
जस्टिस लोया की मौत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निराश विपक्षी पार्टियां एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ लामबंद हो रही हैं. शुक्रवार को कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में कई विपक्षी पार्टियों के नेता मिलकर महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार करेंगे.
बता दें, जस्टिस लोया की मौत की नए सिरे से जांच कराने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दिया था. SC ने कहा था कि ऐसी जनहित याचिकाएं कोर्ट का समय बर्बाद करती हैं. फैसला देने वालों में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा भी शामिल थे.
इस फैसले से निराश होकर कांग्रेस पार्टी ने कहा था कि यह इतिहास का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण दिन है. इस फैसले के बाद भी जस्टिस लोया की मौत से जुड़े बहुत सारे सवालों का जवाब नहीं मिला.
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने का विपक्ष का प्रस्ताव नया नहीं है. पिछले कई महीनों से विपक्षी नेता इसको लेकर माथापच्ची कर रहे हैं. बजट सत्र के दौरान कई पार्टी के विपक्षी नेताओं ने एकजुट होकर करीब 60 से अधिक सांसदों के दस्तखत भी जुटाए थे, लेकिन उसके बाद फिर से यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया था.
दरअसल विपक्षी पार्टियां जस्टिस दीपक मिश्रा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाना तो चाहती हैं. लेकिन यह तय नहीं हो पा रहा है कि इसकी अगुवाई कौन सी पार्टी करे. कांग्रेस पार्टी के भीतर ही इस बात को लेकर मतभेद हैं कि चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना ठीक रहेगा या नहीं. लेकिन गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे नेता लगातार इस बात की पैरवी करते रहे हैं.
चीफ जस्टिस को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया काफी लंबी और कई चरणों में है और दोनों सदनों में बीजेपी के संख्याबल की वजह से इसका पास हो पाना आसान नहीं है. इसका विरोध करने वाले नेताओं का भी यही तर्क है कि महाभियोग प्रस्ताव पास होना बेहद मुश्किल है. अगर ये प्रस्ताव पास नहीं हुआ तो किरकिरी भी होगी. ऐसे में इसे लाने की जरूरत नहीं है.
चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस कर उठाया था मुद्दा
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायमूर्तियों ने मुख्य न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के खिलाफ बगावत करते हुए पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी. इस दौरान इन न्यायमूर्तियों ने खुले तौर पर जज लोया के केस की सुनवाई को लेकर आपत्ति उठाई थी. इन न्यायमूर्तियों की ये भी शिकायत है कि मुख्य न्यायमूर्ति सभी अहम मुकदमें खुद ही सुन लेते हैं यानी मास्टर ऑफ रोस्टर होने का फायदा उठाते हैं.