
भारत जोड़ने के लिए कन्याकुमारी से श्रीनगर तक यात्रा करने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब खुद ही कमजोर होते दिख रहे हैं. लंदन से भारत के लोकतंत्र पर सवाल खड़े करने के बाद से राहुल गांधी बीजेपी के निशाने पर आए. इसके बाद राहुल गांधी को 'महिलाओं से यौन शोषण' वाले बयान पर पुलिस का एक नोटिस मिला. फिर मोदी सरनेम वाले मानहानि केस में सूरत सेशंस कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया. कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुना दी. इसके बाद शुक्रवार को नियमों के तहत उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी. मतलब राहुल गांधी अपने गढ़ अमेठी से लोकसभा चुनाव हारे तो केरल के वायनाड पहुंच गए. अब वायनाड सीट से भी उन्होंने हाथ धो दिया. ऐसे में 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले उनके खिलाफ हुई यह कार्रवाई सवाल खड़ा करती है कि आखिर राहुल गांधी का राजनीति भविष्य क्या होगा?
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अमेठी में 55 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए थे राहुल
राहुल गांधी अमेठी में तीन बार सांसद रहे लेकिन स्मृति ईरानी की चुनौती के बाद वह अपने गढ़ को ही नहीं बचा पाए. राहुल पहली बार 2004 में सांसद बने. इसके बाद 2009 में 3,50,000 से भी ज्यादा मतों से उन्होंने अपनी जीत सुनिश्चित की. इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने राहुल को खुली चुनौती दी. राहुल ने इस चुनाव में बाजी मार ली. राहुल को इस चुनाव में 408,651 वोट मिले, वहीं स्मृति ईरानी को 300,748 वोट मिले. उन्होंने स्मृति को 1,07,000 वोटों के अंतर से हराया.
इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को चुनौती दी और इस बार उन्होंने बाजी उलट दी. उन्होंने कांग्रेस से उसका गढ़ छीन लिया. स्मृति ईरानी ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष को 55 हजार 120 मतों के अंतर से हरा दिया. इस चुनाव में स्मृति को चार लाख 67 हजार 598 मत मिले जबकि कांग्रेस अध्यक्ष को चार लाख 12 हजार 867 मत प्राप्त हुए.
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वायनाड में 4 लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे राहुल
राहुल गांधी ने 2019 में अमेठी के अलावा केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में राहुल गांधी के हाथ से भले ही अमेठी छिन गई हो लेकिन उन्होंने वायनाड में ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई थी. वह 4 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे. राहुल को 6 लाख 64 हजार वोट मिले थे. वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी सीपीआई के पीपी सुनीर को करीब 2 लाख 51 हजार वोट मिले थे. वायनाड से चुनाव लड़ने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने तब कहा था कि उनका केरल में वायनाड से लोकसभा चुनाव लड़ना दक्षिण भारत को किसी तरह का संदेश देना नहीं बल्कि यह तुष्टिकरण की राजनीति का संदेश है.
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क्या 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ पाएंगे राहुल
सूरत की सेशंस कोर्ट ने मोदी सरनेम वाले केस में उन्हें दो साल की सजा सुनाई है. आरपी अधिनियम की धारा 8 (3) के तहत किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति को कम से कम दो साल कैद की सजा सुनाई जाने पर सजा की तारीख से अयोग्य घोषित किया जाएगा. इसके अलावा, व्यक्ति अपनी सजा काटने के बाद छह साल की अवधि के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेगा.
अगर राहुल गांधी को हाई कोर्ट से भी राहत नहीं मिलती है तो वह 8 साल के लिए चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. राहुल गांधी की सदस्यता रद्द होने के बाद वायनाड की सीट रिक्त हो गई है यानी वहां उपचुनाव होंगे लेकिन वे नियमों के तहत अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.
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तो क्या खतरे में है राहुल की सियासत
राहुल गांधी इस साल जून में 53 साल के हो जाएंगे. राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल 2004 से ही राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर हैं लेकिन राजनीति में जो प्रभाव इंदिरा गांधी, राजीव गांधी या सोनिया गांधी का रहा है, वह वैसी छवि नहीं बना पाए. राहुल गांधी लगातार गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस की छवि सुधारने और परिवारवाद की छवि तोड़कर जनता का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस के लिए वह पहले जैसा माहौल नहीं बना पा रहे हैं. अगर राहुल को हाई कोर्ट से भी राहत नहीं मिलती है तो वह नियमों के तहत 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. यानी जब वह दोबारा चुनाव लड़ने के योग्य होंगे तब उनकी उम्र 60 साल होगी. ऐसे में सवाल यह है कि भारत जोड़ो यात्रा जैसा देशव्यापी आंदोलन चलाने के बाद भी राहुल गांधी अगर जनता का विश्वास नहीं जीत पाए हैं, तो क्या 8 साल तक राजनीति से बाहर रहने के बाद वह फिर से राजनीति में स्थापित हो पाएंगे.