
राजनीति में अक्सर इतिहास खुद को दोहराता है. जितिन प्रसाद की बीजेपी में एंट्री के साथ ही कांग्रेस से उनके परिवार के रिश्तों का इतिहास एक बार फिर दोहराया गया है. जितिन के पिता जितेंद्र प्रसाद वर्ष 2000 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव में बगावत करते हुए सोनिया गांधी के खिलाफ उतरे थे. अब 21 साल बाद उनके बेटे ने कांग्रेस को करारा झटका दिया है. 47 वर्षीय जितिन प्रसाद ने ऐसे वक्त में बीजेपी का दामन थामा है, जब अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं.
आजतक जितिन प्रसाद के उस बंगले पर पहुंचा जहां से कभी उनके पिता जितेंद्र प्रसाद ने राजनीति में कदम रखा था. प्रसाद भवन की दीवारें और पुरानी तस्वीरें उनकी कांग्रेस की राजनीति का वह पड़ाव बयां करती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आया. यहां रखा टाइपराइटर यूं तो धूल से लबरेज है पर कितने ऐतिहासिक पत्र इससे लिखे गए हैं यह जितेंद्र प्रसाद और उनके पुत्र जितिन प्रसाद बेहद अच्छे से जानते होंगे.
जितिन के फॉलोवर्स की मानें तो जितिन अक्सर शाहजहांपुर के इस बंगले में आते हैं और एक आम आदमी की तरह सब के साथ चाय पानी करते हैं. बाहर पड़े तखत पर जितिन अक्सर बैठते हैं. अपने पिता की यादें ओझल ना होने पाए इसके लिए बंगले में ही बने ऑफिस को वैसे ही रहने दिया और रिनोवेट कराने की कोशिश भी नहीं की. यूं तो जितिन के पिता आज तस्वीरों में ही कैद है पर शायद उनकी 2000 में की गई बगावत जितिन के लिए एक संदेश छोड़कर गई थी.
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कांग्रेस के आंतरिक सूत्रों ने उनके पार्टी छोड़ने को लेकर कहा कि वह लंबे समय से प्रदेश नेतृत्व से नाराज चल रहे थे. खासतौर पर अपने जिले शाहजहांपुर को लेकर वह खासे नाराज थे. पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में प्रदेश स्तर पर किसी भी फैसले में शामिल न किए जाने से वह खफा थे. उनका गुस्सा तब और बढ़ गया, जब उनकी जानकारी के बिना ही शाहजहांपुर में जिला कांग्रेस अध्यक्ष बदल दिया गया. प्रसाद के साथ बीते कुछ महीनों में काम करने वाले एक नेता ने कहा, 'उनका कहना था कि शाहजहांपुर में उन लोगों को कांग्रेस ज्यादा महत्व दे रही है, जो सपा छोड़कर आए हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए सालों तक काम करने वाले लोगों को हाशिये पर डाल दिया गया है.'
नेतृत्व से नाराजगी का ही असर था कि जी-23 के नेताओं में वह भी शामिल थे और पार्टी में सुधार के लिए लीडरशिप को पत्र भी लिखा था. खुशी से लबरेज जितिन के समर्थकों ने जितिन के बंगले में ही आतिशबाजी की और उनके बीजेपी ज्वाइन करने को लेकर जश्न मनाया. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मेंबर भूपेंद्र सिंह भानु ने आज तक को बताया कि जिस तरह का बर्ताव कांग्रेस की टॉप कमान ने जितिन के साथ किया उसके बाद यही होना था. उन्होंने कहा कि हम सब जितिन के साथ हैं और जहां-जहां जितेन जाएंगे हम उनके पीछे-पीछे आएंगे.
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जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व मेंबर कौशल मिश्रा ने तो यह तक कह डाला की वर्तमान कांग्रेस एक एनजीओ है पार्टी नहीं. तो वहीं कांग्रेसी ब्राह्मण चेतना परिषद के अध्यक्ष विश्वदीप अवस्थी ने कहा कि जब जितिन लखनऊ पहुंचेंगे तब सबको अंदाजा होगा कि उनके पीछे कितनी भीड़ है. उन्होंने औपचारिक तौर पर या साफ करने की कोशिश की कि जितिन के बाद बड़ी संख्या में उनके फॉलोअर्स बीजेपी ज्वाइन करने वाले हैं. तो वहीं कुछ लोगों का यह कहना था कि जितिन हमेशा से ब्राह्मण चेहरा रहे हैं और कांग्रेस की हार बीजेपी के लिए यूपी विधान सभा इलेक्शन में जीत का काम करने वाली है.