
सीमा पर साजो-सामान की ढुलाई और गश्त जैसे महत्वपूर्ण कामों में जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले पशुओं को विशेष पदक से सम्मानित किया जाएगा.
चीन-भारत सीमा पर पहरा दे रहे आईटीबीपी ने यह पहल की है जिसने 'एनिमल ट्रांसपोर्ट' और 'के9' पदक की शुरूआत की है और इनके लिए अपने घोड़े 'थंडरबोल्ट' और मादा श्वान 'सोफिया' को चुना है. इन्हें पहली बार बल के आगामी 55वें वार्षिक समारोहों के दौरान सम्मानित किया जाएगा.
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) बल को देश में नक्सल-रोधी अभियानों के लिए और पैदल गश्त जैसे अन्य कठिन कार्यों के लिए पहली बार बेल्जियम मालीनोइस नस्ल के कुत्तों को शामिल करने का श्रेय जाता है. वहीं बल के पास परंपरागत रूप से घोड़ों, खच्चरों और टट्टुओं की एक मजबूत पशु परिवहन इकाई है जो 3,488 किलोमीटर लंबी चीन सीमा पर अत्यंत ऊंचे इलाकों पर पहरा दे रहे जवानों की मदद करती है.
जवानों के कंधे से कंधा मिलाते पशु
पहली बार किसी सुरक्षा बल ने इस संबंध में विशेष पदक बनाने का ऑर्डर दिया है. इससे पहले तक इन चौपाये पहरियों के उत्कृष्ट कार्यों को बल प्रमुख या अन्य अधिकारियों द्वारा नियमित प्रशस्ति पत्र जारी करके सम्मानित किया जाता था. आईटीबीपी ने इन पशुओं के उत्कृष्ट सहयोग और वफादारी को सम्मानित करना शुरू किया है जो आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में किसी भी अभियान या कार्य में वर्दी पहने जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं.
'पदकों से सम्मानित करने की शुरूआत यह संदेश देने का विशेष तरीका है कि आइटीबीपी उनकी निष्ठापूर्ण सेवाओं के लिए उनके आभारी हैं.' उन्होंने कहा कि इस बाबत धातु के पदक तैयार किए गए हैं.
हाल ही में आईटीबीपी के महानिदेशक कृष्ण चौधरी ने इन विशेष पदकों की मंजूरी दी थी जो स्वयं सोफिया और थंडरबोल्ट के गले में ये पदक डालकर उन्हें सम्मानित करेंगे. ग्रेटर नोएडा में आयोजित बल के वार्षिक समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा जिससे पहले एक भव्य परेड भी होगी. सोफिया फिलहाल नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में तैनात है वहीं थंडरबोल्ट चंडीगढ़ के पास भानु में आईटीबीपी के केंद्र में प्रशिक्षण कार्य में शामिल है.