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अशोक गहलोत कैबिनेट का विस्तार... लेकिन सचिन पायलट के भविष्य पर सस्पेंस बरकरार

कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट की मर्जी के मुताबिक अशोक गहलोत कैबिनेट में अहमियत देकर उनकी नाराजगी को दूर करने की कवायद की है, लेकिन खुद उन्हें कुछ नहीं दिया गया है.

कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 22 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST
  • कैबिनेट विस्तार में पायलट समर्थकों को जगह
  • सचिन पायलट की अब कैसी होगी भूमिका
  • गहलोत ने 2023 के चुनाव की रखी बुनियाद

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कैबिनेट का विस्तार कर 2023 चुनाव की मजबूत बुनियाद रख दी है. सचिन पायलट (Sachin Pilot) के समर्थकों को मंत्रिमंडल में स्थान मिल गया है और कुछ करीबी नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में भी जगह मिलना तय है.

कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट को मर्जी के मुताबिक अहमियत देकर उनकी नाराजगी को दूर करने की कवायद की है. हालांकि, पायलट को व्यक्तिगत तौर पर कुछ नहीं दिया गया. ऐसे में पायलट के सियासी भविष्य पर अभी भी सस्पेंस पहले की तरह बरकरार है कि राजस्थान की सियासत में वो सक्रिय रहेंगे या फिर किसी अन्य राज्य में पार्टी का जिम्मा संभालेंगे? 

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पायलट समर्थकों को मिली जगह 
सचिन पायलट ने करीब एक साल पहले अपने करीबी विधायकों के साथ सीएम गहलोत के खिलाफ बागी रुख अख्तियार कर लिया था, जिसके चलते सरकार पर बड़ा संकट गहरा गया था. सचिन पायलट को डिप्टी सीएम की कुर्सी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का पद गंवाना पड़ा था.

कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के दखल के बाद सुलह-समझौता का फॉर्मूला बना था, जिसके बाद अब पायलट के पांच करीबी विधायकों को रविवार को गहलोत मंत्रिमंडल में जगह दी गई है और कई करीबी नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में जगह दी जाएगी. इससे पायलट खुश भी है, जिसका इजहार खुद उन्होंने रविवार को किया. 

पायलट की अब क्या भूमिका होगी?
सचिन पायलट को फिलहाल राजस्थान में किसी तरह की सियासी भूमिका में नहीं रखा गया है. न तो उन्हें डिप्टी सीएम की कुर्सी दोबारा मिली है और न ही प्रदेश संगठन का जिम्मा. इसके चलते उनके भविष्य की राजनीति पर अभी भी संस्पेस बना हुआ है. ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान सचिन पायलट को राष्ट्रीय संगठन में जगह देकर दूसरे राज्य में प्रभारी के तौर पर जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है. 

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हालांकि, पायलट भी खुद कह चुके हैं कि जो जिम्मेदारी दी जाएगी, उसके लिए वह तैयार हैं. ऐसे में पायलट ने हाल के दिनों में जिस तरह से एक महीने में यूपी के चार दौरे किये हैं, तो क्या पश्चिम यूपी में गुर्जर वोटों की अहमियत देखते हुए उन्हें प्रियंका गांधी अपने साथ लगा सकती हैं? 

गहलोत ने साधा जातीय समीकरण 
गहलोत कैबिनेट में फेरबदल कर जातीय समीकरण साधने की कवायद की गई है, जिसके तहत कैबिनेट में जाट-एसटी, दलितों को खास अहमियत दी गई है. जाट और अनुसूचित जनजाति समाज के 5-5 मंत्री बनाए गए हैं तो दलित समाज से 4 कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं. इसके अलावा राजपूत, वैश्य समाज से 3-3 मंत्रियों को जगह मिली है.

वहीं, मुस्लिम और गुर्जर समाज से 2-2 मंत्री बनाए हैं तो यादव, पटेल और बिश्नोई वर्ग से एक एक मंत्री को जगह दी गई है. इस तरह अशोक गहलोत ने जातीय आधार पर सभी समाज को अपनी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देकर सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है, जिसे 2023 के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. 

क्षेत्रीय संतुलन नहीं साध सके गहलोत
गहलोत सरकार ने कैबिनेट के जरिए भले ही जातीय समीकरण साधा हो, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन नहीं बना सका. राजस्थान के कुल 33 जिलों में से 16 जिलों से कोई भी मंत्री नहीं बनाया गया है. वहीं, चार जिलों का मंत्रिमंडल में वर्चस्व कायम है, जहां से आधे मंत्री हैं.

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गहलोत मंत्रिमंडल में भरतपुर और जयपुर का दबदबा है, जहां से 4-4 मंत्री हैं. बीकानेर और दौसा से 3-3 मंत्री हैं. बांसवाड़ा, अलवर और झुंझुनू में 2-2 मंत्री बनाए हैं. प्रतापगढ़, डूंगरपुर, धौलपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, पाली, झालावाड़, अजमेर, नागौर, उदयपुर,  श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, सिरोही, राजसमंद जिले से कई मंत्री नहीं हैं. 

कैबिनेट विस्तार को लेकर अंसतोष 
गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार में रविवार को 15 नए मंत्रियों ने शपथ ली. मंत्रिमंडल में 11 कैबिनेट मंत्री और चार राज्य मंत्री पद की शपथ ली. कैबिनेट में 12 नए चेहरे शामिल हुए हैं. कैबिनेट फेरबदल पर असंतोष भी खुलकर सामने आ गई.

गहलोत के करीबी टीकाराम जूली को राज्य से कैबिनेट मंत्री बनाए पार्टी कुछ विधायक नाराज हो गए हैं. कांग्रेस विधायक शफिया जुबैर ने कहा कि महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण नहीं मिला तो विधायक जौहरी लाल मीणा और बसपा से आई दीपचंद खड़िया ने सवाल खड़े किए हैं.  


 

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