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मैतेई, कुकी या कोई न्यूट्रल चेहरा... कौन लेगा मणिपुर में एन बीरेन सिंह की जगह?

मणिपुर में एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद सियासी हलकों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि सूबे का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. वहीं, इंफाल में राजभवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने एन बीरेन सिंह को 'वैकल्पिक व्यवस्था' होने तक पद पर बने रहने को कहा है.

एन बीरेन सिंह एन बीरेन सिंह
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:24 AM IST

भारत का पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर एक बार फिर सुर्खियों में है. एन बीरेन सिंह ने रविवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. मणिपुर में लंबे वक्त से चली आ रही जातीय हिंसा को लेकर ना सिर्फ विपक्ष बल्कि बीजेपी के विधायक भी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे. मणिपुर के मुख्यमंत्री के रूप में बीरेन सिंह का कार्यकाल कई विवादों से घिरा रहा लेकिन कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हुई हिंसा की वजह से सबसे ज्यादा सवाल उठे.

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बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद सियासी हलकों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि सूबे का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. वहीं, इंफाल में राजभवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने एन बीरेन सिंह को 'वैकल्पिक व्यवस्था' होने तक पद पर बने रहने को कहा है. ऐसे में यह भी चर्चा हो रही है कि मणिपुर में कुछ वक्त के लिए राष्ट्रपति शासन भी लगाया जा सकता है.

क्या मणिपुर में लगेगा राष्ट्रपति शासन?

मणिपुर में अभी तक कोई ऐसा नेता नहीं है, जिसे पार्टी के ज्यादातर विधायकों का समर्थन प्राप्त हो. इसलिए यह उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र को राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ सकता है. 

बीरेन के इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद राज्यपाल भल्ला ने एक अधिसूचना जारी कर विधानसभा को बुलाने के पिछले आदेश को 'अमान्य' घोषित कर दिया, जिसे सोमवार को बुलाया जाना था. राज्यपाल कुछ दिनों के अंदर केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

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संविधान के अनुच्छेद 356 के मुताबिक, राष्ट्रपति शासन के ऐलान दो महीने के अंदर संसद के दोनों सदनों के समक्ष मुद्दे को रखा जाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो राष्ट्रपति शासन खत्म हो जाएगा.

यह भी पढ़ें: 'बीरेन सिंह ने राज्य में विभाजन को बढ़ावा दिया', मणिपुर के सीएम के इस्तीफे के बाद बोले राहुल गांधी

राष्ट्रपति शासन नहीं, तो फिर कौन? 

जानकार कहते हैं कि जब कुकी और मैतेई समुदाय के बीच नफरत देखी जा रही है, तब बीरेन सिंह की जगह चुने गए नए नेता को सामंजस्य स्थापित करने में सक्षम होना चाहिए. दोनों समुदाय में संघर्ष की स्थिति में राज्य की बागडोर किसी ऐसे चेहरे के हाथों में सौंपी जानी चाहिए, जो दोनों समुदायों के बीच पुल बनने की काबिलियत रखता हो.

ऐसे में एक नाम जो चर्चा में है, वो पूर्व स्पीकर युमनाम खेमचंद सिंह का है. वे मणिपुर की स्थिति को संभालने के बीरेन के तरीके के खिलाफ मुखर रहे हैं. हालांकि, अभी तक कुछ भी आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है. बीरेन सिंह के इस्तीफे की इस प्रक्रिया में राज्य के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री खेमचंद को पिछले सोमवार को दिल्ली बुलाया गया था. उनसे पहले विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत सिंह को भी दिल्ली बुलाया गया था.

यह भी पढ़ें: मणिपुर में जातीय हिंसा, ऑडियो टेप लीक... विवादों से भरा रहा फुटबॉलर से सीएम बने बीरेन सिंह का कार्यकाल

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पिछले साल नवंबर में मंत्री खेमचंद उन 19 बीजेपी विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने बीरेन सिंह द्वारा बुलाई गई बैठक में हिस्सा नहीं लिया था. साल 2022 में जब बीजेपी ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीता तो खेमचंद भी वैकल्पिक चेहरों में से एक थे. हालांकि, बीरेन सिंह के हाथ लॉटरी लगी और दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

दूसरा विकल्प टी बिस्वजीत का था, जो अब कैबिनेट मंत्री हैं और मणिपुर के नए सीएम के तौर पर उनके नाम की भी चर्चा में है.

मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री के सवाल पर बीजेपी की मणिपुर यूनिट की अध्यक्ष अधिकारीमायुम शारदा देवी ने कहा, "जब ऐसा होगा, तब चीजें पता चलेंगी. इसकी एक प्रक्रिया है."

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