
राजस्थान के जालोर की घटना से आहत होकर सोमवार को बारां के कांग्रेस विधायक पानाचंद मेघवाल ने अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. जानकारी के मुताबिक मेघवाल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपना इस्तीफा भेज दिया है. विधायक का कहना है कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी प्रदेश के दलित वंचित वर्ग पर हो रहे अत्याचार से व्यथित होकर मैंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने विधायक पद से त्याग पत्र भेजा है.
विधायक ने मुख्यमंत्री को भेजे इस्तीफा पत्र में लिखा है, "देश अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे कर रहा है. देश आजादी के अमृत महोत्सव को पूरे हर्षोल्लास से मना रहा है. मैं प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाए देता हूं, लेकिन आजादी के 75 साल बाद भी प्रदेश में दलित और वंचित वर्ग पर लगातार हो रहे अत्याचारों से मेरा मन काफी आहत है. मेरा समाज आज जिस प्रकार की यातनाएं झेल रहा है, उसका दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता."
'दलितों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं'
उन्होंने लिखा, "प्रदेश में दलित और वंचितों को मटकी से पानी पीने के नाम पर तो कहीं घोड़ी पर चढ़ने और मूंछ रखने पर घोर यातनाएं देकर मौत के घाट उतारा जा रहा है. जांच के नाम पर फाइलों को इधर से उधर घुमाकर न्यायिक प्रक्रिया को अटकाया जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों से दलितों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने संविधान में दलितों और वंचितों के लिए जिस समानता के अधिकार का प्रावधान किया था, उसकी रक्षा करने वाला कोई नहीं है. दलितों पर अत्याचार के ज्यादातर मामलों में एफआर लगा दी जाती है. कई बार ऐसे मामलों को मैनें विधानसभा में उठाया, उसके बावजूद भी पुलिस प्रशासन हरकत में नहीं आया."
'हमें पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं'
कांग्रेस विधायक पानाचंद मेघवाल ने अपने इस्तीफा पत्र में कहा, "जब हम हमारे समाज के अधिकारों की रक्षा करने एवं उन्हें न्याय दिलवाने में नाकाम होने लगें तो हमें पद पर रहने का कोई अधिकार नही है. अतः मैं मेरी अंतर आत्मा की आवाज पर विधायक पद से इस्तीफा देता हूं. विधायक पद से मेरा इस्तीफा स्वीकार करें. ताकि मैं बिना पद के ही समाज के वंचित और शोषित वर्ग की सेवा कर सकूं."
ये है पूरा मामला
20 जुलाई को राजस्थान के जालोर जिले के सुराणा गांव के एक प्राइवेट स्कूल के टीचर छैल सिंह ने छात्र को कान पर चांटा मार दिया था. वजह सिर्फ ये थी कि 9 साल के बच्चे ने स्कूल के मटके को पानी पीने के लिए छुआ था. पिटाई से बच्चे की कान की नस फट गई. पिता और अन्य परिवार वाले उसे हॉस्पिटल लेकर भागे. बागोड़ा, भीनमाल, डीसा, मेहसाणा, उदयपुर, अहमदाबाद भेजा गया. अहमदाबाद में शनिवार को शाम चार बजे के आसपास उपचार के दौरान बच्चे की मौत हो गई.