Advertisement

'सामाजिक न्याय की हत्या की जा रही है', कर्नाटक की आरक्षण नीति पर बोले एमके स्टालिन

तमिलनाडु के सीएम ने ऑल इंडिया फेडरेशन फॉर सोशल जस्टिस के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वर्तमान में आरक्षण इस आधार पर अधिक दिया जा रहा है कि कौन भाजपा को वोट दे रहा है और कौन नहीं.

तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन
शिल्पा नायर
  • चेन्नई,
  • 04 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 8:10 AM IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने बोम्मई सरकार की नई आरक्षण नीति की आलोचना करते हुए कहा कि कर्नाटक में सामाजिक न्याय की हत्या की जा रही है. ऑल इंडिया फेडरेशन फॉर सोशल जस्टिस के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में आरक्षण इस आधार पर अधिक दिया जा रहा है कि कौन भाजपा को वोट दे रहा है और कौन नहीं.

Advertisement

स्टालिन ने कहा, “आप सभी जानते होंगे कि सामाजिक न्याय के नाम पर कर्नाटक में क्या किया गया. मुसलमानों को दिया गया आरक्षण वापस ले लिया गया. उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी में ले जाया गया. मुसलमानों के लिए आरक्षण विभाजित कर दिया गया और दो अन्य समुदायों को दे दिया गया, जिससे उनके बीच दरार पैदा हो गई. इसी तरह, अनुसूचित जातियों के बीच भी पक्षपात दिखाया गया. ऐसा आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है. वर्गीकरण उन लोगों के आधार पर किया गया है जो भाजपा को वोट देते हैं और जो नहीं करते हैं. स्पष्ट रूप से, कर्नाटक में सामाजिक न्याय की हत्या की जा रही है.”

उन्होंने आगे कहा, "प्रत्येक राज्य में वर्ग और जाति के आधार पर समस्याओं में अंतर हो सकता है. लेकिन मुद्दे का मूल एक ही है- घोर भेदभाव. जहां कहीं भी भेदभाव, बहिष्कार, छुआछूत और गुलामी, अन्याय है, इस जहर को दूर करने की दवा सामाजिक न्याय है. जिस तरह सांप के जहर का इलाज उसी विष से तैयार एंटीडोट्स से किया जाता है, उसी तरह जाति के आधार पर भेदभाव करने वाले लोगों का उत्थान उसी जाति द्वारा किया जाता है. यही आरक्षण का सामाजिक न्याय आदर्श है."

Advertisement

'भाजपा ने सामाजिक और शैक्षणिक के साथ आर्थिक जोड़ दिया'

स्टालिन ने कहा, "केंद्र की भाजपा सरकार ने चालाकी से सामाजिक और शैक्षणिक के साथ-साथ 'आर्थिक' जोड़ दिया. उन्होंने आर्थिक स्थिति के आधार पर पहले ही आरक्षण दे दिया है. हालांकि यह एक स्थिर मानदंड नहीं है. जो आज गरीब है वह कल अमीर बन सकता है और इसके विपरीत. कुछ लोग अपने पास मौजूद राशि को छुपा भी सकते हैं. इसलिए आरक्षण के लिए यह मानदंड सही नहीं है."

'10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण का समर्थन करने में क्या तर्क है'

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर अगड़ी जातियों के गरीबों पर ईडब्ल्यूएस लागू करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "यह सामाजिक न्याय नहीं है. हम गरीबों और जरूरतमंदों के लिए किसी भी तरह की आर्थिक मदद करने से नहीं रोकते हैं. यह आर्थिक न्याय है न कि सामाजिक न्याय. ईडब्ल्यूएस के तहत अगड़ी जातियों को 10% आरक्षण देना भाजपा सरकार की चाल है. जिन लोगों ने आरक्षण को योग्यता के विरुद्ध बताया वे अकेले EWS आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं. मैं इसके पीछे के एजेंडे को और स्पष्ट नहीं करना चाहता. यह उनकी शिकायत है कि आरक्षण सभी समुदायों के लिए ऊपर की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है, जो उन्हें आरक्षण के खिलाफ बोलने के लिए मजबूर करता है. फिर 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण का समर्थन करने में उनका क्या तर्क है? क्या यह मेरिट के खिलाफ नहीं है?” 

Advertisement

हमें सामूहिक आवाज उठानी चाहिए- स्टालिन

उन्होंने कहा, “वे (बीजेपी) हमें उस समय में वापस ले जाने की कोशिश कर रहे हैं जब केवल तथाकथित उच्च जातियां ही पढ़ सकती थीं. इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए. हमें पूरे भारत में संघवाद, राज्य की स्वायत्तता, धर्मनिरपेक्षता, समानता, बंधुत्व, समाजवाद और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को स्थापित करने के लिए आवाज उठानी चाहिए. यह एक अकेली आवाज या अलग-अलग अलग-अलग आवाजें नहीं होनी चाहिए. यह सामूहिक आवाज होनी चाहिए.”

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement