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Shashi Tharoor अकेले नहीं... लेफ्ट के इकलौते गढ़ केरल में कांग्रेस के लिए क्यों तीन तरफा मुसीबत है?

शशि थरूर की नाराजगी के कयासों के बीच कांग्रेस आलाकमान ने केरल के नेताओं की बैठक बुला ली है. लेफ्ट के इकलौते गढ़ केरल में कांग्रेस के लिए कैसे तीन तरफा मुसीबत है? समझिए

शशि थरूर, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल शशि थरूर, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल
बिकेश तिवारी
  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 2:21 PM IST

शशि थरूर केरल की लेफ्ट सरकार की स्टार्टअप्स को लेकर नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे की तारीफ करने के बाद से ही चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. केरल कांग्रेस के नेताओं ने थरूर को पार्टी लाइन पर चलने की नसीहत दी तो राहुल गांधी, सोनिया गांधी ने भी उन्हें बुलाकर बात की. कांग्रेस हाईकमान ने अब केरल को लेकर बैठक बुला ली है. 28 फरवरी की शाम 4 बजकर 30 मिनट पर बुलाई गई इस बैठक में शशि थरूर के साथ ही केरल कांग्रेस के अन्य नेताओं को भी बुलाया गया है.

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शशि थरूर ने बैठक को लेकर कहा है कि इसमें शामिल होने जाऊंगा, देखते हैं क्या होता है. इस बैठक का एजेंडा केरल कांग्रेस में आपसी खींचतान और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर चर्चा बताया जा रहा है लेकिन इस दौरान शशि थरूर के हालिया बयानों को लेकर भी चर्चा के कयास हैं. केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले आलाकमान पार्टी की प्रदेश यूनिट में असंतोष थामने के लिए एक्टिव हो गया है. केरल कांग्रेस में पहले से ही दो गुट प्रभावी थे. अब थरूर ने नेतृत्व की दावेदारी कर तीसरा कोण बना दिया है.

केरल कांग्रेस में नेतृत्व की लड़ाई बनी तीन तरफा मुसीबत

शशि थरूर ने नए मतदाताओं को कांग्रेस से जोड़ने और वोटर बेस बढ़ाने का आह्वान किया था. उन्होंने ये भी कहा था कि केरल कांग्रेस को एक अच्छे नेतृत्व की जरूरत है. शशि थरूर ने लगे हाथ सर्वे रिपोर्ट्स में अपनी लोकप्रियता को आधार बनाकर नेतृत्व की दावेदारी भी ठोक दी. शशि थरूर की ओर से नेतृत्व की दावेदारी और अन्य विकल्पों की बात ने कांग्रेस आलाकमान को तीन तरफा मुसीबत में डाल दिया है.

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दरअसल, केरल कांग्रेस में पहले से ही दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई हैं. एक गुट रमेश चेन्निथला का है तो दूसरे के अगुवा कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल माने जाते हैं. केसी वेणुगोपाल की गिनती राहुल गांधी और गांधी परिवार के करीबियों में होती है. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद रमेश चेन्निथला गुट की पकड़ पार्टी पर कमजोर पड़ी है और केसी वेणुगोपाल का प्रभाव बढ़ा है. मौजूदा केरल कांग्रेस अध्यक्ष के सुधाकरन और विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन भी केसी वेणुगोपाल के करीबी माने जाते हैं.

2021 की हार से कमजोर पड़ा चेन्निथला का प्रभाव

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने केरल में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 20 में से 15 सीटें जीत ली थीं. चार सीटों पर कांग्रेस के सहयोगी दलों के उम्मीदवार जीते थे. अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ कांग्रेस पार्टी 20 में से 19 सीटें जीत गई थी. तब विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के अच्छे प्रदर्शन के दावे किए जाने लगे. हर चुनाव में सत्ता बदलने का ट्रेंड भी कांग्रेस के पक्ष में था लेकिन चुनाव नतीजे आए तो पार्टी की अगुवाई वाला गठबंधन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) 39.47 फीसदी वोट शेयर के साथ 140 सदस्यों वाली विधानसभा में 41 सीटों पर सिमट चुका था.

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केरल चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद रमेश चेन्निथला गुट का प्रभाव पार्टी के भीतर कमजोर पड़ता गया. विधानसभा चुनाव में पार्टी के अभियान का नेतृत्व विपक्ष का नेता रह चुके रमेश चेन्निथला और पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने किया था. चुनाव नतीजों के तुरंत बाद कांग्रेस आलाकमान ने केरल के 14 जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त कर दिए और ऐसा पहली बार हुआ जब ऐसी नियुक्तियों को लेकर रमेश चेन्निथला और ओमान चांडी जैसे नेताओं से राय-मशविरा नहीं किया गया.

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जून 2021 में के सुधाकरन को केरल कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और वीडी सतीशन को विपक्ष का नेता बनाया गया. इन दोनों नियुक्तियों में भी केसी वेणुगोपाल की अहम भूमिका मानी जाती है और इसे रमेश चेन्निथला, ओमान चांडी जैसे नेताओं की छाया से केरल कांग्रेस के बाहर आने की शुरुआत की तरह भी देखा जाता है. केरल कांग्रेस में वर्चस्व और नेतृत्व की लड़ाई इन दो गुटों के बीच चल ही रही थी कि अब शशि थरूर जैसे 'गुटनिरपेक्ष' छवि के नेता ने नेतृत्व की दावेदारी कर कांग्रेस आलाकमान की मुसीबतें बढ़ा दी हैं.

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