
साल 2007 में हुए समझौता ब्लास्ट केस में सुनवाई एक बार फिर टल गई है. दरअसल पंचकूला बार एसोसिएशन की स्ट्राइक के चलते दोनों पक्षों के वकीलों की कोर्ट में एंट्री नहीं हो पाई. लिहाजा अब अदालत ने सुनवाई के लिए 18 मार्च का दिन तय किया है. अब अगले सोमवार को यह तय होगा कि अदालत पाकिस्तानी लड़की राहिला की अर्जी को मुकदमे की कार्रवाई में शामिल करेगी या फिर पहले की सुनवाई के आधार पर ही फैसला सुनाएगी.
12 साल पुराने समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में 11 मार्च को फैसला ऐन वक्त पर रुक गया था जब पाकिस्तान की एक पीड़िता, राहिला वकील ने गवाही का मौका देने की मांग करने वाली लगा दी थी. आखिरी पलों में राहिला वकील ने अपने एडवोकेट मोमिन मलिक के जरिए अदालत में यह अर्जी दाखिल की थी.
इसमें अदालत ने 14 मार्च की तारीख तय की थी ताकि इस अर्जी पर विचार किया जा सके. अदालत को अभी यह तय करना है कि अर्जी को सुनवाई का हिस्सा बनाया जाए या नहीं. आज दोनों पक्षों के वकील अदालत में पहुंचे लेकिन पंचकूला बार एसोसिएशन में वकीलों की स्ट्राइक थी इसके चलते दोनों पक्षों के वकीलों की एनआईए कोर्ट में एंट्री नहीं हो पाई. अब अदालत ने इस मामले में राहिला वकील की अर्जी पर सुनवाई के लिए 18 मार्च की तारीख तय की है.
दूसरी तरफ राहिला वकील के एक दस्तावेज पर दस्तखत को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं. हालांकि राहिला वकील के एडवोकेट मोमिन मलिक ने कहा है कि उन्हें ईमेल के जरिए राहिला वकील की अर्जी मिली है और वह पिछले 10 साल से दूसरे केसों में राहिला वकील के एडवोकेट हैं. ऐसे में उन्हें अपनी मुवक्किल की तरफ से पैरवी करने का पूरा अधिकार है.
बता दें कि 18 फरवरी 2007 को हुए समझौता एक्सप्रेस धमाके में 68 लोगों की जान गई थी. मरने वाले में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे. घटना के ढाई साल बाद केस को राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया था और तब से मामले कि सुनवाई एनआईए कोर्ट में चल रही है.