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'परीक्षा में गड़बड़ियों के कारण 'मुन्ना भाई' जैसे लोग डॉक्टर बन रहे', राज्यसभा में बोले राघव चड्ढा

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में कहा कि बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था का संकट हमारे देश को प्रभावित कर रहा है. यह व्यवस्था कभी हमारे देश का गौरव हुआ करती थी, लेकिन आज यह एक युद्ध का मैदान बन गई है, जहां हमारे बच्चे ज्ञान या अधिकार के लिए नहीं, बल्कि अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रहे हैं.

राज्यसभा में अपनी बात रखते सांसद राघव चड्ढा (फाइल फोटो- पीटीआई) राज्यसभा में अपनी बात रखते सांसद राघव चड्ढा (फाइल फोटो- पीटीआई)
पंकज जैन
  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 4:35 AM IST

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में भारतीय शिक्षा प्रणाली से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा में गड़बड़ियों की वजह से आज 'मुन्ना भाई' जैसे डॉक्टर बन रहे हैं और प्रतिभाशाली युवा गलत रास्तों से विदेश भाग रहे हैं. राघव चड्ढा ने स्टार्टअप्स के सामने आने वाली नौकरशाही की समस्याओं पर भी सवाल खड़ा किया. 

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राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में कहा कि बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था का संकट हमारे देश को प्रभावित कर रहा है. यह व्यवस्था कभी हमारे देश का गौरव हुआ करती थी, लेकिन आज यह एक युद्ध का मैदान बन गई है, जहां हमारे बच्चे ज्ञान या अधिकार के लिए नहीं, बल्कि अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रहे हैं.

राघव ने कहा कि बहुत कम उम्र से ही हमारे छात्रों को कभी न खत्म होने वाली दौड़ में धकेल दिया जाता है और कुछ नया सीखने की इच्छा एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने के दबाव से नीचे दब जाती है, क्योंकि बच्चों में सीखने की जिज्ञासा को फलने-फूलने देने की बजाय हमारी शिक्षा प्रणाली उन्हें ये सिखा रही है कि उनकी योग्यता सिर्फ उनके द्वारा प्राप्त नंबरों, ग्रेड्स या रैंकों से ही मापी जाएगी. यह भीषण प्रतिस्पर्धा न केवल हमारे बच्चों से उनका बचपन छीन रही है, बल्कि उन्हें निराशा और हताशा की ओर भी धकेल रही है.

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उन्होंने कहा कि हमें अपनी शिक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों को समझना होगा और यह भी समझना होगा कि इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है. प्रतिस्पर्धा के दबाव की वजह से हमारे बच्चे अपने सपनों को पूरा करने के लिए जुनून और उत्साह खोते जा रहे हैं, अब यह डर, चिंता और अनिश्चितता में बदल रहा है.

'शिक्षा और रोजगार के बीच बहुत बड़ा अंतर'

सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि आज शिक्षा और रोजगार के बीच बहुत बड़ा अंतर है, इसके चलते आज हम अपने देश के भविष्य यानी छात्रों को बेरोजगारी के जाल में धकेल रहे हैं और यह तब तक बना रहेगा, जब तक हम बाजार की मांग और हमारी शिक्षा प्रणाली के बीच की इस खाई को मिटा नहीं देते. उन्होंने कहा कि बेहतर भविष्य की तलाश में हमारे कई प्रतिभाशाली युवा अपना देश छोड़ने को मजबूर हैं. मैं पंजाब से आता हूं, जहां हजारों-लाखों प्रतिभाशाली युवा अपना राज्य छोड़कर विदेशों में छोटी-मोटी नौकरियां करने जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं? वो सुकून की तलाश में ऐसा करते हैं? वो अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि मजबूरी में विदेश जा रहे हैं.

'छात्रों के लिए बाजार में नौकरियां नहीं'

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सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसने दुनिया को कई तरह के ज्ञान दिए हैं. लेकिन अब अपनी युवा पीढ़ी को अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और अन्य देशों में जाने के लिए खतरनाक गलत रास्ते अपनाने के लिए मजबूर है. ये टैलेंटेड और सपनों से भरे लोग जो एक ऐसी व्यवस्था से बचने के लिए जान की बाज़ी लगा रहे हैं, जो उन्हें कोई उम्मीद नहीं देती है. यहां अवसरों की कमी दिल दहला देने वाली है. हमारी शिक्षा प्रणाली आधुनिक दुनिया की ज़रूरतों के अनुरूप नहीं हैं. जबकि हमारे यहां लाखों ग्रेजुएट पैदा होते हैं, लेकिन इनके लिए बाजार में नौकरियां नहीं हैं, जो इनकी प्रतिभा का सही इस्तेमाल कर सकें. नतीजतन, डिग्री और डिप्लोमा के बोझ तले दबे हमारे युवा रोज़गार की तलाश में लक्ष्यहीन भटकते रहते हैं. 

'स्टूडेंट्स शिक्षा व्यवस्था की खामियों और भ्रष्टाचार का शिकार हो रहे'

राघव ने कहा कि आज यह सदन उन लाखों NEET के उम्मीदवारों की आवाज उठा रहा है, जो हाल में NEET परीक्षा में अनियमितताओं से आहत हुए हैं. यह सिर्फ एक परीक्षा के बारे में बात नहीं है, बल्कि यह छात्रों की कड़ी मेहनत और सपनों के बारे में है, जो अपने बेहतर भारत के निर्माण के लिए समर्पित थे. यह विडम्बना है कि देश सेवा का सपना देखने वाले हमारे बच्चे शिक्षा व्यवस्था की खामियों और भ्रष्टाचार का शिकार हो रहे हैं, जो व्यवस्था उनके भविष्य को प्रोत्साहित करने और आकार देने के लिए बनाई गई थी, वही अब उनकी कड़ी मेहनत और आशा को चकनाचूर कर रही है.

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हम देश में कैसे डॉक्टर पैदा कर रहे: राघव

राघव चड्ढा ने कहा कि अगर डॉक्टर बनने की इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा में धांधली होती है और रिश्वत देकर लोगों को बरगलाया जाता है, तो हम इस देश में कैसे डॉक्टर पैदा कर रहे हैं? किस तरह के डॉक्टर लोगों की जान बचा रहे होंगे? आज मैं यह बेहिचक कहना चाहूंगा कि अगर यही व्यवस्था बनी रही तो हम अपने कॉलेजों में 'मुन्ना भाई' (फिल्म के काल्पनिक चरित्र का संदर्भ) जैसे डॉक्टर पैदा करेंगे और वही डॉक्टर अस्पतालों में लोगों का इलाज करेंगे.

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