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कौन हैं ओम बिड़ला, जो बनेंगे लोकसभा के नए स्पीकर

राजस्थान के कोटा से दूसरी बार सांसद बने ओम बिड़ला को बीजेपी ने लोकसभा का स्पीकर बनाने का फैसला किया है. चुनाव प्रक्रिया की औपचारिकता पूरी होने के  बाद वह पदभार ग्रहण करेंगे.

राजस्थान के कोटा के सांसद ओम बिड़ला लोकसभा के नए स्पीकर होंगे.(फोटो-OmBirla/फेसबुक) राजस्थान के कोटा के सांसद ओम बिड़ला लोकसभा के नए स्पीकर होंगे.(फोटो-OmBirla/फेसबुक)
aajtak.in/नवनीत मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2019,
  • अपडेटेड 11:20 AM IST

राजस्थान के कोटा से सांसद ओम बिड़ला लोकसभा का नए स्पीकर होंगे. बीजेपी ने उनका नाम तय किया है. ओम बिड़ला का नाम इससे पहले राष्ट्रीय राजनीति में कभी सुर्खियों में नहीं रहा. लोकसभा अध्यक्ष के लिए बिड़ला का नाम तय कर मोदी और शाह की जोड़ी ने फिर से चौंकाया है. सिर्फ दो बार के सांसद ओम बिड़ला को लोकसभा का अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने संदेश दिया है कि अहम पदों के लिए सिर्फ अनुभव ही नहीं और भी समीकरण मायने रखते हैं. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में जब गुणवत्ता, निपुणता और तत्परता पर सबसे अधिक फोकस करने की बात कही थी, तभी यह संदेश दिया था कि वरिष्ठता ही जिम्मेदारी सौंपने का एकमात्र पैमाना नहीं है.

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वैश्य बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले सिर्फ दो बार के सांसद ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाने के पीछे की वजह लोग तलाशने में जुटे हैं. ओम बिड़ला के कम अनुभव के सवाल पर कहा जा रहा है कि वह राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव रहे हैं. इस दौरान उन्होंने लीक से हटकर कई पहल की. 2014 में कई संसदीय समितियों में रहे. इसके अलावा उनकी प्रबंधन क्षमता भी अच्छी है. बड़े नेताओं से रिश्ते भी अच्छे हैं. ऊर्जावान भी हैं. इन सब कारणों से उन्हें लोकसभा अध्यक्ष बनाने का फैसला किया गया. हालांकि वसुंधरा राजे से उनके रिश्ते ज्यादा बेहतर नहीं बताए जाते हैं.

राजनीतिक करियर की बात करें तो चार दिसंबर 1962 को जन्मे ओम बिड़ला 2014 में 16 वीं लोकसभा के चुनाव में पहली बार सांसद बने. फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा इसी सीट से सांसद बने. इससे पहले 2003,  2008 और 2013 में कोटा से ही विधायक बने.  इस प्रकार वह कुल तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं.

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कई समितियों के रहे सदस्य

2014 की लोकसभा में ओम बिड़ला को कई समितियों में जगह मिली थी. उन्हें प्राक्कलन समिति, याचिका समिति, ऊर्जा संबंधी स्थायी समिति, सलाहकार समिति का सदस्य बनाया गया था. ओम बिड़ला सहकारी समितियों के चुनाव में भी रुचि रखते हैं. 1992 से 1995 के बीच वह राष्ट्रीय सहकारी संघ लिमिटेड के उपाध्यक्ष रहे. कोटा में सहकारी समितियों में आज भी उनका दखल बताया जाता है. परिवार की बात करें तो पत्नी अमिता बिड़ला पेशे से चिकित्सक हैं. पिता का नाम श्रीकृष्ण बिड़ला और माता का नाम शकुंतला देवी हैं. दो बेटे और दो बेटियां हैं.

मरीजों के लिए किए काम

राजस्थान सरकार मे संसदीय सचिव भी रहे. इस दौरान उन्होंने गंभीर रोगों के शिकार लोगों के इलाज के लिए 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की.अगस्त 2004 में बाढ़ पीड़ितों के लिए काम किया. 2006 में तब ओम बिड़ला सुर्खियों में तब आए जब स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आजादी के स्वर नामक कार्यक्रम में 15 हजार से अधिक अधिकारियों को समानित किया. यह समारोह कोटा और बूंदी में आयोजित हुआ था.

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