
बिहार में एक लाख 20 हजार शिक्षकों की भर्ती हुई. बिहार सरकार ने नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के लिए पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में बाकायदा कार्यक्रम भी आयोजित किया है. इस आयोजन के एक दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ही सरकार के मंत्री की क्लास लगा दी. इसके बाद दो वाकये ऐसे हुए, जो ये बताते हैं कि महागठबंधन सरकार में शामिल राष्ट्रीय जनता दल का प्लान फेल करने के लिए सीएम नीतीश खुद उतर गए हैं.
दरअसल, बिहार में एक साथ हुई इतने शिक्षकों की भर्ती को लेकर पिछले कुछ दिनों से क्रेडिट वॉर छिड़ा हुआ है. शिक्षक भर्ती को आरजेडी विधानसभा चुनाव के समय किए रोजगार के वादे से जोड़कर डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है. और यही बात 'बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है' नारा देने वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को नागवार गुजर रही है.
ऊर्जा विभाग के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ही सरकार में आरजेडी कोटे के मंत्री आलोक मेहता को अपना और पार्टी का क्रेडिट लेने में नहीं लगे रहने की नसीहत दे डाली. इसे लेकर सवाल उठ ही रहे थे कि जिन नीतीश कुमार ने कुछ दिन पहले ही तेजस्वी को अपना बच्चा बताते हुए ये कहा था कि उनके लिए सबकुछ है, अचानक तल्ख क्यों हो गए. अब पटना के गांधी मैदान में मंच पर लगे पोस्टर और अखबारों में एक विज्ञापन को लेकर ये सवाल भी उठने लगे हैं कि नीतीश और आरजेडी के बीच क्या सबकुछ ठीक है?
जेडीयू भी पहले ही ये साफ कह चुकी है कि इसका श्रेय नीतीश कुमार को जाता है. गांधी मैदान में मंच पर जो पोस्टर लगा है, उस पर और अखबारों में छपे ऐड में केवल नीतीश कुमार की तस्वीर का होना भी बहुत कुछ कहता है. जिस शिक्षा विभाग से जुड़ी नियुक्तियां हैं, उस विभाग के मंत्री चंद्रशेखर की तस्वीर भी नदारद है जो आरजेडी के ही हैं.
बात केवल नसीहत, पोस्टर और विज्ञापन में तस्वीर तक ही सीमित होती तो और बात होती. नीतीश की नसीहत के कुछ ही देर बाद आरजेडी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्टर पोस्ट किया. 'जो कहा सो किया' शीर्षक वाले इस पोस्टर पर तेजस्वी की बड़ी तस्वीर है और उस तस्वीर पर ही 1 लाख 20 हजार 336 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने की बात है. इसके नीचे तीन पॉइंट में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च कक्षा के लिए नियुक्ति के आंकड़े भी बताए गए हैं.
आरजेडी के पोस्टर में ये भी दावा किया गया है कि देश में पहली बार बिहार में एक दिन में एक साथ एक विभाग में इतने लोगों को नियुक्ति पत्र मिलेंगे. डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे. अब ताजा तस्वीर ये है कि नियुक्ति पत्र खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही वितरित करेंगे.
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बिहार के सत्ताधारी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी और ड्राइविंग सीट पर बैठी पार्टी के बीच चल रहे क्रेडिट वॉर को लेकर वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क ने कहा कि ये आरजेडी-जेडीयू गठबंधन के लिए शुभ संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि जेडीयू एनडीए में रही हो या महागठबंधन के साथ, नीतीश कुमार की कोशिश हमेशा अपना कद बड़ा रखने की रही है. नीतीश अपना वजूद बनाए रखना चाहते हैं और ताजा घटनाक्रम भी यही बता रहे हैं.
कहा तो ये भी जा रहा है कि नीतीश कुमार जैसा राजनेता आसानी से तेजस्वी को गद्दी सौंप देगा, ऐसा लगता नहीं है. ओमप्रकाश अश्क ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में नीतीश जिस तरह बीजेपी नेताओं से करीबी जताने में जुटे नजर आए हैं, तस्वीर 2017 जैसी ही बनती नजर आ रही है जब जेडीयू ने आरजेडी से किनारा कर एनडीए में वापसी कर ली थी.
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एक पहलू ये भी है कि बिहार में बेरोजगारी हमेशा ही बड़ा मुद्दा रही है. एक लाख से अधिक सरकारी नौकरियां देने की क्रेडिट यदि अकेले आरजेडी भुना ले जाती है तो ये नीतीश कुमार और जेडीयू की राजनीति के लिहाज से ठीक नहीं कहा जा सकता. सीधे-सीधे एक लाख परिवारों तक पहुंच के साथ ही युवाओं में तेजस्वी की लोकप्रियता बढ़ना सुशासन बाबू के साथ ही जेडीयू के लिए भी चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है.
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आरजेडी नीतीश के साथ रहते हुए रणनीति के तहत तेजस्वी का ग्राफ चढ़ाने में लगी है और कहा जा रहा है कि इस प्लान को भांपते हुए ही सुशासन बाबू अब खुद मैदान में उतर आए हैं. नीतीश कुमार और जेडीयू, दोनों ही सियासी नफा-नुकसान का आकलन करने के बाद ही एक्टिव मोड में आए हैं.चर्चा ये भी है कि नीतीश कुमार भले ही कई बार सार्वजनिक रूप से तेजस्वी को बिहार का भविष्य बताते रहे हैं, सीएम पद पर ताजपोशी के लिए तैयार नहीं होंगे. नीतीश जानते हैं कि अगर वह तेजस्वी को सीएम बनाने का समर्थन करते हैं तो उनकी अपनी पार्टी में ही विरोध शुरू होने का खतरा है.