
आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए पिछले कुछ दिन राहत भरे रहे हैं. इसकी शुरुआत तब हुई जब पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को कथित शराब घोटाला मामले में लंबे समय बाद जमानत मिली. पार्टी के पूर्व मीडिया प्रमुख विजय नायर को भी इस मामले में 23 महीनों तक जेल में रहने के बाद रिहाई मिली. संजय सिंह को भी कोर्ट से राहत मिली है. वहीं, हाल ही में अरविंद केजरीवाल के विश्वासपात्र सहयोगी बिभव कुमार को भी जमानत मिल गई है. नेताओं को हाल फिलहाल में इस तरह की राहत से पार्टी को एक नई ऊर्जा मिली है.
'सही समय' पर कोर्ट से मिल रही राहत
AAP ने अपनी पहचान भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे की बनाई है. लेकिन कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामले लगने के बाद पार्टी पर सवाल भी उठे थे. लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद AAP नेताओं को अदालतों से राहत मिल रही है. यह न्यायिक राहत ऐसे समय में मिल रही है जब अगले साल की शुरुआत में दिल्ली विधानसभा चुनाव होने है. यह समय AAP के लिए बेहद खास है.इसके अलावा, AAP हरियाणा विधानसभा चुनाव पर भी नजर गड़ाए हुए है. हरियाणा अरविंद केजरीवाल का गृह राज्य है.
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा में AAP और कांग्रेस पार्टी के बीच संभावित गठबंधन की भी चर्चा है. AAP-कांग्रेस गठबंधन हरियाणा में दोनों पार्टियों के चुनावी दृष्टिकोण को मजबूत कर सकता है. AAP का भ्रष्टाचार विरोधी रुख शहरी और युवा मतदाताओं को आकर्षित करता है, कांग्रेस अन्य जनसांख्यिकी में मजबूत पकड़ रखती है.
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कानूनी लड़ाइयां अभी बाकी
हालांकि, अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए कानूनी लड़ाइयां खत्म नहीं हुई हैं. जिस दिन विजय नायर और बिभव कुमार को राहत मिली, उसी दिन ओखला विधायक अमानतुल्ला खान को गिरफ्तार कर लिया गया. अमानतुल्ला खान पार्टी के सबसे प्रमुख अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में माने जाते हैं. अमानतुल्ला पर शिकंजा पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है, खासकर मुस्लिम-प्रभुत्व वाले निर्वाचन क्षेत्रों में जहां खान का प्रभाव माना जाता है. अरविंद केजरीवाल के लिए, शराब नीति मामला कई कानूनी अड़चनों में से एक है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अन्य मामलों की भी जांच कर रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री के बंगलों का नवीनीकरण भी शामिल है.
इसलिए, हाल की कानूनी जीत महत्वपूर्ण हैं, ये AAP की समस्याओं का अंत नहीं हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या AAP अपनी छवि और राजनीतिक प्रभावशीलता को पुनर्निर्मित कर पाएगी? ये कानूनी जीत पार्टी को एक लड़ाई देने का मौका देती हैं, लेकिन जनता के बीच विश्वास और आत्म-विश्वास को बहाल करना आवश्यक है. इसके लिए देखना होगा कि पार्टी किस तरह की रणनीति पर काम करती है.