
केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के बढ़ते विरोध के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है. इस खत में राजस्थान सीएम ने पीएम मोदी से कृषि कानूनों पर फिर से विचार करने और किसानों से तत्काल बात करने की अपील की है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि केंद्र सरकार द्वारा इन तीनों बिलों को किसानों और विशेषज्ञों से चर्चा किये बिना ही लाया गया. संसद में विपक्षी पार्टियों ने इन बिलों को सिलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की थी लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया.
सीएम गहलोत ने खत में लिखा है कि इन अधिनियमों में न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र नहीं है, जिसके कारण किसानों में अविश्वास पैदा हुआ है. इन कानूनों के लागू होने से किसान सिर्फ प्राइवेट प्लेयर्स पर निर्भर हो जाएंगे. साथ ही प्राइवेट मंडियों के बनने से दीर्घ काल से चली आ रही कृषि मंडियों का अस्तित्व भी खत्म हो जायेगा. इसके कारण किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिलेगा.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में राजस्थान सरकार द्वारा कृषि कानूनों में किए संशोधनों के बारे में लिखा है. उन्होंने पत्र में किसान आंदोलन की तरफ प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए लिखा कि 26 नवंबर को देश जब संविधान दिवस मना रहा था तभी देश के अन्नदाता पर लाठियां और वॉटर कैनन चलाई जा रही थीं, जिससे कि किसान अपनी मांगें रखने दिल्ली ना पहुंच सकें. इसके लिये सड़कों को खोदा गया और अवरोधक भी लगाये गये.
देखें: आजतक LIVE TV
सीएम गहलोत ने आगे लिखा, 'केंद्र सरकार ने किसानों के विरोध प्रदर्शन के हक को छीनने की कोशिश की जो न्यायोचित नहीं है. किसानों ने अपने खून-पसीने से देश की धरती को सींचा है. केंद्र सरकार को उनकी मांगें सुनकर तुरंत समाधान करना चाहिए.'
पत्र में मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी से किसानों से बात करने और केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में जब जीडीपी विकास दर-7.5 प्रतिशत रही है तब भी कृषि क्षेत्र में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इस मुश्किल दौर में भी अर्थव्यवस्था में सकारात्मक योगदान दे रहे अन्नदाता को इस तरह का प्रतिफल नहीं देना चाहिये. इसलिए पीएम मोदी से हमारी मांग है कि किसानों के हित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिये वे इन कानूनों पर पुनर्विचार करें.