
कृषि बिल पर संसद में लड़ाई हारने के बावजूद कांग्रेस पीछे हटने के मूड में नहीं है. पार्टी लगातार सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रही है. दूसरी तरफ संसद से पास कानून को संवैधानिक दायरे में रहकर अस्वीकार करने की भी तैयारी चल रही है. कांग्रेस ने अपनी प्रदेश सरकारों से कहा है कि कृषि विधेयकों को खारिज करने के लिए वो कानून पर विचार करें.
इस मसले पर कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट कर बताया, ''कांग्रेस अध्यक्ष ने कांग्रेस शासित राज्यों को संविधान के अनुच्छेद 254 (2) के तहत अपने राज्यों में कानून पारित करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए कहा है, जो राज्य विधानसभाओं को एक केंद्रीय कानून को रद्द करने के लिए एक कानून पारित करने की अनुमति देता है, फिर जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होती है.''
अब समझते हैं कि संविधान का अनुच्छेद 254(2) क्या है और यह राज्य सरकारों को क्या अधिकार देता है.
क्या है संविधान का अनुच्छेद 254(2)
संविधान का अनुच्छेद 254 (2) कहता है, ''राज्य विधानसभा द्वारा समवर्ती सूची के किसी विषय के संबंध में बनाए गए कानून में कोई ऐसा प्रावधान है जो संसद द्वारा पहले बनाए गए कानून या उस विषय के संबंध में किसी मौजूदा कानून के प्रावधानों के खिलाफ है तो ऐसी स्थिति में राज्य द्वारा बनाया गया कानून राष्ट्रपति की अनुमति के साथ उस राज्य में लागू किया जा सकेगा.''
यानी, अगर कोई विषय समवर्ती सूची (वो सूची जिसमें केंद्र और राज्य दोनों के विषय आते हैं) में आता है और ऐसे किसी विषय पर राज्य सरकार कोई कानून बनाती है, भले ही वैसा कानून पहले से संसद द्वारा बना दिया गया हो तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कानून उस राज्य में प्रभावी माना जाएगा. हालांकि, ये अनुच्छेद राज्य विधानसभा को कानून में संशोधन करने या बदलने की ताकत जरूर देता है लेकिन दूसरी तरफ ये अनुच्छेद उसी विषय पर संसद द्वारा बनाए गए कानून को लागू करने से भी नहीं रोकता है.
यानी अगर कोई राज्य अनुच्छेद 254(2) का इस्तेमाल करते हुए कोई कानून पास भी कर देता है तो संसद द्वारा बनाया गया कानून बाकी राज्यों में पहले की तरह ही प्रभावी रहता है.
फिलहाल, जो स्थिति है उसके हिसाब से कांग्रेस ने अपनी राज्य सरकारों को इन विकल्पों पर विचार करने के लिए कहा है. पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पुड्डुचेरी में ही कांग्रेस की अपनी सरकारें हैं. अब देखना होगा कि क्या कृषि विधेयकों को असंवैधानिक करार दे रहे कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझावों पर किस तरह आगे बढ़ते हैं.
गौरतलब है कि मोदी सरकार कृषि से जुड़े तीन अहम बिल संसद से पास करा चुकी है. बीते रविवार को राष्ट्रपति ने भी उन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, यानी अब तीनों ही कानून बन गए हैं. बावजूद इसके मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और दूसरे अन्य दलों का विरोध प्रदर्शन खत्म नहीं हो रहा है.
खासकर, पंजाब की सियासत पूरी तरह गरमाई हुई है. अकाली दल ने विरोध जाहिर करते हुए बीजेपी से गठबंधन भी तोड़ दिया है और हरसिमरत कौर मोदी कैबिनेट से भी बाहर हो गई हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस और पंजाब सरकार पूरी तरह से इस मुद्दे को उठा रही है. पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कर ही है. वहीं, किसान भी सड़कों पर हैं. पंजाब से लेकर हरियाणा व अन्य राज्यों में किसान मोदी सरकार के नये कानूनों का विरोध कर रहे हैं और इन कानूनों को किसान विरोधी बता रहे हैं.