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भारत में कितने अवैध अप्रवासी रह रहे हैं? RTI जवाब में बस 'ढूंढते ही रह जाओगे'

अब जिस तरह से आरटीआई याचिकाओं को डील किया जा रहा है, उसमें सरकारी विभाग की ओर से लंबे-चौड़े जवाब तो दिए जाते हैं लेकिन जो सवाल पूछे गए होते हैं, उनके बारे में कोई सीधा तथ्य जानना सीप से मोती निकालने से कम मुश्किल नहीं होता.

अवैध अप्रवासी पर RTI जवाब (फाइल फोटो) अवैध अप्रवासी पर RTI जवाब (फाइल फोटो)
अशोक उपाध्याय
  • नई दिल्ली,
  • 17 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 12:25 PM IST

  • MHA के 'फॉरनर्स डिविजन' के पास अवैध अप्रवासियों के आंकड़े नहीं
  • कई विभागों में RTI याचिका घूमने के बाद भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला

देश में सूचना का अधिकार (RTI) कानून इसलिए लाया गया कि नागरिकों के लिए सरकारी विभागों की जवाबदेही तय की जाए. इस कानून ने नागरिकों को अधिकार दिया कि वे आरटीआई याचिका दाखिल कर अपने सवालों से जुड़ी सूचना संबंधित विभाग से हासिल कर सकें.

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लेकिन अब जिस तरह से आरटीआई याचिकाओं को डील किया जा रहा है, उसमें सरकारी विभाग की ओर से लंबे-चौड़े जवाब तो दिए जाते हैं, लेकिन जो सवाल पूछे गए होते हैं, उनके बारे में कोई सीधा तथ्य जानना सीप से मोती निकालने से कम मुश्किल नहीं होता.

इंडिया टुडे ने RTI से मांगी जानकारी

नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के विरोध को लेकर बीते कुछ दिनों से भारत में कई जगहों पर प्रदर्शनों की बाढ़ सी आई हुई है. केंद्र सरकार की ओर से देश भर में 'नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस' (NRC) लाने के ऐलान को लेकर भी लोगों के जेहन में कई तरह के सवाल हैं. CAA और NRC दोनों ही उन लोगों से संबंधित हैं, जो विभिन्न कारणों से अवैध तौर पर भारत में आए. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐसे लोगों को दो तरह से श्रेणीबद्ध किया. या तो वो 'घुसपैठिए' हैं या 'शरणार्थी' हैं.  

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ऐसे में ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि भारत में ऐसे लोगों की कितनी संख्या है जो यहां अवैध रूप से रह रहे हैं. इस सवाल का जवाब जानने के लिए इंडिया टुडे ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत गृह मंत्रालय को याचिका भेजी.

गृह मंत्रालय के विदेशी लोग प्रभाग ने ये लंबा चौड़ा जवाब दिया. इसमें कहा गया, 'अवैध अप्रवासियों की पहचान और प्रत्यर्पण सतत प्रक्रिया है. ऐसे अवैध अप्रवासियों को लेकर 'द फॉरनर्स एक्ट, 1946' की धारा 3 (2)(c) के तहत केंद्र सरकार को अवैध विदेशी नागरिकों को प्रत्यर्पित करने का अधिकार है. ऐसा ही प्रावधान द पासपोर्ट (भारत में एंट्री) एक्ट, 1920 में है. अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिक को बलपूर्वक हटाने का अधिकार सभी राज्यों को भारतीय संविधान का अनुच्छेद 258 (1) देता है.

इसी तरह संविधान का अनुच्छेद 239 (1) सभी केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसी स्थिति में इन शक्तियों को लेकर भारत सरकार जैसे कामकाज का निर्देश देता है. ऐसे में राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासकों के पास अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान करने, हिरासत में लेने और प्रत्यर्पित करने के पूरे अधिकार हैं.

जवाब पूछे गए सवाल से मेल नहीं खाता

ये जवाब आधिकारिक निरर्थक कवायद की मिसाल है. इसमें एक भी ऐसा तथ्य नहीं जो आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल से कोई मेल खाता हो. अवैध प्रवासियों की संख्या के बारे में कहीं कुछ नहीं कहा गया ना ही उनके मूल देश के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई और ना ही ये बताया गया अगर देश में कोई उन तक पहुंचना चाहे तो कहां जाए.

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याचिका में हमने गृह मंत्रालय के विदेशी लोग प्रभाग से ये भी सवाल किया कि बीते 20 साल में कितने अवैध अप्रवासियों की पहचान की गई. ये आग्रह भी किया गया कि प्रत्येक वर्ष के हिसाब से आंकड़ें उपलब्ध कराए जाएं और ये भी बताया जाए कि वो इस वक्त देश में कहां रह रहे हैं और उनका मूल देश कौन सा है जहां उन्हें प्रत्यर्पित किया जाना है?

गृह मंत्रालय ने इस पर जवाब दिया- मांगी गई जानकारी का ब्योरा केंद्र के स्तर पर नहीं रखा गया है. इसके लिए आप राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों से संपर्क कर सकते हैं. आरटीआई याचिका को आरटीआई एक्ट के सेक्शन 6 (3) के तहत 'ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन' (बिंदू 1 और 2 के संदर्भ में) और विदेश मंत्रालय (सिर्फ बिंदू 2 के संदर्भ में) को उपलब्ध जानकारी देने के लिए ट्रांसफर किया जा रहा है.  

इससे साफ है कि गृह मंत्रालय के विदेशी लोग विभाग के पास या तो अवैध विदेशी लोगों और/या उनके प्रत्यर्पण के बारे में कोई आंकड़े उपलब्ध नहीं है या गृह मंत्रालय इसकी जानकारी देश की जनता को देना नहीं चाहता.   

विज्ञापन की टैगलाइन- 'ढूंढते रह जाओगे'

विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा, 'मांगी गई जानकारी विदेश मंत्रालय के CPV प्रभाग के पास उपलब्ध नहीं है. हालांकि, आपकी आरटीआई याचिका आरटीआई एक्ट, 2005 के अनुच्छेद 6(3)(ii) के तहत गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ इमिग्रशन को भेज दी गई है. आगे की जानकारी के लिए आप वहां पत्राचार कर सकते हैं.'

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गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन से हमें ये जवाब मिला कि आरटीआई एक्ट के चैप्टर VI, सेक्शन 24 (1) और दूसरे शेड्यूल के तहत 'ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन' को इस मुद्दे पर जानकारी/ब्योरा उपलब्ध कराने से छूट हासिल है. सरकार के तीन विभागों के जवाब पढ़ने के बाद जेहन में जो आता है वो है बस एक विज्ञापन की टैगलाइन- 'ढूंढते रह जाओगे.'

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