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राजस्थान नगर निकाय चुनाव: कांग्रेस 36 सीट जीती, केवल 12 सीट ही जीत पाई भाजपा

राजस्थान राज्य प्रभारी और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह का कहना है कि पंचायती राज चुनाव में भाजपा की शानदार जीत की दिल्ली तक चर्चा है और भाजपा की जीत की राष्ट्रीय नेतृत्व भी प्रशंसा कर रहा है.

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों को विधानभा चुनावों के लिए परीक्षा माना जा रहा था. राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों को विधानभा चुनावों के लिए परीक्षा माना जा रहा था.
देव अंकुर
  • जयपुर,
  • 20 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:15 PM IST
  • बीजेपी के प्रदर्शन से राष्ट्रीय नेतृत्व उत्साहित
  • कांग्रेस ने किया इकतरफा क्लीन स्वीप
  • राजस्थान नगर निकाय चुनावों पर है सबकी नजर

रविवार के दिन राजस्थान नगर निकायों के चेयरपर्सन के चुनावों के परिणाम आ चुके हैं. जिनमें कांग्रेस ने एकतरफा क्लीन स्वीप किया है जबकि भाजपा को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा है. खबर लिखे जाने तक कुल 54 सीटों में से 12 जिलों की 50 सीटों पर परिणाम घोषित किए जा चुके हैं. इन 50 सीटों में से 36 सीटें कांग्रेस को मिली हैं जबकि मात्र 12 सीटें ही भाजपा को मिल पाई हैं. इनमें से 2 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के हिस्से आई हैं.

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इन 50 निकाय सीटों में 7 नगर परिषद और 43 नगरपालिका की सीटें हैं. नगर परिषद की 7 सीटों में से 5 सीटें कांग्रेस ने जीती हैं जबकि भाजपा केवल 1 सीट ही जीत पाई है जबकि 1 सीट निर्दलीय उम्मीदवार के हिस्स्से आई है. जिन 50 सीटों के परिणाम अभी तक आए हैं उनमें 28 पर पुरुष उम्मीदवार और 22 पर महिला उम्मीदवार जीती हैं. नगर निकाय के चुनावों को राजस्थान विधानसभा की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है. जिसमें कि कांग्रेस को इकतरफा जीत मिली है.

हालांकि चुनाव परिणामों से भाजपा भी कम खुश नहीं है. राजस्थान राज्य प्रभारी और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह का कहना है कि कांग्रेस के कुशासन से जनता परेशान है और अगर राजस्थान में आज चुनाव हो जाएं तो भाजपा तीन चौथाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगी. अरुण सिंह ने ये भी कहा कि पंचायती राज चुनाव में भाजपा की शानदार जीत की दिल्ली तक चर्चा है और भाजपा की जीत की राष्ट्रीय नेतृत्व भी प्रशंसा कर रहा है.''

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अरुण सिंह ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से परिवारवाद की पार्टी है. वर्तमान में सोनिया गांधी हैं, पहले राहुल गांधी थे, फिर सोनिया गांधी आ गईं और अब फिर राहुल गांधी आ जायेंगे. दूसरी तरफ भाजपा एक ऐसी पार्टी है, जो राष्ट्रवाद की विचारधारा को लेकर कार्य करती है."

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