
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के शुक्रवार को हनुमानगढ़ी मंदिर के दर्शन के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है. तमाम पार्टियां उनके मंदिर जाने के अलग-अलग मतलब निकाल रही हैं. उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनजर राहुल चार दिनों से यूपी में घूम घूमकर कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे हैं. राहुल हनुमानगढ़ी मंदिर जाने को लेकर साध्वी निरंजन ज्योति ने उन्हें नसीहत दे डाली और कहा कि चाहे राहुल कुछ भी करलें अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं है.
सवाल- साध्वी जी गांधी परिवार का कोई नेता बहुत साल के बाद अयोध्या गया है उन्होंने हनुमानगढ़ी जाकर हनुमान की पूजा अर्चना की है. लेकिन राम जन्म भूमि नहीं गए. किस ढंग से देखते हैं?
साध्वी- राजीव गांधी के बाद किसी ने भी वहां जाना उचित नहीं समझा. मेरे ख्याल से राहुल गांधी जी भी अगर राम जन्मभूमि स्थल पर जाते तो उनको भी हकीकत मालूम होती. कोई भी नेता अगर अयोध्या जाता है तो वह राम जन्मभूमि पर जाता ही है. मैं यह कह सकती हूं की उनको 2017 का चुनाव दिखाई दे रहा है, अगर राम जन्म भूमि पर जाते तो सांप्रदायिकता का ठप्पा लग जाएगा और एक वर्ग कट जाएगा. मैंने तो कहा था कि राम मंदिर तो आस्था का मुद्दा है.
सवाल- क्या वजह लगती है कि इतने सालों के बाद गांधी परिवार से राहुल गांधी अयोध्या गए हैं और ऊपर से यूपी चुनाव सर पर हैं?
साध्वी- क्योंकि मैं राहुल गांधी को इतना कह सकती हूं कि जब वह बनारस में बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं तो उनको अयोध्या की राम जन्म भूमि भी जाना चाहिए. वहां से कांग्रेस की जमीन खिसक चुकी है इसलिए 24 साल बाद उन्हें अयोध्या की याद आई है और ऊपर से वह राम जन्मभूमि नहीं गए. मैं इतना ही कह सकती हूं कि वह कहीं भी माथा टेक ले खटिया बिछवा दें अब कोई फायदा नहीं. 62 वर्षों तक इनकी सरकार रही है. इतने लंबे अरसे में इन्हें किसान याद नहीं आया, ना ही गरीब याद आया. नारों के नाम पर वोट मांगते रहे. राजनीतिक रोटियां सेकते रहे. राहुल गांधी बेशक गली-गली घूमलें, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं आने वाली.
सवाल- जब वह आज पूजा करने के बाद निकल रहे थे तो एक समर्थक ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद दे दें?
साध्वी- आशीर्वाद जनता का ज्यादा लगता है. क्योंकि राजनीति के क्षेत्र में मतदाता ही सब कुछ होता है. जनता रूपी देवता आजादी के बाद से यहीं पड़ी हुई है उस देवता को वक्त रहते याद किया होता तो इनको किसी से आशीर्वाद मांगने की जरुरत ना होती.