
तमिलनाडु में दो जिलों से 17 बच्चों समेत 47 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया गया. तिरुवल्लुर और चेंगलपट्टी जिलों में इन बंधुआ मजदूरों से ईंट के भट्टे और चावल मिल में काम कराया जा रहा था.
तिरुवल्लुर जिले के पूचिआथीपेडू गांव में मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर आरडीओ पहुंचे. जांच के बाद वहां स्थित ईंट के एक भट्टे से 13 बच्चों समेत 42 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया. ये सभी 13 परिवारों से जुड़े थे.
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वहीं चेंगलपट्टू जिले में बुधवार को चावल मिल से 4 बच्चों समेत 10 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाया गया. ये घटना चेंगलपट्टू जिले के मधुरांतागाम में हुई. यहां नियमित जांच के दौरान मजदूरों के शोषण की बात सामने आई. सभी मजदूरों को आरडीओ ऑफिस लाया गया. ये सभी मजदूर एडवांस लेने के बदले पिछले दस साल से चावल मिल में काम कर रहे थे. इन मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है.
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बता दें ऐसा ही मामला तमिलनाडु के कांचीपुरम में देखने को मिला था जहां तमिलनाडु के 2 जिलों से राजस्व विभाग के अधिकारियों ने 16 बच्चों समेत 42 बंधुआ मजदूर को छुड़वाया था. राजस्व अधिकारियों की टीम कांचीपुरम में एक लकड़ी काटने के कारखाने पर पहुंची थी.
जहां टीम ने 28 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया था. बताया जा रहा था बंधुआ मजदूर पिछले पांच सालों से इस जिले के अलग-अलग हिस्सों में लकड़ी के कारखानों में काम कर रहे थे. इनमें से कुछ मजदूर 28 मजदूर कांचीपुरम के थे और 14 वेल्लोर के थे.