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केरल गोल्ड स्मगलिंग के मामले में जांच एजेंसी एनआईए को बड़ी साजिश नजर आ रही है. इस वजह से एनआईए दो सदस्यीय टीम यूएई भेज रही है. एनआईए सूत्रों के मुताबिक इस मामले में देश-विदेश में बड़े पदों पर बैठे कई लोग शामिल हो सकते हैं.
एनआईए सूत्रों का कहना है कि गोल्ड स्मगलिंग का रैकेट पहले ही भारी मात्रा में मिडिल ईस्ट से सोने की तस्करी कर चुका है और कई लोगों को ये सोना बेचा जा चुका है. एनआईए को इस बात का भी शक है कि गोल्ड स्मगलिंग का पैसा टेरर फाइनेंसिंग में भी प्रयोग हो सकता है. जिसके लिए यूएई लिंक और यहां की लार्जर कॉन्सपिरेसी को जानना आवश्यक हो जाता है.
इससे पहले तीन जुलाई को एनआईए ने दो और आरोपितों को गोल्ड स्मगलिंग से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है. एनआईए से मिली जानकारी के मुताबिक उस वक्त केरल के मलप्पुरम निवासी शर्राफुदीन (38) और पलक्कड़ जिला निवासी शफीक (31) को गिरफ्तार किया गया था.
12 लोग गिरफ्तार
दोनों पर तिरुअनंतपुरम स्थित संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) महावाणिज्य दूतावास के एक राजनयिक के नाम पर सोना तस्करी के मामले में षड्यंत्र रचने और तस्करी के सोने को दूसरे षड्यंत्रकारियों तक पहुंचाने का आरोप है. रमीस केटी ने पूछताछ के दौरान शर्राफुदीन और शफीक के इस षड्यंत्र में शामिल होने की बात कबूल की थी. उसने बताया था कि वह संदीप नैयर से तस्करी का सोना उठाने में दोनों की मदद करता था. इस मामले में एनआईए ने अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया है.
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एनआईए सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सरगना कोई और है, जिसकी गहन जांच करनी जरूरी है. इसलिए एनआईए की टीम शनिवार को दुबई जा रही है. एनआईए सूत्रों के मुताबिक क्योंकि ये सोना यूएई से आया है, इसलिए वहां पर विस्तृत जांच के बाद ये पता चल सकेगा कि इस गोल्ड का यूएई के अलावा दूसरे देशों से क्या कनेक्शन है.
सोने की तस्करी
बता दें कि केरल में कस्टम विभाग ने तिरुअनंतपुरम हवाईअड्डे पर 5 जुलाई को करीब 30 किलोग्राम सोने की तस्करी का पर्दाफाश किया था. उसके बाद एनआईए ने कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था. केस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी का है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से जुड़ा हुआ है. ऐसे में तस्करी के जरिए टेरर फंडिंग होने का भी शक है.