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BJP ने 'बल्लेबाज' आकाश विजयवर्गीय को दिया नोटिस, मोदी ने जताई थी नाराजगी

नगर निगम के कर्मचारी को बैट से पीटने वाले विधायक आकाश विजयवर्गीय को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नोटिस जारी किया है. आकाश को नोटिस बीजेपी अनुशासन समिति ने जारी किया है. पीएम मोदी ने मंगलवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में आकाश विजयवर्गीय को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था कि किसी का बेटा हो, पार्टी से निकाल देना चाहिए.

बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय (Courtesy- Facebook) बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय (Courtesy- Facebook)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 5:38 PM IST

नगर निगम के कर्मचारी को बैट से पीटने वाले विधायक आकाश विजयवर्गीय को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नोटिस जारी किया है. आकाश को नोटिस बीजेपी अनुशासन समिति ने जारी किया है. पीएम मोदी ने मंगलवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में आकाश विजयवर्गीय को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था कि किसी का बेटा हो, पार्टी से निकाल देना चाहिए. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने आकाश विजयवर्गीय का नाम नहीं लिया था.

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इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने बताया कि पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को लेकर प्रधानमंत्री मोदी  बेहद नाराज हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यवहार को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है. फिर चाहे वह किसी का बेटा हो या सांसद हो. ऐसे लोग पार्टी में नहीं होने चाहिए. किसी में अहंकार नहीं होना चाहिए और ठीक से व्यवहार करना चाहिए.'

आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने इंदौर के नगर निगम अधिकारी को बल्ला से पीटा था. इसके बाद मामले में आकाश विजयवर्गीय को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि कोर्ट से रिहा होने के बाद आकाश विजयवर्गीय ने कहा था कि उनको अपने किए का कोई पश्चाताप नहीं है. जो किया वो सब सोच समझकर किया.

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वहीं, इस संबंध में बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, 'यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मुझको लगता है कि आकाश विजयवर्गीय और नगर निगम के कमिश्नर दोनों कच्चे खिलाड़ी हैं. यह इतना बड़ा मुद्दा भी नहीं था, लेकिन इसको जानबूझकर बड़ा बना दिया गया है.' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों में अहंकार नहीं होना चाहिए और उनको जनप्रतिनिधियों से बात करनी चाहिए. इस मामले में इसका अभाव देखने को मिला. ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए दोनों को समझना चाहिए.

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