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पंजाब में आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव में मिले बड़े झटके से उबर रही है. सत्तारूढ़ दल 13 में से सिर्फ तीन सीटें ही जीत पाई थी. ऐसे में 10 जुलाई को होने वाला जालंधर (पश्चिम) उपचुनाव अब AAP के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है.
सीएम मान सहित पूरा कैबिनेट कर रहा प्रचार
सूबे के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पूरा कैबिनेट, पार्टी का लगभग हर विधायक उम्मीदवार मोहिंदर भगत की जीत सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में कड़ी मेहनत कर रहा है. सभी का लक्ष्य लोकसभा चुनाव के बाद निराश हुए कैडर के चेहरे पर दोबारा मुस्कान और ऊर्जा लाना है.
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने दावा किया था कि AAP पंजाब में सभी 13 लोकसभा सीटें जीतेगी लेकिन पार्टी सिर्फ तीन सीटें ही जीत पाई. 7 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं शिरोमणि अकाली दल ने एक सीट जीती जबकि दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं.
लोकसभा चुनाव के झटके से उबर रही AAP
दो साल पहले 2022 में 92 सीटों के साथ AAP पंजाब में सरकार बनाने में कामयाब रही थी. अभी पार्टी लोकसभा चुनाव के झटके से उबर ही रही थी कि जालंधर (पश्चिम) उपचुनाव की घोषणा हो गई. इस निर्वाचन क्षेत्र से AAP विधायक शीतल अंगुराल ने इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर ली थी. जालंधर (पश्चिम) एक आरक्षित सीट है और यहां 10 जुलाई को मतदान होना है. AAP अपने उम्मीदवार मोहिंदर भगत की जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है.
भगवंत मान ने जालंधर में डाला डेरा
सीएम भगवंत मान पिछले कई दिनों से जालंधर में डेरा डाले हुए हैं. उन्होंने शहर में किराए पर एक घर ले लिया है. वह रोड शो कर रहे हैं, सार्वजनिक बैठकें कर रहे हैं, उद्योगपतियों से मिल रहे हैं और जीत हासिल करने के लिए जोर-शोर से प्रचार में लगे हुए हैं.
उन्होंने यहां तक कहा है कि वह मतदान के बाद भी घर नहीं छोड़ेंगे और वहां उपलब्ध रहेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि माझा और दोआबा क्षेत्र के लोगों को अपनी समस्याओं के लिए चंडीगढ़ न जाना पड़े.
कांग्रेस की तरफ से पांच बार की पार्षद मैदान में
लोकसभा में सात सीटें जीतने वाली कांग्रेस भी अपनी पार्टी की उम्मीदवार और पांच बार की पार्षद सुरिंदर कौर के लिए जमकर प्रचार कर रही है. चाहे वह पार्टी प्रमुख अमरिन्दर सिंह हों या विपक्ष के नेता प्रताप बाजवा, हर कोई कांग्रेस को जिताने के लिए प्रयास कर रहा है.
कांग्रेस ने हाल ही में जालंधर लोकसभा सीट जीती थी और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने इस सीट पर 1.75 लाख वोटों से जीत हासिल की थी. इससे जालंधर (पश्चिम) उपचुनाव में पार्टी के हौसले बुलंद हैं. इस बीच बीजेपी के पास एक उम्मीदवार है जो आम आदमी पार्टी से आया है. 2022 में AAP के टिकट पर सीट जीतने वाली शीतल अंगुराल इस बार बीजेपी के टिकट पर AAP को चुनौती दे रही हैं.
अंगुराल जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं और सीएम भगवंत मान, AAP सरकार पर हमला बोल रही हैं. वहीं मुख्यमंत्री भी उन पर जमकर पलटवार कर रहे हैं. पार्टी में भारी असंतोष का सामना कर रही शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने इस उपचुनाव में उम्मीदवार की घोषणा के मामले में बड़ा उलटफेर किया है.
अपने उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहा शिरोमणि अकाली दल
सुखबीर बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल ने सबसे पहले सुरजीत कौर को उपचुनाव के लिए अपनी पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया था. लेकिन जैसे ही पार्टी के भीतर विद्रोह शुरू हुआ और कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी प्रमुख सुखबीर बादल के इस्तीफे की मांग की, अकाली दल ने दावा किया कि सुरजीत कौर से अपना समर्थन वापस ले लिया गया है और वह विद्रोही गुट की पसंद थीं.
हालांकि, नाम वापस लेने की तारीख बीत चुकी है. इस बात की काफी संभावना है कि सुरजीत कौर शिरोमणि अकाली दल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगी, भले ही पार्टी उनका समर्थन नहीं कर रही है.
त्रिकोणीय मुकाबले में AAP ने झोंके संसाधन
जालंधर (पश्चिम) के मतदाता ही तय करेंगे कि इस उपचुनाव में जीत किसकी होगी लेकिन इस त्रिकोणीय मुकाबले में AAP ने जीत हासिल करने के लिए अपने सभी संसाधन झोंक दिए हैं. जीत आम आदमी पार्टी के लिए पुनरुद्धार का काम करेगी जबकि हार आने वाले समय में चार और उप-चुनावों में पार्टी पर दबाव बढ़ा देगी.
जालंधर (पश्चिम) सीट का हाल
निर्वाचन क्षेत्र- जालंधर (पश्चिम)
कुल मतदाता- 1.72 लाख
पुरुष मतदाता- 89,685
महिला मतदाता- 82,327
कुल मतदान केंद्र- 181