
तेलंगाना सरकार ने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से 2022-2023 में राजस्व संग्रह में 40,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. इसकी जानकारी प्रदेश की जनता तक पहुंचाने के लिए दिसंबर में एक सप्ताह के लिए विधानसभा का सत्र आयोजित किया जाएगा.
प्रदेश के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने वित्त मंत्री हरीश राव और विधायी मामलों के मंत्री प्रशांत रेड्डी को इस दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया है. तेलंगाना सरकार के बयान में कहा गया है कि उल्टी-सीधी आर्थिक नीतियों पर चल रही केंद्र सरकार का रवैया राज्यों के भविष्य और उनके विकास में बाधक बन गया है.
राज्य सरकार के बयान के मुताबिक, केंद्र सरकार एक प्रैक्टिस के रूप में सभी राज्यों के लिए राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) सीमा की घोषणा करता है. तेलंगाना को 2022-23 वित्तीय वर्ष की शुरुआत में 54,000 करोड़ रुपये की FRBM सीमा दी गई थी, लेकिन अचानक इस सीमा को घटाकर 39,000 करोड़ रुपये कर दिया गया.
तेलंगाना सरकार विधानसभा में देगी जानकारी
इससे राज्य को करीब छह हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. केंद्र ने राज्य को गैर-बजटीय कोष में 20,000 करोड़ रुपये जारी करने पर भी रोक लगा दी. कुल मिलाकर केंद्र की गलत नीतियों और उसके फैसलों के कारण तेलंगाना को करीब 40,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. तेलंगाना सरकार इसे जनता के सामने लाना चाहती है, इसलिए राज्य और देश को पूरी जानकारी देने के लिए दिसंबर में विधानसभा का सत्र आयोजित किया जाएगा.