
'निजी डेटा संरक्षण बिल 2019' को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मंजूरी दे दी. इस बिल को अगले हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है. इस बिल के जरिए सार्वजनिक और प्राइवेट कंपनियों के लिए निजी डेटा की प्रोसेसिंग को लेकर कानून लाए जाने की मंशा है.
हालांकि, बिल को अभी सदन के पटल पर रखा जाना है. सूत्रों के मुताबिक, डेटा संरक्षण में कंपनियों के लिए ये जरूरी नहीं होगा कि वे तमाम तरह के निजी डेटा को भारत में ही स्टोर और प्रोसेस करें. हालांकि, संवेदनशील और क्रिटिकल निजी डेटा को लेकर भौगोलिक बंदिशों का प्रावधान बिल में हो सकता है.
देश में डेटा स्टोरेज सुविधा खोलने की बात
बता दें कि सरकार अतीत में गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों से भारत में अपनी डेटा स्टोरेज सुविधा खोलने के मुद्दे पर बात करती रही है. डेटा और उसकी प्रोसेसिंग तक पहुंच का प्रावधान भारत से बाहर स्थित डेटा प्रोसेसर्स पर ही लागू होगा और ये सिर्फ ऐसी किसी भी गतिविधि से संबंधित होगा, जिसकी डेटा सिद्धांतों की रूपरेखा भारतीय क्षेत्र से जुड़ी होगी.
'कैम्ब्रिज एनालिटिका' जैसी स्थिति पर चिंता
कुछ विशेषज्ञ भारतीय क्षेत्र से बाहर डेटा प्रोसेसिंग को लेकर 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' जैसी स्थिति की संभावना को लेकर चिंता जता चुके हैं. विशेषज्ञ इस दलील पर भी सवाल उठाते हैं कि डेटा एक वैश्विक गतिविधि है. बिल में संभवत: इस पहचान का प्रावधान हो सकता है कि संवेदनशील डेटा क्या है और उसी हिसाब से इसे श्रेणीबद्ध किया जाए. संवेदनशील डेटा की सूची की पहचान वित्तीय और स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स के तौर पर की जाएगी.
हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में विदेश में प्रोसेस किया जा सकता है. अगर ऐसा है तो फिर कैसे ऐसे डेटा का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा. क्रिटिकल डेटा की परिभाषा सरकार की ओर से तय की जाएगी और इसे अनिवार्य तौर पर भारत में स्टोर और प्रोसेस करना जरूरी होगा. बिल इसका संदर्भ और दायरा तय करेगा.
सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की संभावना घटेगी
सूत्रों के मुताबिक, बिल से सरकार को प्लानिंग के लिए किसी भी कंपनी से गैर निजी डेटा का अनुरोध करने की अनुमति मिल जाएगी. सोशल मीडिया कंपनियों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया विकसित करनी होगी जो यूजर्स के लिए स्वैच्छिक होगी, लेकिन इससे यूजर की पहचान छुपाकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की संभावना घटेगी.
सूत्रों ने बताया कि सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि इस बिल को पास करने से पहले इस पर व्यापक विमर्श कराया जाएगा.