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CJI के खिलाफ महाभियोग को लेकर बयानबाजी पर SC ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगाने से इंकार किया है. कोर्ट ने कहा कि पहले पक्षकारों की बात सुनना जरूरी है. एक गैर सरकारी संगठन की ओर से कहा गया कि इस संबंध में लॉ कमिशन की रिपोर्ट है और साथ ही संविधान में भी प्रावधान है कि मीडिया महाभियोग की प्रक्रिया की रिपोर्टिंग न करे. इससे सीधे सीधे जज के न्यायिक कामकाज पर प्रभाव पड़ता है.

सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट
संजय शर्मा/वरुण शैलेश
  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्ष की ओर से शुरू की गई महाभियोग की प्रक्रिया की मीडिया कवरेज को लेकर चिंता जताई है. हालांकि कोर्ट ने महाभियोग प्रक्रिया को लेकर मीडिया रिपोर्टिंग पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाने से इंकार किया है.

शीर्ष कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, हम सब मीडिया में ऐसी खबरें देखकर परेशान हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है. ये चिंता की बात है कि राजनेता किस तरह न्यायपालिका के खिलाफ मीडिया में बयानबाजी कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल का सहयोग मांगा है. इस मामले में अब 7 मई को सुनवाई होगी.  

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फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगाने से इंकार किया है. कोर्ट ने कहा कि पहले पक्षकारों की बात सुनना जरूरी है. एक गैर सरकारी संगठन की ओर से कहा गया कि इस संबंध में लॉ कमिशन की रिपोर्ट है और साथ ही संविधान में भी प्रावधान है कि मीडिया महाभियोग की प्रक्रिया की रिपोर्टिंग न करे. इससे सीधे सीधे जज के न्यायिक कामकाज पर प्रभाव पड़ता है.

गैर सरकार संगठन की याचिका में कहा गया है कि जजों को भयमुक्त माहौल में काम करना चाहिए. जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा कि फिलहाल पक्षकारों की बात सुने बिना वे इस तरह का आदेश जारी नहीं कर सकते, लेकिन जिस तरह मीडिया में खबरें आ रही हैं, वे दुर्भाग्यपूर्ण हैं.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाया है. कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों ने राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर उन्हें ये प्रस्ताव सौंपा. शुक्रवार को विपक्षी पार्टियों की कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद की अगुवाई में बैठक हुई. इसके बाद कई विपक्षी दलों के नेता उपराष्ट्रपति को प्रस्ताव सौंपने पहुंचे.

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