
गुजरात के सूरत में तीन साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए अनिल यादव की डेथ वारंट पर रोक लग गई है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 22 साल के अनिल यादव की फांसी की सजा पर जारी डेथ वारंट पर रोक लगा दी. अनिल यादव की ओर से दाखिल याचिका में डेथ वारंट जारी करने की प्रक्रिया का पालन न करने का आरोप था.
इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने दिसंबर 2019 में अनिल की फांसी की सजा को बरकार रखा था. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए तय समय से पहले निचली अदालत के डेथ वारंट जारी करने की वजह से डेथ वारंट पर रोक लगाई.
क्यों लगी रोक
दरअसल, फांसी की सजा वाले मामलों में हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर के लिए दोषी को 60 दिन का वक्त मिलता है, लेकिन इस केस में गुजरात हाई कोर्ट द्वारा फांसी की सजा बरकरार रखने के आदेश के 30 दिन के भीतर ही ट्रायल कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर दिया था.
29 फरवरी को होनी थी फांसी
सूरत की सेशन कोर्ट ने दोषी अनिल यादव को फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी कर दिया था. उसे 29 फरवरी की सुबह 4 बजकर 39 मिनट पर फांसी दी जानी थी. इसके बाद से साबरमती जेल प्रशासन ने दोषी अनिल यादव को फांसी देने की तैयारी भी तेज कर दी थी. साबरमती जेल के फांसी घर की मरम्मत की जा रही है, लेकिन गुजरात में जल्लाद की नियुक्ति नहीं की गई.
क्या है पूरा मामला
सूरत के एक दलित परिवार की साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची 14 अक्टूबर 2018 की शाम को लापता हो गई थी. अगले दिन परिजनों ने लिम्बयत थाने में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसके बाद पुलिस को उसी दिन शाम के समय पड़ोस के एक मकान से बच्ची का शव बोरे में बंद मिला था. पुलिस ने दुष्कर्म और हत्या के इस मामले में बिहार के रहने वाले अनिल यादव को गिरफ्तार किया था.