
दिल्ली वाले तैयार रहें हवा में घुले जहर में सांस लेने के लिए. राजधानी के आसमान में हर साल की तरह इस बार भी स्मॉग छाने वाला है. दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 332 तक पहुंच गया है. इसका मतलब साफ है कि लोग जिस हवा में सांस ले रहे हैं वो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.
सरकारी डेटा बताता है कि पंजाब में पिछले साल की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में 280% का इजाफा हुआ है. पिछले साल पंजाब में 21 सितंबर से 12 अक्टूबर तक 775 पराली जलाने की घटनाएं रिपोर्ट हुई थीं जो इस साल इसी अवधि में 2,873 तक पहुंच गई हैं.
सच्चाई यह है कि पराली जलने से हवा के प्रदूषित होने का संकट एक बार फिर पूरी ताकत से लौट आया है. पिछले 24 घंटे में ही पराली जलाने की 900 घटनाओं की पहचान हुई है इनमें से अधिकतर मामले पंजाब और हरियाणा जैसे उत्तर भारतीय राज्यों से हैं.
फसलों की कटाई के मौसम के बाद ये समस्या हर साल देखने को मिलती है. किसान रबी की फसल की बुआई से पहले जमीन को तैयार करने के लिए धान की पराली को जला देते हैं.
पराली जलाने पर अधिकारियों की पकड़ में आने और जुर्माने से बचने के लिए किसान भी अलग तरीके अपना रहे हैं. एक बार जब पराली जल जाती है तो वो 15 मिनट में ही खेत में हल चला देते हैं. जिससे कि पराली जलाने के निशान पकड़ में न आ सकें.
हालांकि इस कहानी के दो पहलू हैं. किसान और पंजाब सरकार में पराली के मुद्दे पर जुबानी जंग जारी है. किसानों का दावा है कि उन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही. वहीं सरकार का कहना है कि वो पराली जलाना रोकने के लिए हर मुमकिन कदम उठा रही है. टीवी पर विज्ञापन, एफएम के इस्तेमाल के अलावा हर गांव में संदेश के साथ वैन भेज रही है.
सरकारी मदद का किसानों को इंतजार
अमृतसर के किसान सुखदेव सिंह ने कहा, “हमें सरकार से कोई मुआवजा या मदद नहीं मिली. इसीलिए उनके पास पराली जलाने के अलावा कोई चारा नहीं है. सरकार पूरा साल सोती रहती है और आखिरी वक्त में जागती है, समाधान बहुत छोटे और बहुत देर से हैं और इनसे कोई मदद नहीं मिलने वाली.”
किसान नेता गुरभजन सिंह चब्बा का इस मुद्दे कहना है, “कैमरे पर बातें करना और अखबारों को सुर्खियां देना बहुत आसान होता है. आप चारों तरफ नजर डालें, आपको पता चलेगा कि सरकार बिना कोई मदद किए किसानों को दंडित करना चाहती है.”
किसान हरप्रीत सिंह सिदवा ने आजतक से कहा, "जिस वक्त हमें सरकार का समर्थन मिलना शुरू हो जाएगा हम पराली जलाना बंद कर देंगे. कौन काले खेत और पोषक तत्वों की कमी चाहता है. लेकिन प्रदूषण के लिए सिर्फ किसानों को दोषी ठहराना समाधान नहीं है. उद्योग भी हैं जो दिल्ली का प्रदूषण बढ़ाते हैं लेकिन दुर्भाग्य से किसान अब आसान लक्ष्य बन गए हैं."
गुज्जर समुदाय दिखा रहा राह
अधिकतर किसान पराली जलाने का ही रास्ता अपना रहे हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस मामले में अलग राह दिखा रहे हैं. राज्य में गुज्जर समुदाय पराली को चुन कर बंडल बनाने में लगा है. इसी समुदाय से आने वाले रवि ने आजतक को बताया कि “हम ऐसा पिछली दो पीढ़ियों से करते आ रहे हैं. हम किसान की पराली का ध्यान रखने में मदद कर रहे हैं. हम ये पराली ले जाकर अपने मवेशियों को खिलाते हैं.”
रवि के मुताबिक इससे पराली जलाने को रोकने में मदद मिलती है लेकिन मुद्दा ये है कि हम जैसे बहुत लोग नहीं है, इसीलिए अधिकतर किसानों के पास पराली जलाने के अलावा कोई चारा नहीं है.
क्या कहना है सरकारों का?
वहीं पंजाब और हरियाणा की सरकारों के पास बताने के लिए एक अलग कहानी है. पंजाब सरकार ने कहा कि वह बायोमास आधारित बिजली संयंत्रों के माध्यम से फसल के अवशेषों (पराली) का निस्तारण कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक पंजाब में 7,378 सीएचसी (कस्टम हायरिंग सेंटर) की स्थापना की गई है जबकि 5,200 सीचसी बनने की प्रक्रिया में हैं. यहां से किसान कृषि उपकरणों को किराए पर ले सकते हैं.
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इस बीच, हरियाणा सरकार ने कहा कि फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए बायो-सीएनजी और बायो-इथेनॉल प्रोजेक्ट्स की प्रगति को देखने के लिए एक पैनल बनाया गया. बीजेपी शासित इस राज्य के मुताबिक उसने 2,879 सीएचसी स्थापित किए हैं जबकि 2,000 ऐसे और सीएचसी अक्टूबर तक स्थापित किए जाएंगे.
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
हालांकि पराली के मुद्दे पर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्विटर पर कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने लिखा- “ये विकास का कांग्रेस मॉडल एक्शन में है. अगर दिल्ली का दम घुट रहा है तो दोष पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह को दो. उनसे एक सुबकने वाला पत्र लिखने से ज्यादा उम्मीद मत करो और दरबारी मीडिया को सॉफ्ट इंटरव्यू दो. अब सोनिया और राहुल गांधी से पर्यावरण संरक्षण उपदेश की उम्मीद करो.”
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार भी सर्दियों में दिल्ली का आसमान पिछले साल की तरह ही रहने का अनुमान है. AQI सर्दियों में अधिकतर खतरनाक स्तर पर ही रहेगा.