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वॉकओवरः 6 माह में ऐसा क्या हुआ कि ममता पर बदल गया कांग्रेस का मन?

ममता बनर्जी को बंगाल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने के लिए उन्हें यहां से हर हाल में भवानीपुर सीट पर उपचुनाव जीतना होगा. ऐसे में मुख्यमंत्री व टीएम प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ कांग्रेस ने भवानीपुर सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसला किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस क्यों ममता के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतार रही है.

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कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 09 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:00 PM IST
  • भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी उपचुनाव लड़ेंगी
  • ममता के खिलाफ कांग्रेस नहीं उतारेगी प्रत्याशी
  • ममता को वॉकओवर दिया, टीएमसी से बढ़ेगी दोस्ती

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट उपचुनाव का बिगुल बज गया है. ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने के लिए उन्हें यहां से हर हाल में चुनाव जीतना होगा.

ऐसे में मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ कांग्रेस ने भवानीपुर सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसला किया है. कांग्रेस भले ही ममता के खिलाफ अपना कैंडिडेट न उतार रही हो, लेकिन वाममोर्चा ममता को वॉकओवर देने के मूड में नहीं है. 

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बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी के खिलाफ कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने अपना उम्मीदवार उतारा था. गठबंधन के तहत इस सीट पर सीपीएम की मीनाक्षी मुखर्जी ने किस्मत आजमाई थी. कांग्रेस और लेफ्ट ने इस सीट पर पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा था, जिसका नतीजा रहा कि ममता बीजेपी प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार गईं. 

वहीं, अब उपचुनाव में ममता बनर्जी अपनी परंपरागत सीट भवानीपुर से मैदान में हैं. कांग्रेस ने ममता के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है. माना जा रहा है कि दो अहम कारण के चलते कांग्रेस ने ममता को वॉकओवर देना का फैसला किया है. पहला कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन पूरी तरह से फेल रहा और दोनों ही दलों का खाता तक नहीं खुला. इसके अलावा भवानीपुर सीट ममता की परंपरागत है, जहां कांग्रेस ने कैंडिडेट न उतारकर 2024 के लिए दोस्ती का हाथ बढ़ा रही है. 

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कांग्रेस और टीएमसी के बीच इन दिनों दोस्ती बढ़ रही है. अभी हाल ही में ममता बनर्जी ने दिल्ली आकर सोनिया गांधी के साथ बैठक की थी. इन बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष को एक साथ आने की जरूरत है और अगर बीजेपी को हराना है तो व्यक्तिगत मतभेदों को भुला देना चाहिए. ऐसे में अगर कांग्रेस उम्मीदवार उतारती तो 2024 के चुनाव में उन्हें टीएमसी का साथ मिलना मुश्किल है. 

वहीं, बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वाममोर्चा के साथ गठबंधन किया था. इसके बावजूद उनका प्रदर्शन सबसे खराब रहा. पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली, जिसके चलते राज्य नेतृत्व को आलोचना का भी सामना करना पड़ा था. इससे भी बुरी बात ये है कि नतीजे आने के कुछ ही दिनों बाद प्रदेश प्रभारी जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. 

बीजेपी में जाने के बाद जितिन प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि बंगाल चुनाव के दौरान टीएमसी के साथ पार्टी के भ्रमित रुख ने उसके मूल मतदाताओं को भी कन्फ्यूज कर दिया था. कांग्रेस ने बंगाल में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के प्रमुख अब्बास सिद्दीकी के साथ भी चुनाव लड़ने को बड़ी गलती बताया था. ममता बनर्जी जिस तरह से बंगाल का चुनाव जीती हैं, उससे कांग्रेस अब उनके साथ कोई मनमुटाव नहीं रखना चाहती है. 

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बता दें कि भवानीपुर सीट को ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता है. ममता ने 2011 और 2016 में यहीं से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीतकर बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थीं. इस सीट पर ममता के लिए जीत हासिल करना ज्यादा मुश्किल चुनौती नहीं होगी.

ममता तो यहां से अपनी जीत को लेकर निश्चिंत हैं. ऐसे में कांग्रेस के लिए बंगाल के भवानीपुर उपचुनाव की लड़ाई से ज्यादा अहम है 2024 का लोकसभा चुनाव. 

कांग्रेस को 2024 में बीजेपी के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़नी है. यही वजह है कि कांग्रेस ने 6 महीने के बाद ममता को लेकर अपना रुख बदल लिया है. प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अब्दुल मन्नान ने कहा कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद बंगाल में तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के समय उन्होंने खड़गपुर सीट पर बीजेपी को रोकने के लिए टीएमसी के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा किया था. ऐसे ही भवानीपुर में भी हम कर रहे हैं, मुख्यमंत्री के प्रति कांग्रेस की सौजन्यता दिखाते हुए. 

 

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