
उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव में उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर साफ हो चुकी है. नॉमिनेशन की आज यानि 25 अक्टूबर को अंतिम तारीख है और एक दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उम्मीदवारों का ऐलान किया. समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी कांग्रेस के साथ गठबंधन की तस्वीर साफ होने के बाद बची सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी. किसी ने लोकसभा चुनाव के सफल प्रयोग को आगे बढ़ाया है तो किसी ने गलती सुधारने का प्रयास किया है. सपा और बीजेपी से लेकर बसपा तक, टिकट बंटवारे में तीन दलों के तीन प्रयोग नजर आते हैं.
1- गाजियाबाद सीट पर सपा का 'फैजाबाद फॉर्मूला'
सपा ने लोकसभा चुनाव में अयोध्या जिले की फैजाबाद लोकसभा सीट पर दलित नेता को उम्मीदवार बनाया था. फैजाबाद सीट सामान्य थी. पार्टी ने विधानसभा उपचुनाव में भी यही प्रयोग गाजियाबाद सदर विधानसभा सीट पर दोहराया है. गाजियाबाद सामान्य सीट है और सपा ने यहां से सिंह राज जाटव को टिकट दिया है. ऐसा पहली बार है जब पार्टी ने इस सामान्य सीट पर दलित चेहरे को उतारा है. फैजाबाद में सामान्य सीट पर दलित कार्ड का फॉर्मूला हिट रहा और पार्टी प्रतिष्ठापरक सीट जीतने में सफल रही थी.
गाजियाबाद भी बीजेपी का गढ़ माना जाता है. इस बार ये फॉर्मूला हिट होता है या फेल, ये चुनाव नतीजे ही बताएंगे. सपा ने उपचुनाव में पीडीए के फॉर्मूले पर टिकट बांटे हैं. पार्टी ने अलीगढ़ जिले की खैर (सुरक्षित) सीट से डॉक्टर चारु केन और गाजियाबाद से सिंह राज जाटव के रूप में दो दलित चेहरों पर दांव लगाया है तो चार मुस्लिम और तीन पिछड़े चेहरों को भी चुनाव मैदान में उतारा है. सपा के मुस्लिम उम्मीदवारों की बात करें तो कुंदरकी से मोहम्मद रिजवान, सीसामऊ से नसीम सोलंकी, फूलपुर से मुस्तफा सिद्दीकी और मीरापुर से सुम्बुल राणा को टिकट दिया है. अखिलेश यादव की पार्टी ने करहल से तेज प्रताप यादव, कटेहरी सीट से शोभावती वर्मा और मझवां सीट से ज्योति बिंद के रूप में ओबीसी चेहरों को उतारा है.
2- कैडर और ओबीसी के फॉर्मूले पर लौटी बीजेपी
लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दूसरे दलों से आए नेताओं को दिल खोलकर टिकट दिए थे. पार्टी के खराब प्रदर्शन के पीछे इसे भी एक वजह बताया जा रहा था. बीजेपी ने उपचुनाव में इस गलती को सुधारते हुए कैडर पर फोकस किया है. बीजेपी यूपी की नौ में से आठ सीटों पर उपचुनाव लड़ रही है और एक सीट सहयोगी आरएलडी के लिए छोड़ी है. बीजेपी ने जिन आठ उम्मीदवारों का ऐलान किया है, उनमें से चार पर पार्टी के पुराने कैडर को तवज्जो दी गई है. पार्टी ने 17 साल पहले सपा छोड़कर आए संजीव शर्मा को भी इनाम दिया है.
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करहल सीट से बीजेपी उम्मीदवार अनुजेश यादव पहले सपा में थे. कटेहरी से उम्मीदवार धर्मराज निषाद मायावती की सरकार में मंत्री रहे हैं. वे बसपा छोड़कर सपा में आए हैं. वहीं, फूलपुर से उम्मीदवार दीपक पटेल भी बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में करछना सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कुल चार उम्मीदवार दूसरी पार्टियों से बीजेपी में आए हैं जबकि चार संगठन के पुराने समर्पित नेताओं को भी टिकट देकर पार्टी ने कैडर और बाहरी को बैलेंस किया है. मझवां से उम्मीदवार सुचिस्मिता मौर्य का टिकट पार्टी ने 2022 में काट दिया था.
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जातीय समीकरणों की बात करें तो बीजेपी उम्मीदवारों की लिस्ट में सबसे ज्यादा ओबीसी को टिकट दिया गया है. ओबीसी वर्ग से चार नेताओं अनुजेश यादव, दीपक पटेल, धर्मराज निषाद और सुचिस्मिता मौर्य बीजेपी का टिकट पाने में सफल रहे तो वहीं ब्राह्मण वर्ग से भी दो उम्मीदवार हैं- सीसामऊ से सुरेश अवस्थी और गाजियाबाद से संजीव शर्मा. कुंदरकी से राजपूत नेता रामवीर ठाकुर बीजेपी उम्मीदवार हैं तो वहीं खैर सुरक्षित सीट से सुरेंद्र दिलेर के रूप में पार्टी ने दलित चेहरे पर दांव लगाया है. टिकट बंटवारे में कैडर को बैलेंस करने की कोशिश के साथ ही बीजेपी का ओबीसी फोकस भी साफ नजर आता है.
3- बसपा उम्मीदवारों की लिस्ट में 2007 जैसा प्रयोग
मायावती की अगुवाई वाला बसपा ने 2007 में सोशल इंजीनियरिंग का ऐसा ताना-बाना बुना कि पार्टी अकेले पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल हो गई थी. 2012 से अब तक बसपा ने कई प्रयोग किए, कभी दलित और मुस्लिम को साथ लाने की कोशिशें की तो कभी दलित-पिछड़ा को, पार्टी का हर प्रयोग नाकाम रहा. अब बसपा 2007 के दलित-ब्राह्मण फॉर्मूले पर लौटती नजर आ रही है. बसपा ने नौ सीटों के उपचुनाव में एक दिन पहले जिन आठ उम्मीदवारों का ऐलान किया था, उनमें दो ब्राह्मण, एक ठाकुर, एक वैश्य, दो मुस्लिम और दो पिछड़े वर्ग से थे.
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बसपा ने मिर्जापुर जिले की मझवां सीट से दीपक तिवारी और सीसामऊ सीट से वीरेंद्र कुमार शुक्ला को टिकट दिया है. ये दोनों ही ब्राह्मण चेहरे हैं. पार्टी ने फूलपुर सीट से जितेंद्र कुमार सिंह के रूप में ठाकुर नेता को मैदान में उतारा है. गाजियाबाद सीट से वैश्य पीएन गर्ग को बसपा ने टिकट दिया है. मीरापुर से शाहनजर और कुंदरकी से रफतउल्ला उर्फ छिद्दा नेता के रूप में दो मुस्लिम और करहल से डॉक्टर अवनीश कुमार शाक्य और कटेहरी से अमित वर्मा के रूप में दो पिछड़े चेहरों पर भी बसपा ने दांव लगाया है.