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उत्तराखंड: भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला वैली ब्रिज टूटा

उत्तरकाशी से पांच किलोमीटर दूर भारत- चीन सीमा को जोडने वाला वैली ब्रिज एक बार फिर से टूट गया. इसकी वजह से गंगा घाटी का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है.

टूट गया ब्रिज टूट गया ब्रिज
केशवानंद धर दुबे/मोनिका गुप्ता
  • मुंबई,
  • 01 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 2:11 PM IST

उत्तरकाशी से पांच किलोमीटर दूर भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला वैली ब्रिज एक बार फिर से टूट गया. इसकी वजह से गंगा घाटी का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है. पुल टूटने से गंगोत्री घाटी अलग-थलग पड़ गई है. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और प्रशासन की टीम अस्सीगंगा नदी में अस्थाई सड़क बना रही है.

इस कारण से टूटा पुल

यह घटना रविवार सुबह 10.30 बजे की है. पुल से एक ओवर लोड ट्रक गुजर रहा था तभी पुल बीच से टूट गया. पुल किनारों से भी उखड़ गया. पुल ढहने की खबर मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है. अभी तक इस दुर्घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है. इस पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक थी. चीन बॉर्डर के लिहाज से इस पुल का बड़ा महत्व है.

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कब टूटा था चीन सीमा को जोड़ने वाला ये ब्रिज

अस्सीगंगा नदी में 3 अगस्त 2012 को भारी बाढ़ आई थी. इसके कारण गंगोरी के पास गंगेात्री हाइवे पर बना पक्का पुल बह गया था. इसके स्थान पर सेना व बीआरओ ने 190 मीटर लंबा वैली ब्रिज बनाया था. इस ब्रिज की क्षमता 18 टन की थी, लेकिन 2017 में दो ट्रक इस पुल से गुजर रहे थे उनके भार से ये टूट गया था. आनन-फानन में बीआरओ द्वारा फिर से वैली ब्रिज का निर्माण किया गया और आवाजाही शुरू की गई. लेकिन एक बार फिर से ये पुल धराशाही हो गया.

45 गांवों से टूटा संपर्क

इस वैली ब्रिज के टूटने से उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी ब्लाक के असीगंगा, उपला टकनौर, नाल्ड कठूड़ पट्टी के करीब 45 गांवों का संपर्क टूट गया है. इसके साथ ही यह पुल सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भारत चीन सीमा पर नेलांग, नागा, सोनाम, जादूंग, सुमला, नीला पानी, मेंडी  स्थित सेना व भारत तिब्बत सीमा पुलिस आइटीबीपी की चौकियों से भी सम्पर्क कटा. अगर वैकल्पिक पुल का निर्माण जल्दी नहीं होता है तो सेना व आइटीबीपी के चौकियों में राशन आदि का संकट हो सकता है.

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