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'आनंद मोहन को हैदराबाद आने दिया तो भुगतना पड़ेगा...', तेलंगाना BJP चीफ बंदी संजय की KCR को चेतावनी

बिहार के बाहुबली और पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह गुरुवार को जेल से बाहर आ गए हैं. वह 1994 में गोपालगंज के जिलाधिकारी रहे जी कृष्णैया की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे. कृष्णैया तेलंगाना के रहने वाले थे. अब चर्चा है कि आनंद हैदराबाद जा सकते हैं. इसी को लेकर तेलंगाना बीजेपी ने केसीआर सरकार को चेतावनी दी है.

आनंद मोहन को लेकर बीजेपी ने केसीआर को घेरा (फाइल फोटो) आनंद मोहन को लेकर बीजेपी ने केसीआर को घेरा (फाइल फोटो)
पॉलोमी साहा
  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 6:36 PM IST

तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने जेल से रिहा हुए बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह को तेलंगाना सरकार को खुली धमकी दे दी. उन्होंने ट्वीट किया- 1994 में गोपालगंज जिलाधिकारी के रूप में काम करने वाले तेलंगाना के बेटे जी कृष्णैया की बेरहमी से हत्या करने वाले हत्यारे आनंद मोहन के हैदराबाद आने की खबरें हैं. अगर खबरें सही हैं तो पलामुरु के बच्चे की हत्या करने वाले को तेलंगाना में क्यों घुसने दिया जा रहा है?

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उन्होंने आगे लिखा- शर्मनाक है कि नीतीश कुमार सरकार ने उम्रकैद की सजा काट रहे आनंद मोहन को सजा पूरी होने से पहले ही रिहा कर दिया. सीएम केसीआर ने अभी तक नीतीश कुमार के रुख का जवाब क्यों नहीं दिया? लोगों को गोली मारकर गरीबों का खून पीने वाले यूपी के गैंगस्टर अतीक अहमद की हत्या की निंदा करने वाले बीआरएस नेता कृष्णैया के हत्यारों के आने पर चुप क्यों हैं? क्या इस पर नीतीश और केसीआर के बीच कोई डील हुई है? जी कृष्णैया की हत्या करने वाले मर्डरर को किसी भी कीमत में हैदराबाद आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, अगर ऐसा हुआ तो बीआरएस सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

15 साल बाद जेल से हुआ रिहा

गोपालगंज के डीएम जी. कृष्णैया की हत्या के दोषी बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह आखिरकार गुरुवार को 15 साल तक जेल में रहने के बाद रिहा जा गए. जेल मैन्यूअल की संशोधन के बाद उनके बाहर आने का रास्ता साफ हो पाया है. दरअस बिहार सरकार ने 10 अप्रैल की कारागार नियमावली, 2012 के नियम 481(i)(क) में संशोधन कर दिया. इसके तहत 'ड्यूटी पर तैनात लोक सेवक की हत्या' को अब अपवाद की श्रेणी से हटा दिया. पुराने नियम के तहत सरकारी सेवक की हत्या करने वालों को पूरी सजा से पहले रिहाई की छूट का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन नियम में संशोधन के बाद ऐसे अपराधियों के लिए भी अब छूट मिल सकेगी. इस नए नियम के तहत ही बिहार सरकार ने पिछले दिनों आनंद मोहन समेत 27 कैदियों की रिहाई की अधिसूचना जारी की थी.

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1994 को कर दी थी डीएम की हत्या

बिहार के गैंगस्टर छोटन शुक्ला की  4 दिसंबर 1994 को हत्या कर दी गई थी, जिससे मुजफ्फरपुर इलाके में तनाव फैल गया था. 5 दिसंबर को हजारों लोग छोटन शुक्ला का शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन कर रहे थे. तभी गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया वहां से गुजर रहे थे. गुस्साए लोगों ने पहले तो उनकी कार पथराव किया, फिर उन्हें कार से बाहर निकाल कर पीट-पीटकर मार डाला.

आरोप लगा कि डीएम की हत्या करने वाली उस भीड़ को आनंद मोहन ने ही उकसाया था. इस मामले में आनंद को 2007 में फांसी की सजा सुनाई गई. 2008 में हाई कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था. कृष्णैया मूल रूप से तेलंगाना के महबूबनगर के रहने वाले थे. वह बिहार कैडर में 1985 बैच के IAS अधिकारी थे. वह दलित समुदाय से आते थे और बेहद साफ सुथरी छवि वाले ईमानदार अफसर थे. साल 1994 में ही वह गोपालगंज के डीएम बने थे. 

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