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शिवराज सिंह चौहान बोले, कई बार वोट दिलाऊ फैसले करने पड़ते हैं...

Shivraj Singh Chouhan News: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज ने यह भी कहा, बार-बार चुनाव होने से वोट के डर में कई फैसले प्रभावित होते हैं. ऐसे कई फ़ैसले प्रभावित होते हैं जो बच्चों के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान.
अमृतांशी जोशी
  • भोपाल ,
  • 28 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:42 AM IST

'वन नेशन-वन इलेक्शन' पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा बयान दिया. कहा कि चुनाव के कारण कई बार वोट दिलाऊ फैसला करने पड़ते हैं. कैसे वोट मिलेगा तो ये भी दे दो, वो भी दे दो. क्या चार-साढ़े चार साल यही चलता रहेगा? 

भोपाल के एक प्राइवेट कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज ने यह भी कहा, बार-बार चुनाव होने से वोट के डर में कई फैसले प्रभावित होते हैं. ऐसे कई फ़ैसले प्रभावित होते हैं जो बच्चों के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं. प्रदेश का विकास कर सकते हैं जो देश को आगे बढ़ा सकते हैं.

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केंद्रीय मंत्री ने कहा, देश अगर बनाना है तो बड़े फ़ैसले लेने पड़ते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कई कड़े फ़ैसले लिए हैं. 

इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, हमारे देश में कुछ हो या न हो पांच साल, 12 महीने चुनाव की तैयारियां जरूर चलती हैं. ये बार-बार होने वाले चुनाव देश की प्रगति और विकास में बाधा है, इसलिए संविधान में संशोधन कर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए. देखें Video:- 

 

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, हमेशा होने वाले चुनाव देश की प्रगति और विकास में बाधक हैं. पिछले साल नवंबर-दिसंबर में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए. उसके चार माह बाद देश में लोकसभा चुनाव हुए. इसके बाद हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड में चुनाव हुए. ये चुनाव खत्नृम हुए नहीं कि, दिल्ली का दंगल शुरू हो गया और अब सभी राजनैतिक दल और नेता बिहार चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. हमारे देश में हर छह माह में कहीं न कहीं चुनाव होते हैं. ये बार-बार होने वाले चुनाव में बड़ी मात्रा में धन खर्च होता है. सुरक्षा बल और अधिकारी-कर्मचारी भी चुनाव कराने एक राज्य से दूसरे राज्यों में जाते हैं. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री और राज्य के मंत्रीगणों का भी समय खराब होता है. लॉन्ग टर्म प्लानिंग और विकास के सभी काम ठप्प हो जाते हैं. अगर देश में एक साथ चुनाव होंगे तो बाकी साढ़े चार साल सरकारें केवल विकास के काम में जुट सकती है. इसलिए संविधान में संशोधन कर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने चाहिए.

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1967 तक होते थे एक साथ चुनाव
मोदी सरकार के मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, वर्ष 1967 में भी हमारे देश में एक साथ चुनाव होते थे. पहले बैलेट पेपर से चुनाव होते थे, फिर बैलेट पेपर पर मुहर लगाई जाती थी और अब ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराए जाते हैं. शिवराज सिंह ने कहा कि, तत्कालीन केंद्र सरकार ने राज्यों में दूसरे दलों की सरकार बनने पर अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग कर विधानसभाएं भंग करना शुरू कर दिया और तब से एक साथ चुनाव बंद हो गए. लोकसभा और विधानसभा के चुनाव अलग-अलग होने लगे. 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, देश के चुनाव आयोग ने 1983 में सबसे पहले कहा कि, देश में एक बार, एक साथ चुनाव होना चाहिए. फिर वर्ष 1999 में विधि आयोग ने भी यही कहा कि, देश में एक साथ चुनाव हो. देश के न्यायधीश, मुख्य न्यायधीश, पूर्व चुनाव आयुक्त और अनेक विचारशील लोगों ने इस बहस को आगे बढ़ाकर एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया था. आज प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने ये मुद्दा उठाया कि, देश के संविधान में संशोधन कर एक साथ चुनाव कराने चाहिए. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द जी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है. उस समिति ने विचार विमर्श किया और रिपोर्ट के आधार पर 87% लोगों ने कहा कि, हमारे देश में एक साथ चुनाव होना चाहिए.

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शिवराज सिंह ने कहा कि, देश के विद्वान, विचारक, सोचने वाले, अनेकों राजनैतिक दल सब यही चाहते हैं कि, एक राष्ट्र, एक चुनाव होने चाहिए.

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