Advertisement

Margaret Alva: पांच बार सांसद, केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल...जानिए उपराष्ट्रपति उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा के बारे में

Opposition’s vice president candidate Margaret Alva: उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए ने शनिवार शाम को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था. एक दिन बाद रविवार को शरद पवार के घर पर बैठक के बाद विपक्षी दलों ने मार्गरेट अल्वा को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है. 

उदयपुर में मई में हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर में सोनिया गांधी के साथ मार्गरेट अल्वा (फाइल फोटो) उदयपुर में मई में हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर में सोनिया गांधी के साथ मार्गरेट अल्वा (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 6:26 PM IST
  • 19 जुलाई तक नामांकन करने की अंतिम तारीख
  • 6 अगस्त को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगी वोटिंग

Opposition president candidate Margaret Alva:विपक्ष ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मार्गरेट अल्वा को उम्मीदवार घोषित कर दिया है. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने इनके नाम की घोषणा की है. कर्नाटक के मैंगलों में 1942 में 14 अप्रैल को जन्मी मार्गरेट राजस्थान की (12 मई 2012 - 07 अगस्त 2014) राज्यपाल रह चुकी हैं. उन्होंने 6 अगस्त 2009 से 14 मई 2012 तक उत्तराखंड की पहली महिला राज्यपाल के रूप में कार्य किया. उन्होंने वकील के तौर पर अपने करियर की शुरुआत. वह सामाजिक कार्यकर्ता भी रही हैं. 1999 में लोक सभा के लिए निर्वाचित होने से पहले मार्गरेट आल्वा 1974 से लागतार चार बार 6 साल के लिए राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुईं.

Advertisement

वहीं मार्गरेट अल्वा ने ट्वीट कर कहा कि उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में नामित होना मेरे लिए सम्मान की बात है. मैं इस फैसले को बड़ी विनम्रता से स्वीकार करता हूं और मुझ पर विश्वास करने के लिए विपक्ष के नेताओं को धन्यवाद देता हूं.

राजीव गांधी सरकार में थीं मंत्री

1984 की राजीव गांधी सरकार में आल्वा को संसदीय मामलों का केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया. इसके बाद उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय में युवा मामले व खेल, महिला एवं बाल विकास का प्रभारी मंत्री भी बनाया गया. 1991 में कार्मिक, पेंशन, जन परिवेदना, प्रशासनिक सुधार (प्रधानमंत्री से सम्बद्ध) की केंद्रीय राज्य मंत्री बनाई गईं. 

10 संसदीय समितियों में रहीं शामिल

मार्गरेट अल्वा करीब 30 साल तक सांसद रहीं. इस दौरान वह संसद की महत्वपूर्ण समितियों व सार्वजनिक निकायों की समिति (सी.ओ.पी.यू.), लोक लेखा समिति (पी.ए.सी.), विदेश मामलों की स्थायी समिति, पर्यटन और यातायात, विज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण व वन तथा महिला अधिकारों की चार महत्त्वपूर्ण समितियां- जैसे दहेज निषेध अधिनियम (संशोधन) समिति, विवाह विधि (संशोधन) समिति, समान पारिश्रमिक समीक्षा समिति व स्थानीय निकायों में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए 84वें संविधान संशोधन प्रस्ताव के लिए बनी संयुक्त चयन समिति में रहीं. 1999 से 2004 तक महिला सशक्तीकरण की संसदीय समिति की सभापति रहीं.

Advertisement

बालिकाओं के विकास की योजना बनाई

1986 में यूनिसेफ एशिया के बच्चों पर हुई प्रथम कॉन्फ्रेंस व महिला विकास पर हुई सार्क देशों की मंत्री स्तर की बैठक की आल्वा सभापति रही थीं. इस बैठक में सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों ने 1987 को बालिका वर्ष घोषित किया था. 1989 में केंद्र सरकार ने महिलाओं के विकास की विस्तृत रणनीति की योजना का मसौदा तैयार करने के मूल समूह का अध्यक्ष बनाया. 

विश्व के प्रमुख संगठनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया

- महिला दशक के दौरान संयुक्त राष्ट्र के सभी महत्वपूर्ण सम्मेलनों में आल्वा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है. 1986 में शांति के लिए विश्व महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल  की अध्यक्ष बनीं. 

- 1992 में सिओल में महिलाओं पर की जाने वाली हिंसा के विरुद्ध बैठक में ESCAPE का अध्यक्ष चुना गया. 1994 में ESCAPE के द्वारा बैंकॉक में आयोजित बैठक के लिए आमंत्रित किया गया. 

- 1976 में संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा में राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की सदस्य रहीं. 1997 में अन्तरराष्ट्रीय विकास समिति (रोम) के संचालन परिषद कार्यकारणी में तीन वर्ष तक निर्वाचित सदस्य रहीं. 

- काहिरा कांफ्रेंस की पालना में बने जनसंख्या नीतियों के निर्माण की पुनश्चर्या के लिए UNFPA के विशेष सलाह-समूह की सदस्य रही हैं.

- 1997 में कैमरून के राष्ट्रीय चुनावों में कॉमनवैल्थ के पर्यवेक्षक दल में रही हैं.

Advertisement

- संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं की प्रास्थिति पर बने आयोग की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. 

- 1999 में यूनिसेफ द्वारा बाल अधिकारों की संहिता के मसौदे को तैयार करने के लिए बनाए गए विशेषज्ञ समूह में सेवाएं दी हैं.

- बालश्रम की राष्ट्रीय समिति तथा नेशनल चिल्ड्रन बोर्ड की आप उप-सभापति रही हैं.

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 6 अगस्त को होगी वोटिंग

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए इच्छुक उम्मीदवार 19 जुलाई तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं. नामांकन पत्रों की जांच 20 जुलाई को होगी. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र 22 जुलाई तक वापस ले सकेंगे.

उपराष्ट्रपति चुनने के लिए 6 अगस्त को दिन में 10 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे. उसी दिन काउंटिंग होगी और नतीजे भी आ जाएंगे. देश के वर्तमान उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को खत्म हो रहा है. वर्तमान उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को खत्म हो रहा है. वेंकैया नायडू का कार्यकाल पूरा होने से चार दिन पहले ही ये साफ हो जाएगा कि देश का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा.
 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement