
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने संन्यास का ऐलान कर दिया है. यानी अब वो किसी भी नेता या पार्टी के लिए चुनाव की योजना नहीं बनाएंगे. पीके ने इंडिया टुडे को दिए गए अपने इंटरव्यू के दौरान ये घोषणा की. इसके साथ ही उन्होंने बंगाल में टीएमसी की जीत और बीजेपी की हार से लेकर चुनाव आयोग की भूमिका जैसे तमाम बड़े सवालों पर भी जवाब दिए. पीके ने चुनाव आयोग पर तीखे हमले करते हुए उसे बीजेपी की 'बी टीम' बताया.
प्रशांत किशोर ने कहा कि इतना पक्षपात करने वाला चुनाव आयोग मैंने कभी नहीं देखा. सब पार्टियों को साथ आना चाहिए और आयोग पर रिफॉर्म के लिए दबाव बनाना चाहिए.
बीजेपी को जिताने के लिए आयोग ने सबकुछ किया- पीके
आयोग की भूमिका को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कारण भी गिनाए. पीके ने कहा कि चाहे धर्म के इस्तेमाल का मामला हो, चुनाव तारीखों की बात हो, या दोनों तरफ के लोगों पर कानून के इस्तेमाल की बात हो, पूरी तरह से पक्षपात किया गया. पीके ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बीजेपी को जिताने के लिए हम मुमकिन काम किया और आयोग ने बीजेपी की बी टीम की तरह काम किया.
पीके ने बताया कि कोरोना महामारी के दौर में आठ चरण में चुनाव कराने का सिर्फ एक ही मकसद था ताकि बीजेपी नेताओं को कैंपेन का ज्यादा से ज्यादा मौका मिल सके. पीके ने कहा, ''हर 20-30 सीट पर चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने पीएम और गृहमंत्री समेत तमाम नेताओं को वक्त दिया ताकि वो बीजेपी के लिए प्रचार कर सकें.''
'एक जिले में चार चरण के चुनाव कभी देखे हैं'
चुनाव आयोग पर लगाए गए अपने आरोपों को बल देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि क्या कभी किसी ने देखा है कि एक ही जिले में चार चरण में चुनाव कराए गए हों. पीके ने बताया कि 24 परगना जिले में ऐसा ही कराया गया, क्योंकि टीएमसी बहुत मजबूत थी. ऐसा इसलिए किया गया ताकि मोमेंटम टीएमसी के पक्ष में न जा सके.
चुनाव आयोग पर एक और आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ''क्या ये इत्तेफाक है कि जिन सीटों पर बीजेपी ने लोकसभा में जीत दर्ज की थी वहां शुरुआती चरणें में ही चुनाव कराए गए. कोविड के समय में लाखों लोगों को वायरस की तरफ धकेला गया, क्योंकि चुनाव आयोग बीजेपी को न नहीं बोल सकता था. चुनाव आयोग से पूछिए कि उन्होंने आठ चरण में चुनाव क्यों कराए.''
इसके अलावा पीके ने ये भी कहा कि चुनाव में धर्म का इस्तेमाल किया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ. पीके ने कहा, ''जय श्रीराम के नारे लगाए गए, बीजेपी से ज्यादा ओम और भगवा झंडे दिखे लेकिन चुनाव आयोग ने क्या किया, क्या ये धर्म का इस्तेमाल नहीं था.''
अमित शाह को भी किया टारगेट
जब पीके से पूछा गया कि उन्होंने किस आधार पर ये दावा किया कि बीजेपी डबल डिजिट का आंकड़ा क्रॉस नहीं कर पाएगी. इसका जवाब देते हुए उन्होंने अमित शाह को टारगेट किया. पीके ने कहा कि अमित शाह से कौन पूछेगा कि वो किस आधार पर बीजेपी की 200 सीटों का दावा कर रहे थे, यहां तक कि हर चरण के बाद वो सीटों की संख्या बता रहे थे. क्या उनके पास क्रिस्टल बॉल थी. अमित शाह 120-130 सीट नहीं कहते थे, सीधे कहते थे कि चौथे चरण के बाद हम 121 सीटें जीत रहे हैं.'' यानी एकदम सटीक आंकड़ा बताते थे.
वहीं, चुनाव में ध्रुवीकरण के मसले पर पीके ने कहा कि करीब 70 फीसदी अल्पसंख्यकों ने टीएमसी के लिए वोट किया है. 40-45 फीसदी हिंदुओं ने तृणमूल के लिए मतदान किया है.
बीजेपी की गलती
बंगाल में बीजेपी ने क्या गलती की, इस पर पीके ने कहा कि बीजेपी ने तृणमूल में हुए बदलाव पर ध्यान नहीं दिया. पिछले एक-डेढ़ साल में टीएमसी ने ब्लॉग से जिला स्तर की लीडरशिप बदली और अपनी बाकी रणनीति में भी बड़ा बदलाव किया. पीके ने कहा कि मोदी की पॉपुलैरिटी और करिश्मा एक फैक्टर है, लेकिन चुनाव में बड़ा फैक्टर ये होता है कि विकल्प क्या है.
बता दें कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने पिछले चुनाव से भी जबरदस्त प्रदर्शन किया है और दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है. हालांकि, सीएम ममता बनर्जी को नंदीग्राम से टफ फाइट मिली और आखिरकार ममता ने 1200 वोटों से बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी को हरा दिया. इस तरह ममता बनर्जी के तीसरी बार सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है.