
अबु बकर अल बगदादी के सीरिया में अमेरिकी कमांडो कार्रवाई में मारे जाने के बाद आतंकी संगठन ISIS ने अपना बेस अफगानिस्तान में शिफ्ट कर लिया है. ये दावा ईरान के विदेश मंत्री जावेद जारिफ ने किया है.
जारिफ ने इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा, 'ISIS भारत, पाकिस्तान, रूस यहां तक की चीन के लिए भी ख़तरा है. उसके खिलाफ सब देशों को एकजुट होना चाहिए. ISIS का सीरिया और इराक से अपना बेस अफगानिस्तान शिफ्ट करना ईरान और मध्य एशिया के लिए भी चुनौती है. अब हम सुनते हैं कि ISIS अफगानिस्तान से ही ताजिकिस्तान और उज़बेकिस्तान में ऑपरेशन चला रहा है. ये गंभीर घटनाक्रम है. हम लगातार भारत में अपने दोस्तों के साथ संपर्क में हैं. इसी तरह हम पाकिस्तान, रूस और चीन तक के संपर्क में हैं.'
उन्होंने आगे कहा, 'ये एक ऐसा मुद्दा है जो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए हम सब को जोड़ सकता है. अमेरिका हमारे बचाव के लिए आगे नहीं आएगा. हमें अपनी मदद खुद करनी होगी.' ईरान हमेशा आतंकी संगठन ISIS (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) के खिलाफ रहा है. ISIS को अरबी में 'दाएश' के नाम से जाना जाता है.'
भारतीय एजेंसियां मानती है कि अफगानिस्तान के ‘चुनींदा क्षेत्र’ 2016 से ही भारत के रडार पर हैं. दरअसल, केरल के 21 युवा 2016 में ISIS में शामिल होने के लिए अपने घरों से लापता हुए. इनमें 17 कासरगोड और 4 पलक्कड जिले के रहने वाले थे. बाद में इन युवकों में से कम से कम 3 या 4 आतंक विरोधी स्ट्राइक्स में मारे गए.
बता दें कि भारत से ISIS में शामिल होने के इरादे से अफगानिस्तान या इराक पहुंचने के लिए युवक ईरान के रास्ते का इस्तेमाल करते रहे हैं. ये स्थिति ISIS पर ईरान के कड़े रुख के बावजूद है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इसके पीछे के नापाक खेल को बेनकाब किया. करीब दो दर्जन संदिग्ध ISIS ऑपरेटिव्स, जिनमें से अधिकांश केरल से थे, उन्होंने भारतीय एजेंसियों को गच्चा देने के लिए ईरान के रास्ते का इस्तेमाल किया.
इंडिया टुडे ने इस संबंध में वायनाड जिले के कालपेट्टा में रहने वाले नशीदुल हमजाफर के रूट को ट्रैक किया. नशीदुल पहला संदिग्ध था जिसे अफगानिस्तान से बीते साल भारत डिपोर्ट किया गया.
सितंबर-अक्टूबर 2017 में कभी नशीदुल वायनाड से ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचा. 13 अक्टूबर 2017 को वो अपने सहयोगी हबीब के साथ मस्कट इंटरनेशनल एयरपोर्ट से तेहरान के लिए एमिरेट्स की फ्लाइट से रवाना हुआ. नशीदुल ने हबीब के पासपोर्ट के जरिए एयरपोर्ट पर ईरानी सिमकार्ड लिया. फिर उसने इमाम खोमेनी स्ट्रीट पर कमरा लिया. वहां वो अपने ISIS कॉन्टेक्ट पर्सन के निर्देश का इंतज़ार करने लगा. क्रिप्टिक मैसेजिंग एप ‘टेलीग्राम’ पर निर्देश आया कि वो अफगानिस्तान के वीज़ा के लिए अफगानिस्तान दूतावास जाए.
सूत्रों ने बताया कि नशीदुल और हबीब फिर अफगान दूतावास गए, जहां उनका इंटरव्यू हुआ. उन्हें तीन दिन बाद दूतावास आऩे के लिए कहा गया. उन्हें कहा गया कि वीज़ा भारतीय दूतावास से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ मिलने के बाद प्रोसेस कर दिया जाएगा.
पकड़े जाने के डर से नशीदुल और हबीब भारतीय दूतावास नहीं गए. नशीदुल आईएस ऑपरेटिव बनने के लिए अड़ा था लेकिन उसका सहयोगी हबीब अपने पिता से संपर्क करने के बाद केरल घर लौटने के लिए रवाना हो गया.
नशीदुल फिर 450 किलोमीटर टैक्सी पर सफर कर ईरान के शहर इसफाहन पहुंचा. सूत्रों के मुताबिक नशीदुल ने भारत में पूछताछ करने वालों को बताया कि छह घंटे के थकाने वाले इस टैक्सी के सफर के लिए उसने 100 डॉलर दिए. इसफाहन में ही नशीदुल से मिलने ISIS का कान्टेक्स पर्सन देर रात पहुंचा. उसने नशीदुल के सामान की तलाशी ली और उसका लैपटॉप, आईफोन और पासपोर्ट ले लिया. आईफोन देने पर नशीदुल ने एतराज जताया तो उससे कहा गया कि अफगानिस्तान पहुंचने पर उसकी चीजें वापस दे दी जाएंगी.
इसके बाद गाइड ने नशीदुल से 450 अमेरिकी डॉलर (करीब 32000 भारतीय रुपए) अफगानिस्तान में आईएसआईएस के क्षेत्र पहुंचाने की फीस के तौर पर वसूले. इसके बाद नशीदुल को अफगानिस्तान में डिपोर्टेशन कैम्प में छोड़ दिया गया.
नशीदुल के मुताबिक उसने अगले दिन कैम्प में लंबी कतार देखी. नशीदुल ने वहां अपनी पहचान और पता के बारे में झूठ बोला. एनआईए सूत्रों के मुताबिक नशीदुल ने वहां अपना नाम और पता ‘XXXXX पुत्र मुहम्मद, रिहाइश नूरिस्तान, अफगानिस्तान’ बताया. ऐसा करने को ईरान में उसके गाइड ने कहा था. नशीदुल के मुताबिक वहां उसका बायोमीट्रिक्स लिया गया. संदेह होने पर नशीदुल को एक दूसरे कैम्प में ले जाया गया. वहां उसे पाकिस्तानी होने के संदेह में उस वाहन पर चढ़ा दिया गया, जिसमें पाकिस्तान डिपोर्ट किए जाने वाले लोग सवार थे. नशीदुल ने वाहन में एक अधिकारी से आग्रह किया कि वो अफगान नागरिक है, उसे पाकिस्तान नहीं भेजा जाए. इस पर नशीदुल को वापस अफगान कैम्प भेज दिया गया.
हैरानी की बात है कि नशीदुल को अफगान एजेंसियों ने छोड़ दिया और उसने एक साल अफगानिस्तान में बिताया. हालांकि बाद में अफगान और अमेरिकी इंटेलीजेंस एजेंसियों ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की. जब ये साफ हो गया कि नशीदुल आईएस में शामिल होने के लिए भारत से आया था तो उसका भारत प्रत्यर्पण कर दिया गया.
नशीदुल अकेला नहीं जो ईरान के रास्ते अफगानिस्तान पहुंचा. 2016 से 2018 के बीच कई युवकों ने इसी रूट को पकड़ कर गच्चा देने की कोशिश की.
सूत्रों ने बताया कि ईरान भारत का मित्र देश है और जब भी म्युचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) जैसे कानूनी पेंच आए तो उसने भारत का सहयोग किया. अब ईरान के विदेश मंत्री ने ही ISIS का बेस अफगानिस्तान शिफ्ट होने पर भारत समेत कई देशों के लिए खतरा जताया है. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि भारतीय एजेंसियां इस घटनाक्रम को लेकर पूरी तरह चौकस हैं.