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जन अधिकार पार्टी के प्रमुख व पूर्व सांसद राजेश रंजन (पप्पू यादव) खुद को विद्रोही और गरीब व दलितों का मसीहा कहते हैं. उन्हें बिहार के 'रॉबिन हुड' के नाम से भी जाना जाता है. हालांकि, उनके राजनीतिक सफर और अतीत को देखते हैं तो जहन में उनकी छवि एक बाहुबली नेता के रूप में उभरती है, जिसके लिए उन्होंने बिहार की जेल से तिहाड़ तक की यात्रा की है. पप्पू यादव ने 17 साल से अधिक समय जेल में बिताया. जेल में रहने के दौरान पप्पू ने अपनी छवि को बदलने की कोशिश की और जेल से बाहर आने के बाद से निरंतर सामाजिक कार्यों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं.
कोरोना काल में लॉकडाउन के उल्लंघन मामले में पप्पू यादव को मंगलवार को पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया और बाद में तीन दशक पुराने मामले में उन्हें मधेपुरा जेल भेज दिया. पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीतिक तपिश को बढ़ा दिया है. विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष के नेता भी पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर सवाल खड़े कर रहे हैं. ऐसे में हम बताएंगे कि पप्पू यादव का सियासी सफर कैसे शुरू हुआ और क्यों उन्हें एक दौर में लालू यादव की सियासी विरासत का उत्तराधिकारी माना जाता था.
बाहुबली की छवि के साथ उभरे थे पप्पू यादव
पप्पू यादव ने राजनीति में कदम रखने से पहले ही बाहुबली के रूप में अपनी छवि बना ली थी. पप्पू यादव ने साल 1990 में सियासत में कदम रखा और वह सिंहेसरस्थान विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पहली बार विधायक बने और फिर पलटकर नहीं देखा. 90 के दशक की शुरुआत में पप्पू यादव और आनंद मोहन (राजपूत नेता जो अभी जेल में हैं) के बीच जातीय वर्चस्व की लड़ाई में जमकर खून खराबा हुआ.
पप्पू यादव बहुत कम समय में कोसी, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और सुपौल जैसे सीमांचल क्षेत्र के जिलों में लोकप्रिय हो गए और उनकी छवि बाहुबली नेता के रूप में उभरे. उन्हीं दिनों लालू यादव अपने राजनीतिक जीवन के उत्थान पर थे. उस समय, जिस व्यक्ति ने उनके मिशन को सफल होने के लिए सबसे अधिक मदद की, वह थे पप्पू यादव. इसके पीछे एक वजह यह थी कि लालू यादव और पप्प यादव दोनों दलित-पिछड़ों पर केंद्रित राजनीति कर रहे थे. यही कारण है कि पप्पू खुद को लालू का उत्तराधिकारी मानते थे, यह बात अलग है कि पप्पू की मंशा पूरी नहीं हुई.
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सांसद बने
पप्पू यादव 16वीं लोकसभा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सांसद थे. स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में 1991, 1996 और 1999 में तीन बार पूर्णिया से और राजद के टिकट पर दो बार 2004 और 2014 में मधेपुरा से सांसद बने. पांच बार सांसद रहे पप्पू यादव उस समय चर्चा में आए जब 14 जून 1998 में माकपा विधायक अजीत सरकार की हत्या के मामले में उनका नाम आया. 24 मई 1999 को पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया था. सीबीआई की विशेष अदालत ने पप्पू यादव, राजन तिवारी और अनिल यादव को 2008 के हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
पप्पू ने अपनी जमानत का जश्न मनाने के लिए एक बार जेल के कैदियों के लिए भव्य पार्टी आयोजित की थी. इस बीच, सुप्रीम कोर्ट से उन्हें तीन बार जमानत मिली, लेकिन उनकी जेल की गतिविधियां सार्वजनिक हो जाने के बाद उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में स्थानांतरित कर दिया गया. साल 2004 में उनके राजनीतिक करियर ने तब एक महत्वपूर्ण मोड़ लिया जब लालू प्रसाद ने दो संसदीय क्षेत्रों छपरा और मधेपुरा से लोकसभा का चुनाव जीता. लालू ने छपरा सीट रखने का विकल्प चुना और मधेपुरा सीट पप्पू यादव को दे दी, जिस पर बाद में पप्पू की जीत हुई.
लगातार 12 साल जेल में बीते
पप्पू यादव के लगातार 12 सालों तक जेल में रहने के बाद पटना उच्च न्यायालय ने सरकार के मामले में साल 2013 में बरी कर दिया. पप्पू यह कहने में गर्व महसूस करते हैं कि वह गरीबों का शोषण करने वाले अमीर लोगों के लिए बाहुबली हैं और वह सिर्फ गरीबों को न्याय दिलाते हैं. जेल में रहने के दौरान पप्पू ने अपनी छवि को बदलने की कोशिश की और उस समय उन्होंने 'द्रोहकाल का पथिक' नाम से एक किताब लिखी जिसे वे अपनी जीवनी कहते हैं.
राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का जन्म 24 दिसंबर 1967 को बिहार के कुमार खंड, खुर्दा करवेली हआ था . उन्होंने शुरुआती स्कूली शिक्षा आनंद मार्ग स्कूल, आनंद पल्ली स्कूल से ग्रहण की. इसके पप्पू यादव ने मधेपुरा विश्वविद्यालय के बीएन मंडल कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक हैं. उन्होंने नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) से मानवाधिकार में और आपदा प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है. उन्होंने इग्नू से ही सामाजिक विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री भी हासिल की है. पप्पू यादव के सांसद रहते हुए ही रंजीता रंजन से मुलाकात हुई और फिर दोनों में प्रेम हो गया.
पप्पू यादव और रंजीता रंजन की प्रेम कहानी
पप्पू यादव ने रंजीत रंजन के साथ 1994 में ही प्रेम विवाह किया था. उनकी प्रेम कहानी एक टेनिस कोर्ट से शुरू हुई और पत्नी के रूप में रंजीत हमेशा उनके जीवन के सबसे कठिन दौर में भी उनके साथ खड़ी रहीं. भारतीय सियासत में पहली बार पति-पत्नी को दो अलग-अलग राजनीतिक दलों से लोकसभा के सदस्य के रूप में देखा गया. पप्पू यादव सार्थक रंजन और प्रकृति रंजन दो बच्चों के पिता हैं. पप्पू यादव को बचपन में अपने दादा लक्ष्मी प्रसाद मंडल से पप्पू नाम मिला था. पति और पत्नी दोनों अलग-अलग पार्टी से राजनीति करते रहे और सामाजिक कार्य एक साथ चर्चा में बने रहते हैं.
पप्पू यादव को 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण उन्हें राजद से निकाल दिया गया था. उसके बाद उन्होंने जन अधिकार पार्टी का गठन किया. वह 'डॉन' जो कभी सीमांचल की गलियों में घूमता था, उसने अब पूरे बिहार पर अपना ध्यान केंद्रित कर रखा है. कुछ सालों पहले पटना में बाढ़ के दौरान उनका 'रॉबिन हुड' व्यक्तित्व सबके सामने आया था. उन्होंने पानी में फंसे लोगों को भोजन और दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए अपने स्तर से अतिरिक्त प्रयास किए. पिछले साल लॉकडाउन के दौरान गरीबों की मदद करते नजर आए और इस साल कोरोना काल की दूसरी लहर में बिहार के लोगों की मदद करते दिखे, लेकिन लॉकडाउन तोड़ने में उनकी गिरफ्तारी और अब 32 साल पुराने मामले में जेल में डाल दिया गया है, जिसे लेकर बिहार की राजनीतिक गरमा गई है.