
राजस्थान में कोरोना की वजह से पंचायत चुनाव को स्थगित करना पड़ा था और अब जब कोरोना काल में पंचायत चुनाव हुए हैं तो वोट देने के पिछले सारे रिकॉर्ड लोगों ने तोड़ दिए.
कोरोना संक्रमण से पहले जनवरी में पंचायत चुनाव में 81.3 % वोटिंग हुई थी मगर कोरोना काल में 83.5% वोटिंग हुई है. कोरोना के समय में चुनाव कराने वाला राजस्थान पहला राज्य बन गया है. सोमवार को राज्य के 947 ग्राम पंचायतों में सरपंच और पंच पदों के लिए चुनाव कराए गए थे, और शाम को रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया है.
इस बार चुनाव में वोट डालने के लिए कोरोना वायरस की गाइडलाइन को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया था. मतदान केंद्रों पर पूरी तैयारी की गई थी. कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति को भी चुनाव लड़ने का अधिकार दिया गया था और कोरोना पीड़ित व्यक्ति को मतदान का भी अधिकार दिया गया था.
सबसे ज्यादा वोटिंग बाड़मेर की पंचायत समिति धोरीमन्ना की 2 ग्राम पंचायतों में हुई है. यहां पर 94.66 परसेंट वोटिंग हुई है. इसी तरह से सबसे कम वोटिंग जालौर की सायला पंचायत समिति के ग्राम पंचायत में हुई है जहां पर 66.18 पर्सेंट वोट डाले गए हैं.
इसके बाद अब 3 अक्टूबर, 6 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को राज्य के बाकी के ग्राम पंचायतों में चुनाव होंगे. उदयपुर की स्थगित हुई 55 ग्राम पंचायतों के चुनाव के शेड्यूल भी जारी किए जाएंगे. इसके बाद राज्य में पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव की घोषणा होगी. हालांकि इस पर सस्पेंस है क्योंकि राजस्थान सरकार ने एक बार फिर से पंचायत समिति व जिला परिषद के चुनाव को टालने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, क्योंकि यह दोनों चुनाव पार्टी सिंबल पर होते हैं.
हालांकि कोरोना काल में चुनाव कराना कम जोखिम भरा काम नहीं है. मतदान के दौरान प्रशासन ने कोरोना वायरस गाइडलाइंस का पालन तो करने के लिए लोगों को कहा था, लेकिन गांव में वोट डालने निकले लोगों के बीच ना तो सोशल डिस्टेंसिंग दिखी और ना ही कोई मास्क लगाए हुए दिख रहा था. हालांकि वोट डालने के समय मास्क पहनना अनिवार्य था. इसकी वजह से मतदान केंद्र के अंदर लोग मास्क पहन कर आ रहे थे.