
लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के बीच लगातार तनातनी की स्थिति बनी हुई है. दोनों के बीच विवाद की नई कड़ी उस समय जुड़ गई जब केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से यह दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल के मदरसों का आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि राज्य सरकार की ओर से तुरंत इस पर प्रतिक्रिया दी गई कि बंगाल सरकार को गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में कोई खत नहीं मिला. मंत्रालय राज्य की गलत तस्वीर पेश कर रहा है. एक नजर डालते हैं कि राज्य के मदरसों और मुसलमानों की स्थिति पर...
राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री गयासुद्दीन मुल्ला की ओर से कहा गया कि यह सही नहीं है. बंगाल में 614 मदरसा हैं, जो लेफ्ट सरकार के दौर से ही चल रहे हैं. पिछले कई सालों में राज्य में कोई नया मदरसा नहीं खुला है. हमारी सरकार ने एक भी नया मदरसा नहीं बनाया. हम उनकी किताबों इत्यादि से मदद कर रहे हैं, लेकिन जब उन्होंने इसका विरोध किया तो हमें वह भी रोकना पड़ा. गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक बर्धवान और मुर्शिदाबाद स्थित मदरसों का इस्तेमाल करके जमात मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) आतंकियों की भर्ती कर रहा है. मोदी सरकार ने जेएमबी को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल कर रखा है.
राज्य में 614 मदरसे
पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन की वेबसाइट के अनुसार बंगाल में इस समय 614 मान्यता प्राप्त मदरसा हैं. 102 मदरसा सीनियर मदरसा एजुकेशन सिस्टम के अंडर जबकि 512 मदरसा हाई मदरसा एजुकेशन सिस्टम के तहत चलते हैं. 614 में से 400 हाई मदरसा, 112 मदरसा जूनियर हाई मदरसा जबकि शेष 102 मदरसे सीनियर मदरसा के रूप में कार्यरत हैं. 66 मदरसे को फाजिल (10+2) से अपग्रेड कर सीनियर मदरसा कर दिया गया है. 210 मदरसा को अपग्रेड कर हाई मदरसे के रूप में कर दिया गया है. इसके अलावा 183 मदरसे में स्किल डेवलपमेंट के लिए वोकेशनल कोर्स चलाए जा रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में 1977 में जब पहली बार मार्क्सवादी सरकार बनी थी तब उन्होंने प्राइमरी स्तर पर अंग्रेजी को शिक्षा से हटा दिया था, लेकिन दो दशक बाद मार्क्सवादी सरकार ने ही अपना पुराना फैसला पलटते हुए फिर से अंग्रेजी को प्राइमरी स्तर पर लागू कर दिया.
बंगाल के मुस्लिम समाज के लोगों को मदरसा की शिक्षा दिलाने के मकसद से पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन (WEBME) की स्थापना 1927 में हुई थी. हालांकि 1994 तक इस बोर्ड को वैधानिक मान्यता हासिल नहीं थी, लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा ने विधेयक के जरिए बोर्ड को स्वायत्तशासी संस्था के रूप में मान्यता दे दी.
मदरसे में 3 हिंदू छात्राओं ने मचाया तहलका
मदरसे में पढ़ाई को लेकर कई बार सवाल उठते हैं कि यहां पर इस्लामीपरक शिक्षा दी जाती है, लेकिन खास बात यह है कि बर्धवान जिले के केतुग्राम स्थित अगोरडांगा हाई मदरसा में करीब 900 छात्र पढ़ते हैं जिसमें 60 फीसदी छात्र हिंदू हैं. इसके अलावा कई और मदरसे हैं जहां पर हिंदू छात्र पढ़ने के लिए जाते हैं. राज्य सरकार का कहना है कि सरकारी मदद से चलाए जा रहे मदरसों में करीब 25 फीसदी छात्र गैर-मुस्लिम हैं और 469 मदरसों में स्मार्ट क्लास चलाए जाते हैं.
12 मदरसों में अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा
अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री गयासुद्दीन मुल्ला के अनुसार, 12 मदरसों में अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दी जाती है. सरकारी मदरसों के अलावा राज्य में करीब 2,000 मदरसे निजी तौर पर भी चलते हैं, लेकिन सरकार उन पर नजर बनाए रखती है. 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की साक्षरता दर 76.26 फीसदी है.
4 मदरसों में मुसलमान से ज्यादा हिंदू
राज्य के कुल मदरसे की बात की जाए तो इस बार (2019) पश्चिम बंगाल हाई मदरसा सेकेंडरी एग्जाम में 12 फीसदी हिंदू छात्र शामिल हुए थे और इसमें पिछले साल की तुलना में 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. इस साल केतुग्राम में मदरसा बोर्ड एग्जाम में 62 हिंदू छात्रों ने हिस्सा लिया था जिसमें 45 लड़कियां थीं. 10 साल पहले 2009 में राज्य में 4 मदरसे ऐसे भी थे जहां पर मुसलमानों की तुलना में हिंदू छात्रों की संख्या ज्यादा थी. इन चारों मदरसों में पढ़ने वाले 57 फीसदी से लेकर 64 फीसदी तक छात्र थे.
गृह मंत्रालय की ओर से मदरसों का आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने के दावे के बीच राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री ने सभी मदरसा प्रमुखों के बैकग्राउंड और मदरसों में पढ़ाए जा रहे कंटेंट के बारे में जानकारी मांगी है. इस संबंध में 9 और 10 जुलाई को अहम बैठक होने वाली है. राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार मदरसा शिक्षा पर सलाना 250 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं. विभाग के पास 2019-20 के वित्त वर्ष में करीब 3,000 करोड़ रुपए का बजट है.
अमित शाह ने साधा निशाना
हालांकि मार्च में लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य की ममता सरकार पर शिक्षा के जरिए वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था, 'ममता दीदी के पास मदरसा के लिए 4 हजार करोड़ का बजट रखा गया है. हमें इस पर कोई दिक्कत नहीं हैं, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए 4 हजार करोड़ से कम की राशि रखी गई है.'
मुसलमानों के लिए बड़ा बजट
ममता सरकार मुसलमानों पर हमेशा से ही मेहरबान रही हैं. मुस्लिम समाज की बात आती है तो वह खजाना खोलने में देरी नहीं करतीं. ममता सरकार के कार्यकाल में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की जगह अल्पसंख्यकों और मदरसों के लिए बजट लगातार बढ़ता रहा है.
2018-19 के बजट में ममता सरकार ने उच्च शिक्षा के लिए 3,713 करोड़ आवंटित किया था जबकि इस साल 2019-20 में इसमें महज 6.74% की बढ़ोतरी करते हुए 3,964 करोड़ रुपए दिए. जबकि अल्पसंख्यकों और मदरसों के लिए पिछले वित्त वर्ष में 23 फीसदी का इजाफा करते हुए 3,258 करोड़ से बढ़ाकर 4,016 करोड़ आवंटित कर दिया.
राज्य में 25 फीसदी से ज्यादा मुसलमान
ममता बनर्जी सरकार पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उनकी सरकार राज्य में मुस्लिम समुदाय के प्रति बेहद उदारवादी रवैया अपनाती है और उनको प्रभावित करने के लिए राज्य का खजाना खोल देती है. साथ ही उनको बेशुमार सुविधाएं भी दी जाती हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल की आबादी 9.12 करोड़ (91,276,115 आबादी) थी जिसमें मुस्लिमों की संख्या करीब ढाई करोड़ (24,654,825) है और राज्य की कुल जनसंख्या का यह 27.01 फीसदी है.
2001 की जनगणना के अनुसार बंगाल की आबादी 25.2 फीसदी थी जिसमें 10 साल बाद 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. आजादी के बाद 1951 से लेकर अब तक 7 मतगणना में मुसलमानों की आबादी में बढ़ोतरी हुई है.
3 जिलों में मुसलमान बहुसंख्यक
ममता बनर्जी के राज्य पश्चिम बंगाल में जिला स्तर पर मुस्लिमों की आबादी पर नजर डालें तो 19 में से 3 जिले ऐसे हैं जहां पर ये बहुसंख्यक की स्थिति में हैं और वहां की आबादी 50 फीसदी या उससे ज्यादा की है. मुर्शिदाबाद (66.28%), मालदा (51.27%) और उत्तर दिनाजपुर (49.92%) में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं. इनके अलावा 7 जिले ऐसे हैं जहां पर मुसलमानों की आबादी 25 फीसदी और 49 फीसदी के बीच है.
ध्यान देने वाली बात है कि बंगाल के मदरसे में देश के अन्य मदरसों की तुलना में ज्यादा सुशिक्षित और आधुनिक तरीके से पढ़ाई कराई जाती है. यहां के मदरसों में आधुनिक विज्ञान और गणित की पढ़ाई बहुत पहले से ही शुरू की जा चुकी थी और आज 12 मदरसों में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी हो गया है. अमेरिका और पाकिस्तान से विशेषज्ञों का दल बंगाल के मदरसों में आए इस बदलाव का अध्ययन कर चुका है. लेकिन बदलते दौर में यहां के मदरसे जब आधुनिकता के साथ चलते हुए नौनिहालों का भविष्य संवारने में लगे हैं, ऐसे में आतंकी संगठनों की ओर से मदरसों का इस्तेमाल किए जाने की बात झटके जैसी है, राज्य सरकार और मदरसा बोर्ड को कोशिश करनी चाहिए कि राज्य के मदरसे की जो छवि है उस पर किसी तरह का कोई आंच न आने पाए.