
हरियाणा में नई सरकार का गठन का मौका था. नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी थी. शपथग्रहण से पहले नायब सिंह सैनी ने पंचकुला के मंदिरों में पहुंचकर दर्शन-पूजन किए, आशीर्वाद लिए. वे वाल्मीकि मंदिर भी पहुंचे. शपथग्रहण समारोह के मंच से भी वाल्मीकि जयंती का जिक्र हुआ. इधर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वाल्मीकि जयंती पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी वाल्मीकि मंदिर पहुंचे. उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश तक, सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन की बहार है.
हर पार्टी दलित वोटबैंक को अपने पाले में करने के लिए वाल्मीकि जयंती के मौके को भुनाने की कोशिश में है. बीजेपी से कांग्रेस और नॉर्थ से साउथ तक, वाल्मीकि जयंती पर इतनी सियासी हलचल है तो कहीं न कहीं इसके पीछे दलित वोटों का गणित भी है. देश की कुल आबादी में करीब 17 फीसदी आबादी दलित है. यूपी की बात करें तो महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि चित्रकूट के लालापुर में हवन-पूजन और वाल्मीकि रामायण के पाठ का आयोजन हो ही रहा, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे. यूपी सरकार ने हर जिले में भजन-कीर्तन और श्रीरामचरितमानस के पाठ के साथ ही सांस्कृतिक आयोजनों का ऐलान किया है.
योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली यूपी सरकार ने तहसील और ब्लॉक स्तर पर भी आयोजन के निर्देश दिए हैं. महर्षि वाल्मीकि दलित समाज के बड़े प्रतीक हैं, बड़े संत हैं और दलित पॉलिटिक्स की पिच पर मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी की लगातार ढीली होती पकड़ को देखते हुए भी बीजेपी को अपना बेस बढ़ाने का अवसर नजर आ रहा है. महर्षि वाल्मीकि बीजेपी के हिंदुत्व वाले सांचे में भी फिट हो जाते हैं. यूपी में दलित आबादी की बात करें तो कुल आबादी में करीब 20 फीसदी भागीदारी है. सूबे में दलित मतदाता बसपा के कोर वोटर माने जाते हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी वाल्मीकि जयंती के मौके पर दलित समाज को संदेश देने का मौका नहीं गंवाया. अखिलेश ने भी महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.
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दिल्ली में जहां कांग्रेस के दो शीर्ष नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी वाल्मीकि मंदिर पहुंचे. नई दिल्ली से बीजेपी की सांसद बांसुरी स्वराज, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और कमलजीत सेहरावत ने भी वाल्मीकि जयंती पर मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की. दिल्ली में भी करीब 20 फीसदी दलित हैं और बसपा का इस केंद्र शासित प्रदेश में भी ठीक-ठाक जनाधार रहा है जो आम आदमी पार्टी के उभार के बाद उसकी तरफ शिफ्ट हो गया. सत्ता का रुख तय करने में दिल्ली के दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं और यही वजह है कि कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक संदेश की पॉलिटिक्स के जरिये दलितों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती.
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मध्य प्रदेश में भी सरकार की ओर से भी महर्षि वाल्मीकि जयंती पखवाड़ा के तहत विविध आयोजन किए जा रहे हैं जिसकी शुरुआत सीएम मोहन यादव ने किया. मध्य प्रदेश में करीब 16 फीसदी दलित आबादी है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी संत रविदास जयंती पर यात्रा के जरिये दलित मतदाताओं को अपने पाले में लाने में सफल रही थी. बीजेपी बड़ी जीत के साथ सत्ता में लौटी तो उसके पीछे दलित मतदाताओं के समर्थन का अहम रोल बताया जा रहा था. अब बीजेपी की कोशिश दलित वोटबैंक को अपने पाले में बनाए रखने की है.
पंजाब से लेकर आंध्र प्रदेश और कर्नाटक तक, वाल्मीकि जयंती पर राजनीतिक आयोजनों की धूम है तो इसके पीछे भी कहीं ना कहीं दलित वोटों का गणित ही है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया तक, वाल्मीकि मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की. पंजाब में करीब 32 फीसदी दलित हैं तो वहीं कर्नाटक में भी 19 फीसदी से अधिक. आंध्र प्रदेश सरकार वाल्मीकि जयंती को राज उत्सव के रूप में मना रही है. आंध्र प्रदेश में भी करीब 17 फीसदी दलित हैं जो सत्ता का स्वरूप तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.