले CM, वहां मिली जीत, सिर्फ कर्नाटक ने किया निराश... अब हरियाणा में क्या आएंगे नतीजे?

बीजेपी ने गुजरात में मुख्यमंत्री बदला और चुनाव में बड़ी जीत हासिल की. त्रिपुरा में मुख्यमंत्री बदला और चुनाव जीतकर आई. उत्तराखंड में तो दो-दो सीएम बदले गए, जीत बीजेपी की हुई. हालांकि, कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदला, लेकिन बीजेपी की जीत नहीं मिली. अब हरियाणा में मुख्यमंत्री बदल दिया है. ऐसे में आगे क्या होगा? क्या बीजेपी अपने पुराने रिकॉर्ड को दोहरा पाएगी?

उत्तराखंड, गुजरात, कर्नाटक, त्रिपुरा के बाद हरियाणा में चुनाव से पहले बीजेपी ने सीएम बदल दिया है. उत्तराखंड, गुजरात, कर्नाटक, त्रिपुरा के बाद हरियाणा में चुनाव से पहले बीजेपी ने सीएम बदल दिया है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 9:13 AM IST

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हरियाणा में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है. मंगलवार दोपहर सीएम मनोहर लाल खट्टर समेत पूरी कैबिनेट ने इस्तीफा दिया और शाम तक नायब सिंह सैनी को नया सीएम बना दिया गया. राज्य में साढ़े चार साल से बीजेपी और जेजेपी गठबंधन की सरकार चल रही थी. सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी तो अलायंस टूट गया. सवाल यह है कि राज्य में कुछ महीने के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में बीजेपी का यह बड़ा दांव हर किसी को हैरान कर रहा है. हालांकि, बीजेपी के खाते में कुछ ऐसे चौंकाने वाले रिकॉर्ड भी हैं, जब पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले कई राज्यों में सीएम बदले और सरकार में वापसी की है.

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बीजेपी ने गुजरात में मुख्यमंत्री बदला और चुनाव में बड़ी जीत हासिल की. त्रिपुरा में मुख्यमंत्री बदला और चुनाव जीतकर आई. उत्तराखंड में तो दो-दो सीएम बदले गए, जीत बीजेपी की हुई. हालांकि, कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदला, लेकिन बीजेपी की जीत नहीं मिली. अब हरियाणा में मुख्यमंत्री बदल दिया है. ऐसे में आगे क्या होगा? क्या बीजेपी अपने पुराने रिकॉर्ड को दोहरा पाएगी?

कर्नाटक में गलत साबित हुआ फैसला?

कर्नाटक में 2023 में विधानसभा चुनाव हुए और सत्तारूढ़ बीजेपी को बड़ी हार मिली थी. राज्य में कांग्रेस ने सरकार बनाई. कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से ठीक डेढ़ साल पहले बीजेपी ने सीएम फेस बदला था. बीजेपी ने जुलाई 2021 में कर्नाटक के तत्कालीन सीएम बीएस येदियुरप्पा को पद से हटाया और सीएम पद की जिम्मेदारी बसवराज बोम्मई को सौंप दी. दक्षिण के दुर्ग को बचाने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने जोर-शोर से कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. कांग्रेस ने बोम्मई पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और इसे बड़ा मुद्दा बना दिया. इस बीच, येदियुरप्पा समेत अन्य बड़े नेताओं के नाराजगी की खबरें भी आती रहीं. बीजेपी यहां ना एंटी इनकंबेंसी की काट ढूंढ़ सकी और नाराज नेताओं को मनाने में सफल हो पाई. इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला और जीत हासिल की.

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उत्तराखंड में खूब प्रयोग हुए और बीजेपी की हो गई सत्ता में वापसी

सीएम चेहरा बदलकर सत्ता में वापसी का बीजेपी का सबसे सफल प्रयोग उत्तराखंड का रहा है. उत्तराखंड में बीजेपी नेतृत्व को अंदाजा हो चुका था कि पार्टी जबरदस्त एंटी इनकंबेंसी लहर से जूझ रही है. इसकी काट के लिए बीजेपी ने दो बार राज्य में अपने मुख्यमंत्री बदले. 2017 में बीजेपी जब उत्तराखंड में चुनाव जीती तो त्रिवेंद्र सिंह रावत को सीएम बनाया गया. 2021 आते-आते रावत के खिलाफ विधायकों का असंतोष बढ़ गया. लिहाजा आलाकमान ने रावत को सीएम पद से हटा दिया और 10 मार्च 2021 को राज्य की बागडोर तीरथ सिंह रावत को सौंप दी गई. तीरथ सिंह रावत सत्ता, जनता और प्रशासन पर छाप छोड़ने में सफल नहीं रहे और 4 महीने बाद सीएम पद से उनकी छुट्टी हो गई. उसके बाद 4 जुलाई 2021 को पुष्कर सिंह धामी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया. मार्च 2022 में बीजेपी पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चुनावी जंग में उतरी और जीत हासिल की.

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गुजरात में भूपेंद्र पटेल ने दिलाई कामयाबी 

गुजरात बीजेपी की राजनीतिक प्रयोगशाला रही है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य होने की वजह से यहां की छोटी सी राजनीतिक और सामाजिक हलचल का राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव पड़ता है. इसलिए बीजेपी के लिए इस राज्य की सत्ता बेहद महत्वपूर्ण है. 2017 में जब बीजेपी की इस राज्य में सरकार बनी तो विजय रुपानी सीएम बने. रुपानी का कार्यकाल दिसंबर 2022 में खत्म हो रहा था. लेकिन बीजेपी ने माहौल भांपते हुए विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर 2021 में ही नेतृत्व में बदलाव कर दिया और सीएम पद की जिम्मेदारी भूपेंद्र पटेल को दे दी. एक बार फिर से बीजेपी का ये प्रयोग सफल रहा. दिसंबर 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर कामयाबी मिली और गुजरात में लगातार राज करने का बीजेपी का रिकॉर्ड अक्षुण्ण रहा.

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पूर्वोत्तर में माणिक साहा के सिर पर सजा जीत का सेहरा

त्रिपुरा में लेफ्ट का किला ध्वस्तकर बीजेपी ने मार्च 2018 में पहली बार कमल खिलाया. इस विस्मयकारी विजय के बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी बिपल्ब देव को. बिपल्ब देब का कार्यकाल 2023 में खत्म होने वाला था. लेकिन विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बीजेपी ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन कर दिया. बीजेपी ने बिपल्ब देब को संगठन में भेज दिया और सीएम की कुर्सी दी माणिक साहा को. त्रिपुरा के नतीजे तस्दीक करते हैं कि बीजेपी का ये प्रयोग कामयाब रहा और पार्टी ने यहां की सत्ता एक बार फिर से अपने नाम कर ली है. दीगर है कि त्रिपुरा में बीजेपी भले ही सत्ता में आई है लेकिन जीत का मार्जिन काफी पतला है.

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अब हरियाणा का क्या होगा?

फिलहाल, जो हो, वो मनोहर ही हो. क्या इसीलिए मनोहर लाल खट्टर की सीएम पद की कुर्सी से विदाई की पटकथा हरियाणा में उसी तरह लिख दी गई, जैसे साढ़े 9 साल पहले पहली बार ही विधायक बने खट्टर को सीधे मुख्यमंत्री बना कर लिखी गई थी. सवाल उठ रहा है कि जिस हरियाणा में 2019 के लोकसभा चुनाव में 10 की 10 सीटें बीजेपी जीती, वहां चुनाव से पहले मुख्यमंत्री क्यों बदला गया? जिस हरियाणा में बीजेपी ने पिछली बार 10 में से 9 सीट तो पचास फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करके जीती, वहां आखिर क्यों अचानक मुख्यमंत्री बदला गया? 

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इतना ही नहीं, जहां विरोध मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं था, जहां सरकार को सीएम फेस पर फिलहाल कोई खतरा नहीं था, वहां पर बीजेपी ने अचानक मुख्यमंत्री क्यों बदल दिया? अगर 97 दिन और मनोहर लाल खट्टर सीएम रह लेते तो हरियाणा के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बन जाते, लेकिन उससे पहले विदाई हो गई. चर्चा यह भी है कि जिन खट्टर की काम के प्रति लगन पर 24 घंटे पहले खुद प्रधानमंत्री प्रशंसा करते दिखे. वही खट्टर 24 घंटे बाद अपने ही करीबी नायब सिंह सैनी को अपनी ही कुर्सी पर बैठने का आशीर्वाद देते देखे गए.

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बीजेपी ने नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया है, जो OBC वर्ग से आते हैं और अभी हरियाणा में सैनी समाज की आबादी सिर्फ 2.9 पर्सेंट है और इन आंकड़ों को देखकर आपको भी ऐसा ही लगेगा कि बीजेपी ने नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाकर शायद गलती की है लेकिन हकीकत में ये गलती नहीं है बल्कि ये एक नए तरह की सोशल इंजीनियरिंग है, जिसमें बीजेपी राज्य की सबसे बड़ी जाति के लोगों को खुश करने के बजाय बाकी के वर्ग को खुश रखने का प्रयास करती है.

उदाहरण के लिए हरियाणा में नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाना ये बताता है कि बीजेपी का ध्यान 25 पर्सेंट जाट वोटों पर नहीं, बल्कि बाकी के शेष 75 पर्सेंट वोटों पर है और इसीलिए उसने सैनी समाज से आने वाले नायब सिंह सैनी को हरियाणा का नया नायक बनाया है और ये बीजेपी ने पहली बार नहीं किया है. इससे पहले बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया था, जो पंजाबी समुदाय से आते हैं और पंजाबी समुदाय की हरियाणा में कुल आबादी लगभग 8 पर्सेंट है और आज यहां बात सिर्फ हरियाणा की भी नहीं है. बीजेपी ज्यादातर राज्यों में अपने नए मुख्यमंत्री का चुनाव ऐसे ही करती है.

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