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भारत ने खालीस्तान समर्थित सिख फॉर जस्टिस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह संगठन सिखों के लिए अलग देश की मांग करता है. गृह मंत्रालय ने अलगाववाद एजेंडे को बढ़ावा देने पर इस संगठन को बैन कर दिया है. अप्रैल 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार ने अनुरोध पर पाकिस्तान भी इस संगठन पर बैन लगा चुका है.
इससे पहले कई बार ISI द्वारा इस संगठन के सहारे पंजाब में आंतरिक शांति को भड़काने की कोशिश को अंजाम दिया जा चुका है. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि है कि अलगाववाद और आतंकवाद को भारतीय जमीन पर पनपने नहीं दिया जाएगा. सरकार ने साफ कर दिया है किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधियों को सहा नहीं जाएगा. चाहे अलगाववाद की मांग देश में हो या विदेश में, किसी भी संगठन को बख्शा नहीं जाएगा.
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि सिख फॉर जस्टिस जैसे गैरकानूनी संगठन को बैन करके भारत ने आईएसई के इशारे पर काम करने वाले भारत द्रोहियों और अलगाववादियों के खिलाफ अपनी मंशा साफ कर दी है.
सुरक्षा एजेंसियों की लंबे समय से खालिस्तान ग्रुप सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की गतिविधियों पर नजर रही है. इस संगठन ने ही कथित तौर पर खालिस्तान जनमत संग्रह में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों को मुफ्त हवाई टिकट दे रहा था.
सिख फार जस्टिस संगठन को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी करार दिया है. न्यू यार्क स्थित सिख फार जस्टिस संगठन अवैध तरीके से अपनी गतिविधियां चला रहा है जिससे पंजाब में हालात बिगड़ रहे हैं.
गुरपतवंत सिंह पन्नू और परमजीत सिंह इस संगठन के प्रमुख लोग हैं जो अपनी गतिविधियां चला रहे हैं. यह फैसला सरकार ने कई सिख संगठनों की राय के बाद लिया है.
सिख फार जस्टिस की प्रमुख गतिविधियां
यह संगठन पिछले तीन साल से सक्रिय है, और दावा करता है कि इसके दो लाख आनलाइन सपोर्टर हैं. लेकिन सरकार को जानकारी है कि 8-10 इसके मुख्य कार्यकर्ता हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है.
इस संगठन की सारी जिम्मेदारी हरदीप सिंह निजर और परमजीत सिंह पम्मा न्यूयॉर्क में रहकर इस संगठन को चलाते हैं. इस संगठन की गतिविधियां वहां ज्यादा हैं, जहां सिख आबादी ज्यादा है. सरकार को ये जानकारी मिली है कि इस संगठन ने पुलवामा हमले को आतंकी घटना नहीं कहा था.
इन देशों में सक्रिय है यह संगठन
यह संगठन यूके, यूएसए, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सक्रिय है. इन देशों में इस संगठन की गतिविधियां सबसे ज्यादा हैं. करतारपुर कारीडोर के जरिए ये संगठन अपनी गतिविधियां चलाने की कोशिश कर रहा था.
इस संगठन के अहम कार्यकर्ता परमजीत सिंह पम्पा को 30 जून को हुए भारत-इंग्लैंड मैच के दौरान देखा गया था. परमजीत सिंह ने खालिस्तान समर्थन में एक टीशर्ट पहने नजर आया था. सरकार के मुताबिक इस संगठन ने रेफरेंडम20-20 के जरिए पाकिस्तान से मदद मांगी थी.