
अमित मालवीय ने मनीष तिवारी के खत को दिखाते हुए आरोप लगाया कि मनीष तिवारी का फेसबुक को पत्र एक पेंडोरा बॉक्स खोलता है. मनीष ने 18 अगस्त को फेसबुक मैंनेजमेंट को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि फेसबुक मैनेजमेंट संयुक्त राज्य अमेरिका में उनके वरिष्ठ नीति सलाहकार भरत गोपालस्वामी के संपर्क में आ सकता है.
अमेरिका के लॉबिस्टों में रुचि किसकी
उन्होंने आगे कहा कि यह कई आधारों पर एक गंभीर रहस्योद्घाटन करता है. क्या भारतीय सांसद अमेरिका में लॉबिस्टों को सलाहकार के रूप में रख सकते हैं? अमेरिका के इन लॉबिस्टों में रुचि किसकी है, जब वे कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी को सलाह देते हैं?
अमित मालवीय ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा कि भरत गोपालस्वामी ने अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया केंद्र के निदेशक के रूप में काम किया, जहां मनीष तिवारी ने भी काम किया. दिलचस्प बात यह है कि यह वही अटलांटिक काउंसिल है जो राजनीतिक प्रोपेगैंडा से निपटने में फेसबुक के प्रयासों को नियंत्रित और मार्गदर्शन करती है.
अमित मालवीय के आरोपों का जोरदार अंदाज में जवाब देते हए मनीष तिवारी ने कहा कि फेसबुक में किसने अमित मालवीय को यह पत्र दिया, जबकि यह औपचारिक रूप से फेसबुक द्वारा स्वीकार किया जा रहा है. डॉक्टर भरत गोपालस्वामी अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया केंद्र के निदेशक थे. वह एक भारतीय हैं. वह मुझे नीतिगत मुद्दों पर PRO-BONO की सलाह देते हैं. मुझे आश्चर्य है कि अमित मालवीय जो एक ऐसी पार्टी से आते हैं, जो टॉम-टॉम के एनआरआई के कार्यक्रम का आयोजन कराती है.
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मनीष तिवारी ने एक के बाद एक करके कई ट्वीट किए. उन्होंने सवाल उठाया कि पहले उन्हें इस बात का उत्तर देना चाहिए कि फेसबुक मैनेजमेंट में कौन है जिन्होंने मेरा ई-मेल उनको दिया जो उनके सीनियर मैनेजमेंट को भेजे गए थे.
उन्होंने कहा कि यह भी ध्यान देने योग्य है कि मैंने श्री आनंदपुर साहिब से पूर्व सांसद और सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में पत्र लिखा था, जैसा कि पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है. फेसबुक से पूछे गए ठोस सवालों के जवाब के बजाए ऐसा लगता है कि वहां अमित मालवीय को तैनात किया गया है.
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अमित मालवीय के आरोपों पर सफाई देते हुए मनीष ने कहा कि यह भी ध्यान देना होगा कि डॉक्टर भरत गोपालस्वामी ने 31 जुलाई 2019 को अटलांटिक काउंसिल के दक्षिण एशिया केंद्र के निदेशक के रूप में कदम रखा था. उनका अटलांटिक परिषद के साथ कोई संबंध नहीं है और न ही मेरा. वह अब एक निजी नागरिक हैं.
उन्होंने कहा कि बीजेपी और फेसबुक दोनों की प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि WSJ की रिपोर्ट ने संभवत: कृमियों की कैन खोल दी है. फेसबुक पर कर्मचारी गंभीर सवाल पूछ रहे हैं कि क्यों नफरत फैलाने वाले नियम फेसबुक की ओर से सरकारी संबंधों और व्यापार के हितों को देखते हुए क्यों नरम कर दिए गए थे.