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तेलंगाना: टनल में फंसी 8 जिंदगियां और सिर्फ 40 मीटर की दूरी, मजदूरों को बचाने में अब जुट गए रैट माइनर्स

उत्तराखंड के सिल्क्यारा बेंड-बरकोट टनल में फंसे मजदूरों को बचाने वाली 'रैट माइनर्स' की टीम भी इस बचाव अभियान में शामिल हो गई है. जिला कलेक्टर के अनुसार, सुरंग में पानी का रिसाव जारी है, लेकिन अधिकारी किसी भी तरह की अतिरिक्त क्षति को रोकने के लिए सभी एहतियाती कदम उठा रहे हैं.

टनल में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी (फोटो: पीटीआई) टनल में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी (फोटो: पीटीआई)
aajtak.in
  • हैदराबाद,
  • 25 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 9:05 AM IST

तेलंगाना के नगरकुरनूल जिले में हुई सुरंग दुर्घटना के बाद बचाव कार्य जोरों पर है. सोमवार को जिला कलेक्टर बी संतोष ने बताया कि सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की दो टीमें बचाव अभियान में लगी हुई हैं. उत्तराखंड की सिल्क्यारा टनल में फंसे मजदूरों को बचाने वाली रैट माइनर्स की टीम भी अब इस रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ गई है. शनिवार को सुरंग की छत गिरने के कारण फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए अंतिम 40 मीटर की दूरी तय करने के लिए मशीनरी तैनात की जा रही है.

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कलेक्टर बी संतोष ने कहा, 'हम अब एक टीम भेज रहे हैं. कल हम अंतिम 40 मीटर तक नहीं पहुंच सके थे, लेकिन अब मशीन की मदद से हम वहां तक भी पहुंच जाएंगे. इसके साथ ही, पानी निकालने की प्रक्रिया भी चल रही है और सुरंग के अंदर खुदाई के लिए मशीनें भेजी जा रही हैं.'

'कितनी संभावना नहीं मालूम लेकिन हालात अच्छे नहीं'

हालांकि, राहत कार्यों की निगरानी कर रहे मंत्री जुंपल्ली कृष्णा राव ने कहा कि अंदर फंसे आठ लोगों के जीवित बचने की संभावना 'बहुत कम' है. उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कह सकता कि उनके बचने की कितनी संभावना है, लेकिन हालात अच्छे नहीं हैं. फिर भी, यदि थोड़ी भी संभावना है, तो हम उन्हें बचाने की पूरी कोशिश करेंगे. फंसे हुए आठ लोगों में चार मजदूर, दो कंपनी कर्मचारी और दो अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी शामिल हैं. हम किसी भी तरह की कोताही नहीं बरत रहे हैं.'

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रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े रैट माइनर्स

इस बीच, उत्तराखंड के सिल्क्यारा बेंड-बरकोट टनल में फंसे मजदूरों को बचाने वाली 'रैट माइनर्स' की टीम भी इस बचाव अभियान में शामिल हो गई है. जिला कलेक्टर के अनुसार, सुरंग में पानी का रिसाव जारी है, लेकिन अधिकारी किसी भी तरह की अतिरिक्त क्षति को रोकने के लिए सभी एहतियाती कदम उठा रहे हैं.

अचमपेट के विधायक वंसी कृष्णा ने कहा कि टनल बोरिंग मशीन से काटकर अंदर जमे कीचड़ को हटाया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सेना और एनडीआरएफ की पहुंच से बाहर के हिस्सों की जांच के लिए एक माइक्रो-कैमरा सुरंग के अंदर भेजा जाएगा, ताकि फंसे हुए लोगों की सटीक स्थिति का पता लगाकर बचाव कार्य को आसान बनाया जा सके.

साथियों का इंतजार कर रहे अन्य मजदूर

जैसे-जैसे बचाव कार्य आगे बढ़ रहा है, बचे हुए मजदूर अपने साथियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं. दुर्घटना के चश्मदीदों ने बताया कि घटना के दिन, 22 फरवरी की सुबह, जैसे ही वे सुरंग में घुसे, पानी का बहाव अचानक तेज हो गया और मिट्टी ढहने लगी.

झारखंड के रहने वाले एक मजदूर, निर्मल साहू ने कहा, 'कुछ लोग खतरा भांपकर बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन आठ लोग बाहर नहीं आ सके. हमें उम्मीद है कि सरकार हमारे साथियों को सुरक्षित बाहर निकालेगी और हम उन्हें जीवित देख सकेंगे.'

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काम पर लौटने को नहीं तैयार

इस बीच, अन्य मजदूरों ने वेतन न मिलने और प्रबंधन के दुर्व्यवहार की शिकायत की. उन्होंने कहा कि वे सुरंग में वापस जाने को तैयार नहीं हैं. एक अन्य मजदूर ने कहा, 'हमें तीन महीने से वेतन नहीं मिला है, और अब प्रबंधन हमें जबरन वापस उसी जगह भेज रहा है. जब हमने अपनी आंखों के सामने यह दुर्घटना देखी है, तो हम वहां कैसे जा सकते हैं?'

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, एल एंड टी कंपनी एक एंडोस्कोपिक कैमरा तैनात कर रही है, जिससे सुरंग के अंदर की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी. कंपनी के एक अधिकारी ने बताया, 'हमने उत्तराखंड में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया था. दो टीमें यहां आ चुकी हैं और एंडोस्कोपिक व रोबोटिक कैमरे लाए गए हैं.'

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