
आम आदमी पार्टी को दिल्ली चुनाव में करारा झटका लगा है. इसके बाद तमाम अटकलों का दौर जारी है. कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी का पावर सेंटर अब दिल्ली से पंजाब में शिफ्ट हो सकता है. इन्हीं अटकलों और राजनीतिक दावों के बीच एक ही दिन में पंजाब में तीन बड़े घटनाक्रम हुए. जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.
1. कुलदीप धालीवाल से छीना प्रशासनिक सुधार विभाग
पंजाब सरकार ने शुक्रवार शाम को सबसे पहले मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल से प्रशासनिक सुधार विभाग छीन लिया. जिसके लिए पंजाब के राज्यपाल ने सीएम भगवंत मान की सलाह पर गजट नोटिफिकेशन जारी किया. अब धालीवाल केवल एनआरआई मामलों को संभालेंगे.
2. पुलिस विभाग में बड़ा तबादला
दूसरा बड़ा घटनाक्रम भी शुक्रवार शाम को ही हुआ, जब पंजाब के गृह विभाग ने 21 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया. जिसमें कई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), पुलिस आयुक्त (सीपी) और उप महानिरीक्षक (डीआईजी) शामिल हैं. इस फेरबदल में फिरोजपुर और लुधियाना रेंज के डीआईजी, एआईजी इंटेलिजेंस, एआईजी क्राइम, गवर्नर के एडीसी, गुरदासपुर, अमृतसर (ग्रामीण), बरनाला, खन्ना, श्री फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना (ग्रामीण), फिरोजपुर, श्री मुक्तसर साहिब और होशियारपुर के एसएसपी बदले गए हैं.
3. वकीलों से सामूहिक इस्तीफे की मांग!
ये दो बड़े बदलाव हुए ही थे कि अगले ही घंटे एजी ऑफिस के सूत्रों ने आजतक से पुष्टि की कि उच्च अधिकारी (सरकार का हवाला देते हुए) एजी ऑफिस में वकीलों से सामूहिक इस्तीफा मांग रहे हैं, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई है.
दिल्ली चुनाव हारने के बाद पहला बड़ा कदम
ये बदलाव ऐसे समय में किए गए हैं जब 8 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. इससे पंजाब में सत्ता संतुलन बदलने की अटकलें और तेज हो गई हैं.
विपक्ष का हमला और 2027 की रणनीति
8 फरवरी से ही भाजपा और कांग्रेस की ओर से टिप्पणियां की जा रही हैं कि दिल्ली के बाद पंजाब में भी बदलाव होंगे और आम आदमी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए नई रणनीति तैयार कर रही है.
'पंजाब में हिंदू मुख्यमंत्री' वाले बयान से गरमाई राजनीति
आम आदमी पार्टी के नेता अमन अरोड़ा के हाल ही में 'पंजाब में हिंदू मुख्यमंत्री' वाले बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया था. इसके बाद 13 फरवरी को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुलेआम कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है, वे पद छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन नेताओं को मीडिया में गैर-जरूरी बयानबाजी से बचना चाहिए. हालांकि सीएम मान ने किसी का नाम नहीं लिया. इसके बाद उन्होंने खुद के पद से हटने की अटकलों को खारिज कर दिया.
सरकार पर धीमे फैसले लेने का आरोप
विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब के मुद्दों पर सुस्त रवैया अपना रहे हैं और कई मामलों पर देरी से प्रतिक्रिया दे रहे हैं. भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब के प्रवासी नागरिकों (डिपोर्टीज़) से मिलने तक नहीं गए. जब 5 फरवरी को पहला जत्था अमेरिका से आया तब वे दिल्ली में प्रचार में व्यस्त थे. अब 2027 में पंजाब में भाजपा की सरकार बनेगी, लोग यही चाहते हैं. उन्होंने कहा कि सीएम मान ने खुद पद पर बने रहने की बात कही, जबकि यह पार्टी प्रमुख या संयोजक का काम है. सीएम पंजाब के मुद्दों पर विफल रहे हैं.
विधानसभा सत्र में हंगामे के आसार
पंजाब विधानसभा का दो दिवसीय सत्र 24 और 25 फरवरी को चंडीगढ़ में होगा, जहां इन सभी मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की संभावना है.