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Kanhaiya Kumar Joins Congress: कांग्रेस के लिए कितने अहम हैं कन्हैया कुमार, क्यों आए साथ?

कन्हैया कुमार को पता था कि उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा सीपीआई में रहते हुए पूरी नहीं हो सकती इसीलिए उन्होंने देश की सबसे पुरानी पार्टी में शामिल होने का विकल्प चुना. बिहार में कांग्रेस के पास कोई भी युवा चेहरा नहीं है.

कन्हैया कुमार (फाइल फोटोः पीटीआई) कन्हैया कुमार (फाइल फोटोः पीटीआई)
मौसमी सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 9:11 AM IST
  • कन्हैया के सहारे आरजेडी पर दबाव बनाना चाहती है कांग्रेस
  • रणदीप सुरजेवाला और वेणुगोपाल ने पार्टी में किया स्वागत

कांग्रेस के लिए मंगलवार का दिन मंगल के साथ ही एक अमंगल खबर लेकर भी आया. दोपहर में नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे से 10 जनपथ में हड़कंप मच गया. पंजाब से जैसे ही नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे की खबर आई, 10 जनपथ में मायूसी छा गई. वहां मौजूद हर कोई हैरान था. नेता से लेकर कार्यकर्ता तक बस यही कह रहे थे कि सिद्धू अब क्यों नाराज हो गए. कांग्रेस दफ्तर में शाम को थोड़ी रौनक आई जब कन्हैया कुमार ने पार्टी का दामन थाम लिया.

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सीपीआई नेता कन्हैया कुमार में अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. राहुल गांधी ने खुद कन्हैया कुमार को पार्टी में शामिल कराया. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है वहीं सीपीआई ने भी सियासी महत्वाकांक्षा को लेकर कन्हैया को घेरा है. इन सबके बीच सवाल ये भी उठ रहे हैं कि आखिर कन्हैया कुमार और कांग्रेस एक साथ क्यों आए.

कन्हैया कुमार को पता था कि उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा सीपीआई में रहते हुए पूरी नहीं हो सकती इसीलिए उन्होंने देश की सबसे पुरानी पार्टी में शामिल होने का विकल्प चुना. बिहार में कांग्रेस के पास कोई भी युवा चेहरा नहीं है. राज्य में पार्टी अपनी हालत सुधारने के लिए नए चेहरों पर दांव लगाना चाहती है. जानकारों को लगता है कि कन्हैया कुमार के जरिए कांग्रेस की योजना राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर दबाव बनाने की भी है जो अभी तक कांग्रेस के वरिष्ठ सहयोगी की भूमिका निभाती रही है.

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कांग्रेस के लिए कितने अहम हैं कन्हैया

कन्हैया कुमार तमाम आरोप के बावजूद कांग्रेस के लिए कितने अहम हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लेफ्ट में रहे कन्हैया को पार्टी में शामिल करवाने के लिए खुद राहुल गांधी सामने आए. कन्हैया न कोई विधायक हैं और न ही सांसद. बेगूसराय से वो चुनाव भी हार चुके हैं. बावजूद इसके राहुल गांधी शाम 5 बजे शहीद-ए-आजम भगत सिंह पार्क गए और बाकायदा कन्हैया कुमार का हाथ ऊपर उठाकर उनका कांग्रेस में स्वागत किया. इस दौरान गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी भी थे. मेवाणी तकनीकी कारणों से कांग्रेस में शामिल नहीं हुए लेकिन ये साफ कर दिया कि वे अगले साल पार्टी के निशान पर ही चुनाव लड़ेंगे.

सुरजेवाला और वेणुगोपाल ने किया पार्टी में स्वागत

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद रणदीप सुरजेवाला और केसी वेणुगोपाल ने कन्हैया और जिग्नेश का बारी-बारी से पार्टी के निशान वाले अंगवस्त्र से कांग्रेस में स्वागत किया. कन्हैया कुमार ने इसके बाद मास्क उतारा और अपने रंग में सरकार पर हमला बोला. कन्हैया कुमार की कांग्रेस में एंट्री के दौरान कांग्रेस के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भी मौजूद रहे. माना जा रहा है कि कई राज्यों में बागियों से परेशान कांग्रेस अब युवाओं पर दांव खेलने की तैयारी कर रही है जिसमें सबसे चमकता नाम कन्हैया कुमार का है. कांग्रेस को लगता है कि वो इन दो युवा चेहरों की बदौलत बिहार और गुजरात में अपनी स्थिति मजबूत कर लेगी. पार्टी का ये दांव कितना सफल रहता है, ये तो समय ही बताएगा लेकिन उससे पहले बीजेपी ने भी हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है.

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बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस को घेरा

कन्हैया कुमार की कांग्रेस में एंट्री के साथ ही बीजेपी ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ को साथ लाने की बात कही. बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मैं समझता हूं कि कोई अगर गटर से निकले और नाले में जाकर गिरे तो उसके प्रति सहानुभूति हो सकती है बस.

 

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