
एक तरफ पंजाब और हरियाणा के किसान एमएसपी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार के किसान अपनी धान की फसल एमएसपी से कम दामों पर बेचने को मजबूर हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार से सस्ता धान खरीद कर पंजाब के कमीशन एजेंट मोटा मुनाफा कमा कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं.
पटियाला में पिछले दो दिनों के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार से गैरकानूनी तरीके से लाया जा रहा 8225 टन धान जब्त किया गया है. 13 एफआईआर दर्ज की गई हैं, 20 लोग गिरफ्तार हुए हैं और 32 गाड़ियों को सीज किया गया है.
दरअसल पंजाब में धान की एमएसपी 1888 रुपये प्रति क्विटंल है. जबकि बिहार, यूपी के किसान 900 रुपये से 1000 प्रति क्विंटल पर धान बेचने को मजबूर हैं.
ये मुनाफाखोर कमीशन एजेंट बिहार यूपी और झारंखड में 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदते हैं, फिर इस धान को पंजाब तक लाने में प्रति क्विटंल 150 से 160 रुपये खर्च करते हैं. इस तरह से एक क्विटंल धान को पंजाब तक लाने में इनका अधिकतम खर्चा 12 रुपये बैठता है. इस धान को ये कमीशन एजेंट यहां 1888 रुपये प्रति क्विटंल बेचकर हर 100 किलो धान पर 600 से 700 रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं जबकि अनाज उपजाने वाले किसान को 900 से 1000 रुपये ही मिल पा रहा है.
नीति आयोग द्वारा ' इवेलुएशन स्टडी ऑफ़ एफीकेसी ऑफ मिनिमम सपोर्ट प्राइस ऑन फार्मर्स ' नामक अध्ययन में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश के 28 फीसदी किसान एमएसपी से कम दामों में धान बेचते हैं, 63 फीसदी किसान खुली मंडियों में अपनी उपज बेचते हैं और बाकी सिर्फ 8 फीसदी किसान ही अपने लिए ही धान और गेहूं पैदा करते हैं.
अध्ययन में सामने आया है कि ज्यादातर किसान एमएसपी की सीमित खरीद के कारण अपनी फसल कम दामों में बेच देते हैं.
आंदोलन कर रहे किसान नेताओं का मानना है कि नए कृषि कानूनों के अस्तित्व में आने से मुनाफाखोरी और जमाखोरी बढ़ सकती है. एमएसपी के तहत अनाज की सीमित मात्रा ही खरीदी जाती है बाकी बचा हुआ अनाज किसानों को सस्ते दामों में बेचने पर मजबूर होना पड़ता है. उत्तर प्रदेश और बिहार से आ रहा सस्ता धान किसका बड़ा उदाहरण है.