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मुरली मनोहर जोशी की अगुआई वाली कमेटी ने सेना में युद्धक सामग्री की कमी पर उठाया सवाल

जहां तक रात्रि में देख सकने वाले उपकरणों का सवाल है तो रक्षा मंत्रालय की ओर से भारतीय सेना के बारे में दी गई जानकारी के मुताबिक इसकी उपलब्धता 70 से 80 फीसदी है. कमेटी को बताया गया कि C-130 एयरक्राफ्ट के लिए नाइट विजन चश्मों की आपूर्ति का कॉन्ट्रेक्ट 16 सितंबर 2016 को किया गया था.   

भारतीय सेना के जवान (फाइल फोटो) भारतीय सेना के जवान (फाइल फोटो)
मंजीत नेगी/देवांग दुबे गौतम/खुशदीप सहगल
  • नई दिल्ली,
  • 26 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 10:25 PM IST

बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली एस्टीमेट कमेटी ने सशस्त्र सेनाओं की तैयारी, रक्षा उत्पादन और खरीद से जुड़ी 29वीं रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दी. कमेटी ने सशस्त्र सेनाओं में युद्धक सामग्री की कमी को लेकर सवाल खड़ा किया है.

कमेटी के निरीक्षण के दौरान उसे रक्षा मंत्रालय की ओर से अवगत कराया गया कि समग्र तौर कमी नहीं है लेकिन 10-15 युद्धक सामग्री ऐसी हैं जहां कमी है. इनमें से कुछ को शीघ्र दूर किए जाना जरूरी है.    

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कमेटी ने पाया कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड्स, डिफेंस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) ने कुछ युद्धक हथियारों के निर्माण में दक्षता हासिल कर ली है लेकिन आयात किए जाने वाले हिस्से और सिस्टम अब भी चिंता का विषय हैं. जहां तक ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों की ओर से युद्धक सामग्री के उत्पादन की बात है तो कमेटी ने पाया कि भारी उपकरणों की रेंज में आयात पर निर्भरता काफी घटी है. टी-90 टैक को लेकर आयात पर निर्भरता 40 से 30% तक घट गई है. ये निरीक्षण के दौरान कमेटी को रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि ने अवगत कराया.

कमेटी की राय में आयात पर निर्भरता घटाने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना शेष है. कमेटी ने आवश्यकता जताई है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्डों के डिफेंस PSUs को अपनी निर्माण क्षमता बढ़ानी चाहिए. साथ ही सेनाओं में युद्धक सामग्री की कमी को दूर करने के लिए रेवेन्यू हेड के तहत पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाना चाहिए.  

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जहां तक रात्रि में देख सकने वाले उपकरणों का सवाल है तो रक्षा मंत्रालय की ओर से भारतीय सेना के बारे में दी गई जानकारी के मुताबिक इसकी उपलब्धता 70 से 80 फीसदी है. कमेटी को बताया गया कि C-130 एयरक्राफ्ट के लिए नाइट विजन चश्मों की आपूर्ति का कॉन्ट्रेक्ट 16 सितंबर 2016 को किया गया था.  

कमेटी ने पाया कि तीसरी जेनेरेशन के नाइट विजन उपकरण जैसे कि इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम EON-51 और स्टेब्लाइज्ड ऑप्ट्रोनिक पेडेस्टल्स (SOP) को नौसेना के पोतों पर फिट किया गया है. कमेटी ने सेना के ऑपरेशन में नाइट विजन उपकरणों के महत्व का संज्ञान लेते हुए जोर देकर कहा कि इनकी कमी को दूर करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए.

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