
तेलंगाना में कांग्रेस को मिली जबरदस्त जीत बाद आज पार्टी नेता रेवंत रेड्डी राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप पर शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में किया गया जिसमें शामिल होने के लिए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत तमाम दिग्गज नेता हैदराबाद पहुंचे. रेवंत रेड्डी के मंत्रिमंडल में एक डिप्टी सीएम सहित 12 विधायक मंत्रियों ने शपथ ली.
नए मंत्रिमंडल में पिछड़ा वर्ग समुदाय, एससी समुदाय और एसटी, कम्मा, वेलामा और ब्राह्मण समुदायों से भी सभी को मौका दिया गया है. राज्य मंत्रिमंडल में 17 अन्य लोगों के लिए जगह है क्योंकि तेलंगाना कैबिनेट की 18 से अधिक नहीं हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, राज्य में कोई रोटेशनल मुख्यमंत्री फॉर्मूला नहीं होगा.
कौन हैं विक्रमार्क
कांग्रेस विधायक और पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लू भट्टी विक्रमार्क डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ ग्रहण की. मधिरा निर्वाचन क्षेत्र के चार बार के विधायक, मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने अपने कार्यों की बदौलत एक अलग छाप छोड़ी है.
मल्लू भट्टी विक्रमार्क का नाम सीएम की रेस में भी शामिल था क्योंकि केसीआर को हटाने के कांग्रेस अभियान में उनकी भूमिका अहम रही थी. खुद को सीएम पद का दावेदार मानने वाले भट्टी ने बताया कि उन्होंने राज्य में कांग्रेस सरकार बनाने के लिए उन्होंने 1365 किलोमीटर लंबी पदयात्रा करते हुए पीपुल्स मार्च निकाला था. यह उसी तरह की पदयात्रा थी जैसी 2003 में आंध्र प्रदेश में तेलगु देशम पार्टी की सरकार हटाने कि लिए कांग्रेस नेता वाईएस राजशेखर रेड्डी ने की थी. रेड्डी ने तब 1500 किलोमीटर की पदयात्रा की थी.
इसके अलावा, वह पार्टी का सबसे प्रमुख दलित चेहरा रहे हैं जिसने इस चुनाव में कांग्रेस का जोरदार समर्थन किया था. जब केसी वेणुगोपाल ने सीएलपी नेता के रूप में रेवंत रेड्डी के नाम की घोषणा की तो भट्टी विक्रमार्क स्पष्ट रूप से नाखुश दिखे. लेकिन कांग्रेस नेतृत्व को इस बात से राहत होगी कि असंतोष की सुगबुगाहट के बावजूद कोई भी वरिष्ठ नेता बागी नहीं बनेगा और पार्टी के लिए सिरदर्द नहीं बनेगा.
कांग्रेस को मिला था स्पष्ट बहुमत
आपको बता दे ंकि तेलंगाना में कांग्रेस विधानसभा चुनाव के दौरान 119 में 64 सीटें जीतकर बहुमत के आंकड़े को पार किया था और सत्तारूढ़ के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली भारत राष्ट्र समिति सरकार को करारी शिकस्त दी थी. बीआरएस ने 39 सीटें जीतीं.